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लैंडफॉल से एक रात पहले अति भीषण हुआ चक्रवात अरनब: 150 किमी की रफ्तार के झोंके, 50 हजार लोग सुरक्षित स्थानों पर, 53 ट्रेनें और विजयवाड़ा की उड़ानें रद्द

सांकेतिक चित्र: बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवात का उपग्रह चित्र सांकेतिक चित्र: बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवात का उपग्रह चित्र

विशाखापत्तनम ब्यूरो

बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवात अरनब अब भारत के पूर्वी तट के बेहद करीब पहुंच चुका है। मंगलवार की सुबह तक यह तंत्र विशाखापत्तनम से करीब 260 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में था और 22 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ रहा था। मौसम विभाग के अनुसार यह तंत्र मंगलवार शाम तक पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ेगा और उसके बाद उत्तर-पश्चिम की ओर मुड़ेगा। लैंडफॉल का अनुमानित स्थान आंध्र प्रदेश और यानम का तट है, जहां यह बापटला और विशाखापत्तनम के बीच यानम के पास बुधवार की पूर्वाह्न में तट से टकराएगा। लैंडफॉल के समय इसके अति भीषण चक्रवाती तूफान के रूप में रहने का अनुमान है, जो इस बात का संकेत है कि तटीय इलाकों में तेज हवा, भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों का असर एक साथ देखने को मिलेगा।

ताज़ा स्थिति: अति भीषण चक्रवात में बदला अरनब

मौसम विभाग ने मंगलवार को दिन में कई बार अपना अनुमान अद्यतन किया। सुबह के अनुमान में लैंडफॉल के समय हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंके 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक बताए गए थे, लेकिन दोपहर बाद के ताज़ा अनुमान में हवा की रफ्तार बढ़कर 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंके 150 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गए। इसका मतलब है कि तंत्र के तट के करीब आते-आते और मज़बूत होने की पुष्टि हुई है। मौसम विभाग के भुवनेश्वर केंद्र के अनुसार तंत्र मंगलवार को काकीनाडा से करीब 300 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व और गोपालपुर से करीब 380 किलोमीटर दक्षिण में था। आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों पर कई बंदरगाहों पर खतरे और स्थानीय चेतावनी के संकेत लगा दिए गए हैं। मछुआरों को 30 अक्टूबर की सुबह तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। समुद्र के रुख को देखते हुए तटीय इलाकों में लोगों को समुद्र तटों और पर्यटन स्थलों से दूर रहने को कहा गया है, क्योंकि ऊंची लहरों और तेज हवा से जान का खतरा हो सकता है।

50 हज़ार लोग सुरक्षित स्थानों पर, चार लाख की निकासी का अनुमान

आंध्र प्रदेश में निकासी का काम तेज़ी से चल रहा है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार सोमवार रात तक करीब 50 हज़ार लोगों को संवेदनशील इलाकों से निकालकर आश्रय स्थलों पर पहुंचाया जा चुका था। अधिकारियों का अनुमान है कि कुल करीब चार लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की ज़रूरत पड़ सकती है, इसलिए निकासी का काम लगातार जारी है। राज्य में लैंडफॉल से पहले 1,763 चक्रवात आश्रय स्थलों की पहचान की गई है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार 16 जिले, 2,460 राजस्व गांव और 92 शहरी क्षेत्र सीधे तौर पर इस तंत्र के रास्ते में आते हैं। निकासी के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों तक पहुंचाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य में 1,350 से अधिक गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है और 1,087 चिकित्सा दल तैनात किए गए हैं। इसके अलावा 30 हज़ार से अधिक मछली पकड़ने वाली नावों को सुरक्षित स्थानों पर लगाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी मछुआरे सुरक्षित लौट आए हैं और समुद्र में कोई मछुआरा नहीं रह गया है।

सांकेतिक चित्र: बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवात का उपग्रह चित्र
सांकेतिक चित्र: बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवात का उपग्रह चित्र

