मुंबई ब्यूरो। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को नीतिगत रेपो दर में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाई हैं। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने दर बढ़ाने का फैसला सर्वसम्मति से लिया, जबकि नीतिगत रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ करने का फैसला बहुमत से हुआ।
महंगाई पर काबू के लिए सख्त रुख
अगस्त में खुदरा महंगाई (CPI) बढ़कर 4.82 प्रतिशत पर पहुंच गई थी — यह लगातार तीसरा महीना है जब महंगाई RBI के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर रही। इस बीच अप्रैल-जून तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की मजबूत रफ्तार से बढ़ी, जिससे केंद्रीय बैंक को मूल्य स्थिरता को प्राथमिकता देने की गुंजाइश मिली। हिंदू बिजनेसलाइन के अनुसार, RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए विकास दर का अनुमान 6.7 से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है, जबकि महंगाई का अनुमान 5.2 प्रतिशत रखा गया है। तीसरी तिमाही में महंगाई के 6.0 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।
आपकी EMI पर कितना असर पड़ेगा
रेपो दर वह दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है, और ज्यादातर होम, कार व पर्सनल लोन इसी से जुड़े होते हैं। 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी आमतौर पर कुछ हफ्तों में फ्लोटिंग ब्याज दरों को ऊपर धकेल देती है। मोटे अनुमान के मुताबिक, 50 लाख रुपये के 20 साल के होम लोन पर EMI करीब 800 रुपये प्रति माह बढ़ जाएगी — हालांकि सटीक असर बैंक और बची हुई अवधि पर निर्भर करेगा। फिक्स्ड दर वाले कर्जदारों पर कोई असर नहीं होगा, जबकि फ्लोटिंग दर वाले — जो होम लोन ग्राहकों में बहुमत हैं — अपने बैंक से संपर्क कर EMI या अवधि में संशोधन की जानकारी लें।

SDF, MSF और CRR में क्या बदला
रेपो दर बढ़ने के साथ स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर बढ़कर 5.25 प्रतिशत हो गई, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) दर और बैंक दर बढ़कर 5.75 प्रतिशत हो गई। नकद आरक्षित अनुपात (CRR) 3 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा गया है।
आगे और बढ़ोतरी के संकेत
नीति के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में गवर्नर ने कहा कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते वैश्विक हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं, फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है और आर्थिक गति व्यापक बनी हुई है। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, गवर्नर ने निकट भविष्य में दरों में कटौती की संभावना से इनकार किया — यानी आगे बढ़ोतरी कितनी गहरी होगी, यह महंगाई के रुख पर निर्भर करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि सर्वसम्मत फैसला और ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ का रुख इस बात का संकेत है कि महंगाई नहीं घटी तो केंद्रीय बैंक दोबारा कार्रवाई के लिए तैयार है। त्योहारी सीजन से पहले कर्ज महंगा होने का यह फैसला बाजार और आम उपभोक्ता दोनों के लिए अहम है।
