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त्योहारी सीजन में चीनी की जमाखोरी पर लगाम: भंडारण सीमा 1000 क्विंटल, 15 दिन से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेंगे व्यापारी

गन्ने का खेत गन्ने का खेत। (सांकेतिक तस्वीर) फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स

15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक प्रभावी रहेंगे संशोधित नियम

नई दिल्ली। नए चीनी सीजन की 1 अक्टूबर से शुरुआत के साथ केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ताओं को उचित कीमतों पर पर्याप्त चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भंडारण संबंधी मानदंडों में संशोधन किया है।

संशोधित प्रावधानों के तहत चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की अवधि घटाकर 15 दिन कर दी गई है और स्टॉक रखने की सीमा 1,000 क्विंटल निर्धारित की गई है। ये नियम 15 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे। क्षेत्र की विशिष्ट बाजार आवश्यकताओं को देखते हुए कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्रों तथा असम राज्य के लिए यह सीमा 2,000 क्विंटल रखी गई है।

जमाखोरी और सट्टेबाजी पर अंकुश का लक्ष्य

संशोधित नियमों का उद्देश्य वितरण श्रृंखला में चीनी का अनावश्यक संचय रोकना है, ताकि चीनी मिलों से डीलरों के माध्यम से अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति सुचारू बनी रहे। सरकार का कहना है कि यह उपाय विशेष रूप से जमाखोरी पर अंकुश लगाने, सट्टेबाजी को हतोत्साहित करने और डीलरों द्वारा भंडार के संचय को रोकने के लिए है।

नियमों के तहत किसी भी व्यापारी को चीनी का स्टॉक प्राप्त होने की तारीख से 15 दिनों से अधिक समय तक अपने पास नहीं रखना होगा, और देश भर में किसी भी समय, किसी भी स्थान पर 1,000 क्विंटल से अधिक चीनी का भंडार नहीं रखना होगा।

खुदरा कीमतों में 15 प्रतिशत की गिरावट

सरकार के अनुसार अगस्त में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद से औसत खुदरा चीनी कीमतों में 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। मिल से प्राप्त चीनी की कीमतों में लगभग 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है, और पिछले तीन हफ्तों से ये स्थिर बनी हुई हैं। सरकार का मानना है कि आपूर्ति श्रृंखला में घटी कीमतों का लाभ मिलने से खुदरा दामों में और कमी आने की उम्मीद है।

सरकार ने थोक और खुदरा विक्रेताओं से आग्रह किया है कि वे मिल से निकलने वाली चीनी की कीमतों में आई भारी गिरावट का लाभ तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं। चीनी मिलों को अपने-अपने क्षेत्रों की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुसार पेराई कार्य शुरू करने की सलाह दी गई है।

सरकार ने दोहराया है कि गन्ना किसान और उपभोक्ता देश की चीनी नीति के दो मुख्य स्तंभ हैं, और वह गन्ना किसानों को लाभकारी प्रतिफल, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा तथा देश भर में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता के लिए प्रतिबद्ध है।

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