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आज हमारी चर्चा बुध की महादशा में सारे ग्रहों की अन्तर्दशा को लेकर होगी।
बुध की महादशा में पहली अन्तर्दशा बुध की ही होती है, जो दो वर्ष चार माह 27 दिन की होती है। यदि बुध उच्च राशि, स्व राशि या मित्र राशि के होकर शुभ ग्रहों से युत या दृष्ट हो तो इस अन्तर्दशा में जातक को अच्छे फल प्राप्त होते हैं। जातक की बुद्धि का विकास होता है। यदि कुंडली में अन्य योग अच्छे हों और जातक finance से related study कर रहा हो तो इस दशा में विशेष लाभ प्राप्त होता है। यदि बुध नीच के हों या शत्रु राशि के हों तो इस अन्तर्दशा में जातक को त्वचा संबंधी रोग भी हो सकते हैं। जातक को व्यापार में नुकसान भी हो सकता है। हालांकि इसके लिए दशम भाव और दशमेश को भी देखना चाहिए। जातक के अपने ननिहाल पक्ष से भी relation खराब हो सकते हैं।
बुध की महादशा में केतु की अन्तर्दशा 11 माह 27 दिन की होती है। यदि केतु कुंडली में strong स्थिति में हो तो इस दशा में जातक को गुप्त धन लाभ भी हो सकता है। जातक तीर्थ स्थानों व धार्मिक कार्यों में रुचि लेता है। यदि केतु कमजोर स्थिति में हो तो जातक का चित्त अशांत रहता है। जातक को पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। जातक को गुप्त शत्रुओं से भय हो सकता है।
बुध की महादशा में शुक्र की अन्तर्दशा दो वर्ष दस माह की होती है। यदि शुक्र और बुध कुंडली में strong स्थिति में हों तो इस अन्तर्दशा में जातक कला के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त करता है, किन्तु इसके लिए पंचम भाव strong स्थिति में होना चाहिए। जातक को वाहन का सुख प्राप्त होता है। यदि जातक की आयु विवाह योग्य हो तो इस अन्तर्दशा में जातक का विवाह भी हो सकता है। यदि शुक्र कुंडली में पाप प्रभाव में हो या नीच के हों तो इस अन्तर्दशा में जातक बुरे व्यसनों में भी लिप्त हो सकता है। यदि sixth भाव पीड़ित हो तो इस अन्तर्दशा में जातक को sugar की problem भी हो सकती है।
बुध की महादशा में सूर्य, चंद्र और मंगल की अन्तर्दशा के परिणामों की चर्चा अगली post में करेंगे।
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ज्योतिषाचार्य निर्विकार शर्मा
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