रेल और हवाई यातायात पर असर

चक्रवात के कारण रेल और हवाई यातायात पर बड़ा असर पड़ा है। दक्षिण तट के मार्गों पर मंगलवार और बुधवार को 53 ट्रेनों का संचालन रोका गया है, जबकि पूर्वी क्षेत्र में भी एक दर्जन से अधिक ट्रेनें रद्द की गई हैं। रद्द की गई ट्रेनों से विजयवाड़ा, राजमुंदरी, मछलीपट्टनम, नरसापुर, भीमावरम, काकीनाडा बंदरगाह, गुंटूर और विशाखापत्तनम जैसे शहरों के मार्ग प्रभावित हुए हैं। रेलवे ने विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम मंडलों में करीब 600 किलोमीटर ट्रैक की निगरानी तेज़ कर दी है। रेल मंत्री ने मंगलवार को इन दोनों मंडलों की तैयारियों की समीक्षा की और सुरक्षा प्रोटोकॉल तथा तेज़ बहाली की व्यवस्था का जायज़ा लिया। हवाई यातायात में विजयवाड़ा हवाई अड्डे से बुधवार की सभी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। मंगलवार को भी विजयवाड़ा से कडपा, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु और विशाखापत्तनम के लिए कई उड़ानें रद्द हुईं। एक अन्य एयरलाइन ने भी विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा से आने-जाने वाली उड़ानों के प्रभावित होने की चेतावनी जारी करते हुए यात्रियों से हवाई अड्डा जाने से पहले उड़ान की स्थिति जांचने को कहा है।

आंध्र प्रदेश में युद्ध स्तर पर तैयारियां

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चौबीसों घंटे निगरानी रखने, जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष बनाने और तटीय निवासियों को नियमित चेतावनी देने के निर्देश दिए हैं। राज्य ने राहत कार्यों के लिए 20 जिलों को 27 करोड़ रुपये जारी किए हैं। मुख्यमंत्री ने निचले इलाकों के लोगों की निकासी, राहत शिविरों में आवश्यक सामग्री का भंडार और बिजली तथा परिवहन सेवाओं की तेज़ बहाली के निर्देश भी दिए हैं। विशाखापत्तनम में मंगलवार सुबह से ही तेज़ बारिश के कारण कई इलाकों में पानी भर गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और कुछ जगहों पर बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई। तेज़ हवा से पेड़ गिरने की भी खबरें आई हैं। उप्पाडा और काकीनाडा के बीच उठती समुद्री लहरों से सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार तंत्र का असर तटीय आंध्र के उत्तरी जिलों में पहले ही दिखने लगा है, जहां भारी बारिश और तेज़ हवा का दौर शुरू हो चुका है। श्रीकाकुलम जिले में भारी बारिश के साथ तेज़ हवा चलने की जानकारी मिली है।

ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी अलर्ट

ओडिशा में अब तक निकासी शुरू नहीं हुई है, लेकिन राज्य ने पांच जिलों में मंगलवार और बुधवार को स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए हैं। राज्य के विशेष राहत आयुक्त के अनुसार ओडिशा में स्थिति पर नज़र रखी जा रही है और ज़रूरत पड़ने पर निकासी की जाएगी। ओडिशा के खोरधा जिले में मंगलवार को बारिश हुई और चिल्का झील में पर्यटक नाव तथा नौका सेवाएं 26 से 29 अक्टूबर तक निलंबित कर दी गई हैं। मौसम विभाग ने ओडिशा के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश और कुछ जगहों पर अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी सभी जिला कलेक्टरों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। मौसम विभाग के रायपुर केंद्र के अनुसार छत्तीसगढ़ में बुधवार और गुरुवार को कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश और अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। झारखंड में भी 28 अक्टूबर से बारिश का दौर शुरू होने का अनुमान है। वहां रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि गढ़वा, पलामू, लातेहार और कुछ अन्य जिलों के लिए 30 अक्टूबर तक ऑरेंज अलर्ट जारी है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी 28 से 31 अक्टूबर के बीच बारिश, आंधी और तेज़ हवा का अनुमान है, जिससे दिन के तापमान में 5 से 8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है।

