भोपाल ब्यूरो
मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़े राजनीतिक अभियान का ऐलान किया है। पार्टी भोपाल, इंदौर और जबलपुर में बड़ी रैलियां आयोजित करेगी। इस अभियान का नाम ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ रखा गया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को भोपाल में यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि तीनों शहरों की रैलियों में करीब एक लाख लोगों के जुटने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में भी इस अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अभियान का संदेश प्रदेश के कोने-कोने तक पहुंच सके।
कोर कमेटी की बैठक में हुआ फैसला
यह फैसला भाजपा की प्रदेश कोर कमेटी की बैठक में लिया गया। बैठक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भोपाल स्थित निवास पर हुई। बैठक में प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पत्रकारों से बातचीत में अभियान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तीन बड़े शहरों में रैलियां आयोजित की जाएंगी और जिला स्तर पर भी कार्यक्रम होंगे। बैठक में संगठन के आगामी कार्यक्रमों और तैयारियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
तीन शहरों में रैलियां, सभी जिला मुख्यालयों में कार्यक्रम
घोषणा के अनुसार, भोपाल, इंदौर और जबलपुर — प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों — में बड़ी रैलियां होंगी। इन तीनों शहरों को इसलिए चुना गया है क्योंकि ये प्रदेश की राजनीति, प्रशासन और जनसंपर्क के बड़े केंद्र हैं। भोपाल प्रदेश की राजधानी है, इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ा व्यावसायिक शहर है और जबलपुर महाकौशल क्षेत्र का प्रमुख केंद्र है। इन तीनों शहरों की रैलियों में कुल करीब एक लाख लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में भी अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे अभियान केवल तीन शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिला स्तर पर कार्यकर्ताओं और आम लोगों तक भी पहुंचेगा।
अभियान के पीछे क्या है — मतदाता सूची को लेकर विवाद
इस अभियान की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद है। कांग्रेस ने इस पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि इससे चुनावी पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर जवाबदेही की मांग भी की है और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज को लेकर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, भाजपा का कहना है कि कांग्रेस के आरोप लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमले के समान हैं और पार्टी अपने अभियान के जरिए अपना पक्ष जनता के सामने रखेगी। भाजपा इस अभियान को कांग्रेस के आरोपों के जवाब के रूप में पेश कर रही है। इस तरह, मतदाता सूची का मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति में एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है और दोनों प्रमुख दल अपने-अपने तरीके से जनता के बीच जा रहे हैं।
तारीख और स्थान अभी तय नहीं — आगे क्या होगा
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि रैलियों की तारीख और स्थान अभी घोषित नहीं किए गए हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने यह स्पष्ट किया है कि रैलियां आयोजित की जाएंगी, लेकिन उनके दिन और आयोजन स्थल की घोषणा बाद में की जाएगी। इसका मतलब है कि पार्टी संगठन अभी रैलियों की तैयारियों के चरण में है। आने वाले दिनों में जिला संगठनों से चर्चा के बाद तारीखों और स्थानों का ऐलान होने की उम्मीद है। कार्यकर्ताओं के स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं और जिला मुख्यालयों के कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है। रैलियों की तारीखों की घोषणा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अभियान किस क्रम में और किस गति से आगे बढ़ेगा।
राज्यसभा की खाली सीट पर भी मंथन
कोर कमेटी की बैठक में मध्य प्रदेश से राज्यसभा की खाली सीट के लिए उम्मीदवार के चयन पर भी चर्चा हुई। प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार, इस सीट के लिए चार से पांच नामों पर विचार किया गया। इनमें प्रदेश के भीतर के और प्रदेश के बाहर के संभावित नाम भी शामिल हैं। हालांकि, बैठक में किसी एक नाम पर अंतिम फैसला नहीं हुआ। राज्यसभा की यह सीट प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे संसद में प्रदेश का प्रतिनिधित्व जुड़ा है। उम्मीदवार के नाम की अंतिम घोषणा पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर होने की उम्मीद है। तब तक इस मुद्दे पर प्रदेश में अटकलों का दौर जारी रहेगा।
बिरसा मुंडा जयंती की तैयारियों पर भी चर्चा
बैठक में आगामी कार्यक्रमों के तहत जनजातीय नायक बिरसा मुंडा की जयंती की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को मनाई जाती है। पार्टी इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रही है। मध्य प्रदेश में जनजातीय समाज की बड़ी आबादी है और बिरसा मुंडा जनजातीय अस्मिता के प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए उनकी जयंती के कार्यक्रम पार्टी के लिए संगठनात्मक और सामाजिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। बैठक में इन कार्यक्रमों की तैयारियों को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए।
संगठन की नजर — कार्यकर्ताओं को जोड़ने की रणनीति
इस अभियान के जरिए भाजपा का मकसद अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और जनता के बीच अपनी बात पहुंचाना है। बड़ी रैलियां और जिला स्तरीय कार्यक्रम कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का माध्यम बनते हैं। प्रदेश में अगले कुछ महीनों में कई राजनीतिक गतिविधियां होनी हैं और ऐसे में संगठन को सक्रिय रखना पार्टी की प्राथमिकता है। रैलियों के माध्यम से पार्टी न केवल अपना पक्ष रखेगी, बल्कि कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ाएगी। जिला मुख्यालयों के कार्यक्रमों से यह भी सुनिश्चित होगा कि अभियान का असर केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि छोटे जिलों और कस्बों तक भी पहुंचे।
प्रदेश की राजनीति में इसका क्या मतलब
इस घोषणा के बाद प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर भाजपा अपने अभियान के जरिए लोकतंत्र की रक्षा का संदेश दे रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस मतदाता सूची के मुद्दे पर जवाबदेही की मांग कर रही है। दोनों दलों के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। रैलियों की तारीखों की घोषणा के बाद यह अभियान प्रदेश की राजनीति का केंद्र बन सकता है। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि भाजपा ने एक सुनियोजित अभियान के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी कर ली है और कांग्रेस भी अपने मुद्दों पर डटी हुई है। आने वाले दिनों में इस अभियान की गति और विपक्ष की प्रतिक्रिया ही यह तय करेगी कि प्रदेश की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
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