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आज हमारी चर्चा केतु की महादशा मे चंद्र मंगल और राहु की अन्तर्दशा परिणामों को लेकर होगी।
केतु की महादशा मे चन्द्रमा की अन्तर्दशा सात माह की होती है। यदि कुंडली मे चन्द्रमा और केतु strong position मे हो तो तो इस अन्तर्दशा मे जातक का मन धार्मिक कार्यों मे लगता है। जातक मानसिक रूप से सुखी होता है। यदि चन्द्रमा कुंडली मे कमजोर हो या नीच राशि के हो तो जातक emotionally disturbed भी हो सकता है। यदि षष्ठ भाव और षष्ठेश पीड़ित हो तो इस अन्तर्दशा मे जातक को mind से related problem भी हो सकती है।
केतु की महादशा मे मंगल की अन्तर्दशा चार माह 27 दिन की होती है। यदि मंगल कुंडली मे strong position मे हो तो इस अन्तर्दशा मे जातक के पराक्रम मे वृद्धि होती है। मंगल यदि strong होकर दशम भाव से relation बना रहे हो तो इस दशा मे जातक सेना या पुलिस मे भी जा सकता है। केतु और मंगल कुंडली मे पीड़ित हो तो इस अन्तर्दशा मे जातक के अपने छोटे भाई बहनों से relation खराब हो सकते है। जातक को शत्रुओं से भय भी हो सकता है। साथ ही जातक को property से related हानि भी हो सकती है। और षष्ठ भाव तथा षष्ठेश कुंडली मे पीड़ित हो तो इस अन्तर्दशा मे जातक को रक्त से related बीमारी भी हो सकती है।
केतु की महादशा मे राहु की अन्तर्दशा एक वर्ष 18 दिन की होती है। केतु और राहु हमेशा आमने सामने 180 डिग्री पर ही होते है। राहु तंत्र है और केतु मंत्र है। यदि राहु कुंडली मे strong स्थिति मे हो तो इस अन्तर्दशा मे जातक को अचानक धन लाभ होता है। जातक फर्श से अर्श तक पहुंचता है। यदि कुंडली मे राजनीति के योग हो तो इस अन्तर्दशा मे जातक राजनीति मे भी पहुंच सकता है। यदि राहु कुंडली मे खराब position मे हो तो जातक अनैतिक मार्गों से धन प्राप्त करता है जातक को अचानक से व्यापार lottery या share market मे नुकसान हो सकता है। और यदि कुंडली मे अन्य योग खराब हो तो इस अन्तर्दशा मे जातक fraud का शिकार भी हो सकता है।
केतु की महादशा मे गुरु शनि बुध की अन्तर्दशा की चर्चा अगली पोस्ट मे करेंगे।
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ज्योतिषाचार्य निर्विकार शर्मा
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