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राष्ट्र सेविका समिति: तरुणियों की संस्कारशाला

राष्ट्र सेविका समिति तरुणी संस्कारशाला

डॉ वैशाली वाईकर
राष्ट्र सेविका समिति
इंदौर विभाग संपर्क प्रमुख

राष्ट्र सेविका समिति: तरुणियों की संस्कारशाला

संस्कारित तरुणी, सशक्त समाज एवं समर्थ राष्ट्र

राष्ट्र सेविका समिति एक ऐसा संगठन है, जो महिलाओं में राष्ट्रभक्ति, आत्मविश्वास, सेवा-भावना एवं सांस्कृतिक चेतना जागृत करने का कार्य करता है। समिति का मानना है कि संस्कारवान तरुणियाँ ही एक सशक्त परिवार, जागरूक समाज तथा समर्थ राष्ट्र की आधारशिला होती हैं।

तरुणावस्था जीवन का वह महत्वपूर्ण चरण है, जब व्यक्तित्व का निर्माण होता है, विचारों को दिशा मिलती है तथा जीवन के आदर्श निर्धारित होते हैं। आज के आधुनिक युग में तरुणियाँ शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, खेल, प्रशासन एवं उद्यमिता जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे समय में उन्हें आधुनिक ज्ञान के साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं एवं जीवन-मूल्यों से जोड़ना भी अति आवश्यक है।

राष्ट्र सेविका समिति में संस्कारों का अर्थ केवल परंपराओं का पालन करना नहीं, अपितु जीवन को श्रेष्ठ मूल्यों के आधार पर जीना है। सत्यनिष्ठा, अनुशासन, आत्मसम्मान, कर्तव्यपरायणता, संवेदनशीलता, सेवा तथा राष्ट्रभक्ति जैसे गुण तरुणियों के व्यक्तित्व को सुदृढ़ बनाते हैं। इन गुणों के माध्यम से वे जीवन की चुनौतियों का सामना साहस तथा विवेक के साथ कर सकती हैं।

समिति की शाखाओं, बौद्धिक कार्यक्रमों, शारीरिक प्रशिक्षण, गीतों, प्रार्थनाओं आदि सामूहिक गतिविधियों के माध्यम से तरुणियों में एकता, नेतृत्व, सहयोग एवं अनुशासन की भावना विकसित की जा सकती है। शिविरों एवं विभिन्न सामाजिक गतिविधियों से उन्हें समाज की समस्याओं को समझने तथा उनके समाधान में सक्रिय योगदान देने की प्रेरणा मिलती है।

राष्ट्र सेविका समिति तरुणी संस्कारशाला

आज की तरुणियों के सामने सोशल मीडिया का प्रभाव, पाश्चात्य जीवनशैली का आकर्षण, प्रतिस्पर्धा एवं मानसिक तनाव जैसी अनेक समस्याएं हैं। ऐसे समय में संस्कार उन्हें सही एवं गलत के बीच अंतर समझने, अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने एवं आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करते हैं। संस्कारों का उद्देश्य तरुणियों की स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं, अपितु उन्हें स्वतंत्रता के साथ उत्तरदायित्व का बोध कराना है।

राष्ट्र सेविका समिति के माध्यम से तरुणियों को यह समझने का अवसर मिलता है कि नारी केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, वह समाज-निर्माण तथा राष्ट्र-निर्माण की सक्रिय सहभागी भी है। एक संस्कारित तरुणी अपने परिवार में सद्भाव, समाज में समरसता और राष्ट्र में सकारात्मक परिवर्तन की वाहक बन सकती है।

भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, ज्ञान और करुणा का प्रतीक माना गया है। समिति में इन तीन असाधारण महिलाओं को अपना आदर्श माना है- मातृत्व के लिए माता जीजाबाई का संस्कारमय व्यक्तित्व, नेतृत्व के लिए रानी लक्ष्मीबाई का साहस तथा कर्तृत्व के लिए देवी अहिल्याबाई होलकर की लोककल्याणकारी दृष्टि जो आज की तरुणियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

राष्ट्र सेविका समिति में तरुणियों के संस्कारों का निर्माण केवल एक गतिविधि नहीं, यह राष्ट्र के भविष्य को सुदृढ़ बनाने का संकल्प है। जब तरुणियाँ अपनी संस्कृति पर गर्व करेंगी, आधुनिक ज्ञान से संपन्न होंगी, आत्मनिर्भर बनेंगी तथा समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझेंगी, तभी एक सशक्त भारत का निर्माण होगा।

संस्कारों से व्यक्तित्व का निर्माण होता है, व्यक्तित्व से समाज का और समाज से राष्ट्र का।

आइए, हम ऐसी संस्कारित, स्वाभिमानी, आत्मनिर्भर एवं राष्ट्रसमर्पित तरुणियों का निर्माण करें, जो भारतीय संस्कृति की गरिमा को बनाए रखते हुए नए भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ।

फोटो: राष्ट्र सेविका समिति

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