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गांव से राष्ट्रपति भवन तक: राम नाथ कोविंद की 81वीं जयंती

राम नाथ कोविंद फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के एक छोटे से गांव परौंख में जन्मा बच्चा एक दिन देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचेगा — यह कहानी है राम नाथ कोविंद की, जिनके जीवन में संघर्ष भी है और सादगी भी।

1 अक्टूबर को देश के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की 81वीं जयंती है। वर्ष 1945 में एक साधारण परिवार में जन्मे कोविंद का जीवन बताता है कि मेहनत, ईमानदारी और सादगी के बल पर साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर भी संविधान के सर्वोच्च पद तक पहुंचा जा सकता है।

वकालत से राजनीति तक

कानून की पढ़ाई के बाद उन्होंने वकालत को अपना पेशा बनाया और 1978 से 1993 तक सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में कार्य किया।

वर्ष 1994 से 2006 तक वे दो बार राज्यसभा के सांसद रहे। इसके बाद 2015 से 2017 तक उन्होंने बिहार के राज्यपाल का दायित्व संभाला।

राष्ट्रपति भवन तक का सफर

वर्ष 2017 में वे देश के 14वें राष्ट्रपति बने और 2022 तक इस सर्वोच्च संवैधानिक पद पर रहे।

राम नाथ कोविंद
फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स

गांव की गलियों से राष्ट्रपति भवन तक का यह सफर हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखता है — सादगी और संघर्ष ही सबसे बड़ी पूंजी है।

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