मध्य प्रदेश पर क्या असर पड़ेगा

चक्रवात अरनब का सीधा असर आंध्र प्रदेश और ओडिशा पर पड़ेगा, लेकिन इसके बाद यह तंत्र कमज़ोर होकर अंदरूनी इलाकों की ओर बढ़ेगा, जिससे मध्य भारत में भी बारिश का असर देखने को मिलेगा। इस तंत्र के असर से सप्ताह के उत्तरार्ध में पूर्वी मध्य प्रदेश में भी भारी बारिश की चेतावनी पहले से जारी है। मध्य प्रदेश के पूर्वी जिलों में रहने वाले लोगों को अगले कुछ दिनों में मौसम में बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए। तेज़ बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने, बिजली आपूर्ति में बाधा और सड़क यातायात में दिक्कत की आशंका रहती है। किसानों को भी सलाह दी जाती है कि वे खुले में रखी फसल और कृषि सामग्री को सुरक्षित स्थान पर रखें। राज्य में मौसम की स्थिति पर नज़र रखी जा रही है और जैसे-जैसे तंत्र आगे बढ़ेगा, जिलों के अनुसार चेतावनी अद्यतन की जाएगी। मध्य प्रदेश के लोगों को आधिकारिक मौसम चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए और अफवाहों से बचना चाहिए।

नेपाल तक पहुंचेगा असर, पर्यटकों को चेतावनी

चक्रवात अरनब का असर केवल भारत के तटीय राज्यों तक सीमित नहीं रहेगा। नेपाल के अधिकारियों ने भी पर्यटकों को ऊंचाई वाले इलाकों में न जाने की चेतावनी दी है, क्योंकि गुरुवार रात से शनिवार के बीच वहां मूसलाधार बारिश, बर्फीले तूफान और हिमस्खलन की आशंका जताई गई है। नेपाल इस समय अगस्त में आई विनाशकारी बाढ़ से उबरने की कोशिश कर रहा है, जिसमें करीब 1,500 लोगों की जान गई थी। ऐसे में चक्रवात से जुड़ी बारिश वहां के लिए भी चिंता का विषय है। भारत के अंदर भी यह तंत्र आंध्र प्रदेश से आगे बढ़कर तेलंगाना, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक बारिश पहुंचा सकता है। मौसम विभाग ने इन राज्यों में भी भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसलिए तटीय राज्यों के साथ-साथ अंदरूनी राज्यों के प्रशासन को भी तैयार रहने को कहा गया है।

लोगों के लिए सावधानियां

चक्रवात के दौरान सबसे ज़रूरी बात यह है कि लोग आधिकारिक निर्देशों का पालन करें। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की ओर से निकासी का निर्देश मिलने पर बिना देर किए सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए। समुद्र तटों, बंदरगाहों और निचले इलाकों में जाने से बचना चाहिए। मछुआरों को 30 अक्टूबर की सुबह तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। जिन लोगों की ट्रेन या उड़ान बुक है, उन्हें यात्रा से पहले अपनी ट्रेन या उड़ान की स्थिति जांच लेनी चाहिए, क्योंकि कई सेवाएं रद्द की गई हैं। बिजली के खंभों, पेड़ों और कमज़ोर संरचनाओं से दूर रहना चाहिए, क्योंकि तेज़ हवा में इनके गिरने का खतरा रहता है। घरों में पर्याप्त पानी, दवाएं, टॉर्च और मोबाइल चार्जर तैयार रखना चाहिए। अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल मौसम विभाग तथा जिला प्रशासन की ओर से जारी जानकारी को ही सही मानें। आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन के नंबरों पर संपर्क करना चाहिए।

आगे क्या होगा: लैंडफॉल के बाद का रास्ता

मौसम विभाग के अनुसार चक्रवात अरनब बुधवार की पूर्वाह्न में आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा। लैंडफॉल के बाद यह तंत्र धीरे-धीरे कमज़ोर होगा, लेकिन इसके साथ चल रही नमी और हवा के कारण अंदरूनी इलाकों में बारिश का दौर जारी रहेगा। लैंडफॉल के बाद सबसे बड़ी चुनौती बिजली और परिवहन सेवाओं की बहाली, राहत शिविरों में लोगों की देखभाल और प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन होगी। राष्ट्रीय और राज्य आपदा मोचन बलों की टीमें पहले से तैनात हैं और अतिरिक्त कर्मी भी तैयार रखे गए हैं। सेना, नौसेना, वायुसेना और तटरक्षक बल ने भी बचाव दलों, जहाज़ों और विमानों को तैयार रखा है। केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और पुदुचेरी को अलर्ट पर रखा है। आने वाले 24 घंटे इस चक्रवात के लिहाज़ से सबसे अहम होंगे, क्योंकि लैंडफॉल के समय हवा की रफ्तार, बारिश की मात्रा और समुद्र में उठने वाली लहरों से ही नुकसान का स्तर तय होगा। तब तक तटीय इलाकों में सतर्कता बरतना सबसे ज़रूरी है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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