भोपाल ब्यूरो। मध्य प्रदेश की राजधानी में रविवार को शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन हुआ। भोपाल के नीलम पार्क में प्रदेश भर से जुटे शिक्षकों ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता और ई-अटेंडेंस व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान ‘एक कचौड़ी, दो समोसा, शिक्षा विभाग का क्या भरोसा’ जैसे नारों से पूरा पार्क गूंज उठा।
तीन प्रमुख मांगों पर अड़े शिक्षक
शिक्षक संगठनों ने सरकार के सामने तीन साफ मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। दूसरी मांग सेवा अवधि की गणना को लेकर है — शिक्षक चाहते हैं कि प्रथम नियुक्ति की तारीख से ही सेवा अवधि गिनी जाए और उसी आधार पर वरिष्ठता तय हो। तीसरी मांग ई-अटेंडेंस को लेकर है, जिसे शिक्षक विभागीय और शासकीय दायित्वों को देखते हुए स्वैच्छिक बनाने की मांग कर रहे हैं।

14 अक्टूबर के बाद भूख हड़ताल का ऐलान
आंदोलन की सबसे बड़ी बात यह है कि शिक्षकों ने सरकार को 14 अक्टूबर तक की मोहलत दी है। शिक्षक नेताओं का कहना है कि अगर तय तारीख तक मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 14 अक्टूबर के बाद भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। नीलम पार्क में चल रहा धरना अनिश्चितकालीन है और प्रदेश के अलग-अलग संभागों के शिक्षक चरणबद्ध तरीके से इसमें शामिल हो रहे हैं। आंदोलन के अगले चरण में जबलपुर संभाग के शिक्षकों की बड़ी भागीदारी की तैयारी है।
पहले से जारी है चरणबद्ध आंदोलन
यह धरना अचानक शुरू नहीं हुआ है। नीलम पार्क में पिछले कई दिनों से शिक्षकों का धरना चल रहा है और हर दिन अलग-अलग संभागों के शिक्षक इसमें शामिल हो रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि टीईटी और ई-अटेंडेंस को लेकर उनकी आपत्तियां लंबे समय से सरकार के सामने हैं, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब शिक्षक इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई के मूड में दिख रहे हैं।
