ग्वालियर ब्यूरो। ग्वालियर में पहली बार आयोजित हुई वेस्ट जोन रीजनल ज्यूडिशियरी कांफ्रेंस का समापन रविवार को हो गया। न्यायिक शिक्षा पर दो दिन चले इस गहन मंथन में देश के अलग-अलग राज्यों के उच्च न्यायालयों के जजों ने महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। शहर के लिए यह गर्व का क्षण रहा, क्योंकि इस स्तर की ज्यूडिशियरी कांफ्रेंस का आयोजन ग्वालियर में पहली बार हुआ — इससे पहले इसका आयोजन इंदौर में हुआ था।
कृषि विश्वविद्यालय बना मंथन का केंद्र
कांफ्रेंस का आयोजन ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में हुआ। विषय था “न्यायिक शिक्षा के क्षितिज का विस्तार”। दूसरे दिन रविवार को दो सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विषय विशेषज्ञों ने कई अहम जानकारियां साझा कीं। पूरे आयोजन की व्यवस्थाएं उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधिपति के निर्देशन में की गईं, और आयोजन को बेहतर ढंग से संपन्न होने वाला बताया गया।
पहला सत्र: न्यायिक शिक्षा का डिजिटल रूपांतरण
पहले सत्र का विषय था “न्यायिक शिक्षा का डिजिटल रूपांतरण: अवसर, चुनौतियां और आगे का रास्ता”। इस विषय पर कर्नाटक उच्च न्यायालय के जस्टिस सूरज गोविंद राज और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के जस्टिस संजीव सुधाकर कालगांवकर ने विस्तार से अपने विचार रखे। डिजिटल युग में न्यायिक प्रशिक्षण किस तरह बदले, तकनीक से क्या अवसर मिल सकते हैं और रास्ते में कौन सी चुनौतियां हैं — इन बिंदुओं पर गहन चर्चा हुई। न्याय व्यवस्था में डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के दौर में यह सत्र खासा प्रासंगिक रहा।
दूसरा सत्र: संवेदनशील और समावेशी न्याय
दूसरे सत्र में “संवेदनशील और समावेशी न्याय के लिए न्यायिक सक्षमताओं का निर्माण” विषय पर मंथन हुआ। इस विषय पर गुजरात उच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सोनिया गोकानी और ओडिशा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुभाशीष तालपत्रा ने विस्तार से जानकारी दी। न्यायपालिका में संवेदनशीलता और समावेशिता को लेकर न्यायिक अधिकारियों की क्षमताएं कैसे विकसित की जाएं, इस पर अनुभवी न्यायाधीशों के विचार सभी के लिए ज्ञानवर्धक रहे।
धन्यवाद ज्ञापन और समापन
कांफ्रेंस के अंत में सभी विषयों पर संक्षिप्त विवरण और ज्ञानार्जन प्रस्तुत करते हुए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधिपति जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने धन्यवाद ज्ञापित किया। दो दिवसीय कांफ्रेंस के समापन अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय परिसर में बीएसएफ टेकनपुर के राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र की ओर से डॉग शो का भी प्रदर्शन किया गया। देसी और विदेशी नस्ल के श्वानों ने विस्फोटक पदार्थ की पहचान, रस्सी पर चलना, जंपिंग जैसे हैरतअंगेज कारनामे दिखाए, जिन्हें देखकर वहां मौजूद न्यायाधीशगणों ने खूब तालियां बजाईं।
फोटो: नइदुनिया। स्रोत: नइदुनिया (ग्वालियर), लोकमत सत्याग्रह।
