भोपाल ब्यूरो। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता समाप्त करने सहित तीन सूत्रीय मांगों को लेकर मध्यप्रदेश के शिक्षकों का आंदोलन अब जिला स्तर तक पहुंचने जा रहा है। महात्मा गांधी की जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में शिक्षक उपवास रखकर सत्याग्रह करेंगे और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे।
भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षकों का अनिश्चितकालीन धरना पांचवें दिन भी जारी है। आंदोलन के पांचवें दिन रीवा और शहडोल संभाग से करीब 3,000 शिक्षक नीलम पार्क पहुंचे और अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। शिक्षक नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
तीन प्रमुख मांगें क्या हैं

अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा की तीन प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं। पहली मांग है कि अध्यापकों की प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना कर वरिष्ठता सूची तैयार की जाए और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) सहित सभी सेवा लाभ दिए जाएं।
दूसरी मांग पूर्व से कार्यरत अध्यापक संवर्ग के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त करने की है। शिक्षकों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु की सरकारों ने इस मुद्दे पर विधानसभा से प्रस्ताव पारित किए हैं, उसी तर्ज पर मध्यप्रदेश सरकार को भी तत्काल अध्यादेश या प्रस्ताव लाना चाहिए।
तीसरी मांग शिक्षकों के लिए लागू डिजिटल/ई-अटेंडेंस व्यवस्था को व्यावहारिक कमियों के कारण तत्काल निरस्त करने की है।
2 अक्टूबर को सभी जिलों में सत्याग्रह
मोर्चा के अनुसार 2 अक्टूबर को सभी जिलों में शिक्षक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष उपवास रखेंगे और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे। भोपाल के नीलम पार्क में होने वाले केंद्रीय आयोजन में भोपाल और इंदौर संभाग के शिक्षक बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
मोर्चा ने सरकार से अपील की है कि शिक्षक प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए बुलाकर तीनों मांगों का त्वरित और सकारात्मक समाधान निकाला जाए। मोर्चा का कहना है कि गांधी जयंती का उपवास-सत्याग्रह लंबित मांगों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाने का माध्यम है।
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