Headlines

मोदी ने IIT मद्रास में रचा ‘इतिहास’: 100 मानव मस्तिष्क की 3D मैपिंग, दुनिया का पहला स्ट्रोक ब्रेन एटलस जारी

आईआईटी मद्रास के ब्रेन सेंटर में मानव मस्तिष्क के नमूने देखते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आईआईटी मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर में मानव मस्तिष्क के नमूने देखते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (11 अक्टूबर 2026)। फोटो: सौजन्य — प्रधानमंत्री कार्यालय, भारत सरकार (PIB)

चेन्नई ब्यूरो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (11 अक्टूबर) को आईआईटी मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर (एसजीबीसी) को राष्ट्र को समर्पित करते हुए दुनिया के सबसे महत्वाकांक्षी न्यूरोसाइंस मिशन की शुरुआत की। इस मिशन के तहत 100 से अधिक मानव मस्तिष्कों के कोशिका-स्तर (सेल रेज़ोल्यूशन) पर त्रि-आयामी (3D) एटलस तैयार किए जाएंगे — भ्रूण अवस्था से लेकर वृद्धावस्था तक, और बीमारियों से प्रभावित मस्तिष्कों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सी-स्ट्रोक (C-STROKE) भी जारी किया — दुनिया का पहला मानव इस्केमिक स्ट्रोक एटलस। यह एटलस स्ट्रोक से प्रभावित एक मानव मस्तिष्क के 1000 से अधिक एनोटेटेड सूक्ष्म खंडों का संग्रह है, जो मृत्यु से पहले लिए गए एमआरआई स्कैन को मस्तिष्क ऊतक की सूक्ष्मदर्शी-स्तर की जांच से जोड़ता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह स्ट्रोक के उपचार के नए लक्ष्यों की खोज में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

दुनिया के सबसे बड़े 3D ब्रेन मैप का दावा

आईआईटी मद्रास के अनुसार यह मिशन कोशिका रेज़ोल्यूशन पर पूरे मानव मस्तिष्क के त्रि-आयामी मानचित्रों का दुनिया का सबसे बड़ा संग्रह बनेगा। केंद्र के पास विश्व स्तरीय ब्रेन इमेजिंग तकनीकी मंच है, जो पूरे पोस्ट-मॉर्टम मानव मस्तिष्कों को हाई-थ्रूपुट इमेजिंग और कंप्यूटिंग मंच के माध्यम से डिजिटल 3D मानचित्रों में बदलता है।

ये एटलस केंद्र के मल्टी-मोडल इमेज विज़ुअलाइज़ेशन और कंप्यूटिंग ढांचे के जरिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि अत्याधुनिक शोध का लाभ दुनिया भर के शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और मरीजों तक पहुंच सके। मानचित्रों की कंप्यूटिंग इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से परम शक्ति सुपरकंप्यूटर पर की गई।

सी-स्ट्रोक: स्ट्रोक शोध में नई उम्मीद

सी-स्ट्रोक इस्केमिक स्ट्रोक के मस्तिष्क का दुनिया का पहला त्रि-आयामी एटलस है। इस्केमिक स्ट्रोक तब होता है जब रक्त का थक्का या कोई अन्य रुकावट मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त आपूर्ति रोक देती है। एटलस में न्यूरॉनल स्वास्थ्य, न्यूरोइंफ्लेमेशन, ब्लड-ब्रेन बैरियर की क्षति, हाइपोक्सिया और एक्सॉनल चोट जैसे महत्वपूर्ण कोशिकीय संकेतकों का मानचित्रण किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह एटलस क्लिनिकल ब्रेन स्कैन में दिखने वाले पैटर्नों के पीछे कोशिकीय बदलावों को समझने में मदद करेगा और सेरेब्रोवास्कुलर बीमारियों के संभावित उपचार लक्ष्यों की पहचान में सहायक होगा। इस शोध को आईआईटी मद्रास के विशिष्ट पूर्व छात्र और फेयरफैक्स फाइनेंशियल के अध्यक्ष प्रेम वत्सा का सहयोग प्राप्त है।

200 से अधिक शोधकर्ताओं का वैश्विक मिशन

यह वैश्विक मिशन एसजीबीसी के 200 से अधिक शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और तकनीशियनों, देश भर के 10 से अधिक चिकित्सा संस्थानों और 10 से अधिक देशों के 30 से अधिक अग्रणी शोधकर्ताओं का संयुक्त प्रयास है। सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर की स्थापना मार्च 2022 में सुधा और क्रिस गोपालकृष्णन के सहयोग से हुई थी।

केंद्र न्यूरोसाइंस, इंजीनियरिंग, उन्नत इमेजिंग और कम्प्यूटेशनल विज्ञान को जोड़कर कोशिकीय रेज़ोल्यूशन पर मानव मस्तिष्क का अध्ययन करता है। पूरे मस्तिष्क की इमेजिंग तकनीकों से शोधकर्ता ऊतक के बड़े आयतनों की जांच कर कोशिकीय संरचनाओं का त्रि-आयामी पुनर्निर्माण करते हैं — जिससे समग्र मस्तिष्क शरीररचना और सूक्ष्म विवरणों के बीच आना-जाना संभव होता है।

प्रधानमंत्री ने केंद्र के भ्रमण के दौरान मस्तिष्क नमूनों और शोध सुविधाओं का अवलोकन भी किया। न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में भारत की यह पहल वैश्विक शोध मानचित्र पर देश की स्थिति को और मजबूत करने वाली मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स (GODL-India, प्रधानमंत्री कार्यालय, भारत सरकार)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दैनिक संपूर्ण प्रदेश — आपका अपना अख़बार