प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के प्रशिक्षण-सह-जागरूकता कार्यक्रम में बोनस और काष्ठ लाभांश का वितरण होगा; दोपहर 2:30 बजे हेलीकॉप्टर से मंडला पहुंचेंगे मुख्यमंत्री, शाम 4:50 बजे जबलपुर के लिए रवाना।
मंडला ब्यूरो। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार (4 अक्टूबर) को मंडला के दौरे पर रहेंगे। वे प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के सदस्यों के लिए आयोजित प्रशिक्षण-सह-जागरूकता एवं प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) वितरण कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री 9 लाख 4 हजार 126 तेंदूपत्ता संग्राहकों को 36 करोड़ 17 लाख रुपये से अधिक की बोनस राशि का वितरण करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान 84 वन समितियों के सदस्यों को 26 करोड़ 56 लाख रुपये से अधिक का काष्ठ लाभांश भी वितरित किया जाएगा। इसमें पूर्व मंडला और पश्चिम मंडला वन मंडल की 84 वन समितियां शामिल हैं। मंडला में आयोजित इस कार्यक्रम से जबलपुर, डिंडौरी, बालाघाट और सिवनी जिलों के तेंदूपत्ता संग्राहक भी लाभान्वित होंगे।
तेंदूपत्ता बीड़ी उद्योग का प्रमुख कच्चा माल है और प्रदेश में लाखों आदिवासी तथा वन-आधारित परिवार इसके संग्रह से जुड़े हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य तेंदूपत्ता संग्राहकों एवं वनोपज से जुड़े परिवारों के आर्थिक हितों को मजबूत करने के साथ उनके परिश्रम को प्रोत्साहित करना है।
दोपहर 2:30 बजे पहुंचेंगे मुख्यमंत्री
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री दोपहर 2:30 बजे हेलीकॉप्टर से मंडला हेलीपैड पहुंचेंगे। कार्यक्रम में बोनस और लाभांश के वितरण के साथ वन उपज से जुड़े लोगों के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित होंगी। मुख्यमंत्री करीब दो घंटे कार्यक्रम में रुकेंगे और शाम 4 बजकर 50 मिनट पर मंडला से जबलपुर के लिए रवाना होंगे।

विकास कार्यों का भूमिपूजन और स्कूटी वितरण भी
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री कई विकास कार्यों का भूमिपूजन करेंगे और हितग्राहियों को स्कूटी का वितरण भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री रविवार को पांढुर्णा जिले में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी करेंगे। इसके साथ ही वे सांदीपनि स्कूल पांढुर्णा में ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम तथा जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक में भी शामिल होंगे।
प्रशासन ने पूरी की तैयारियां
मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने कार्यक्रम स्थल पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में मंच, बैठक व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात, पेयजल और बिजली की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया है। संबंधित अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपकर व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है।
