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अशोक सिंघल जन्म शताब्दी: भारत मंडपम में वर्षभर कार्यक्रमों का शुभारंभ, राम स्तंभ का अनावरण

अशोक सिंघल
अशोक सिंघल
अशोक सिंघल (फोटो: विश्व संवाद केंद्र)

नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी वर्ष का रविवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में भव्य शुभारंभ हुआ। प्लेनरी हॉल में आयोजित उद्घाटन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह विशेष अतिथि रहे। विहिप और अशोक सिंघल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में शुरू हुआ यह शताब्दी वर्ष अब पूरे साल देश-विदेश में हज़ारों कार्यक्रमों के रूप में मनाया जाएगा।

वंदे मातरम और शंखनाद से हुई शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत पूर्ण वंदे मातरम के गायन से हुई। इसके बाद तीन वैदिक विद्यालयों के करीब 100 युवाओं ने एक साथ शंखनाद किया और वैदिक मंत्रोच्चार किया। मंच पर गृह मंत्री, संघ सरकार्यवाह, विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज और विहिप की पहली महिला प्रचारक डॉ. उपासना अरोड़ा मौजूद रहीं। इस अवसर पर राम स्तंभ की प्रतिकृति का अनावरण किया गया और राम स्तंभों का डिजिटल शुभारंभ भी हुआ। आयोजकों के अनुसार यह स्तंभ भगवान श्रीराम के वनवास मार्ग से जुड़े स्थानों की सभ्यतागत स्मृति का स्थायी प्रतीक होगा और इसे हज़ार वर्षों तक कायम रखने की परिकल्पना की गई है। समारोह में अशोक सिंघल के जीवन पर आधारित विशेष प्रदर्शनी लगाई गई और ‘डिवाइन फुटप्रिंट्स ऑफ मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम’ नामक कॉफी-टेबल पुस्तक का भी विमोचन हुआ।

युवाओं को सादगी और अनुशासन का संदेश

समारोह को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने अशोक सिंघल के सादगीपूर्ण जीवन को याद किया। उन्होंने बताया कि किस तरह सिंघल एक ही कमरे में रहते थे, जो उनका आवास, रसोई और सब कुछ था, और यह सादगी का पाठ आज भी उनके काम आता है। उन्होंने आपातकाल के दिनों में सिंघल से हुई मुलाकातों का भी स्मरण किया। संघ सरकार्यवाह ने युवाओं के सामने खड़े वैचारिक शून्य का ज़िक्र करते हुए कहा कि सिंघल जैसा आदर्श इस शून्य को भर सकता है। उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन में पिछड़े और दलित समाज को अग्रिम पंक्ति में लाने में सिंघल की भूमिका को रेखांकित किया। स्वामी परमानंद गिरि ने सिंघल को हिंदू समाज का प्रिय नेता बताते हुए युवाओं से देश की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का आह्वान किया।

सांकेतिक तस्वीर

सालभर चलेंगे सेवा और संस्कृति के कार्यक्रम

विहिप के अनुसार शताब्दी वर्ष में देश-विदेश के हज़ारों स्थानों पर संगोष्ठियां, जनसभाएं, प्रदर्शनियां और सेवा कार्यक्रम आयोजित होंगे। 27 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच देश के 47 प्रमुख स्थानों पर उद्घाटन कार्यक्रम रखे गए हैं। अयोध्या के कारसेवकपुरम में 27 सितंबर से 1 अक्टूबर तक पांच दिवसीय सेवा शिविर भी शुरू हो गया है, जहां दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण दिए जाएंगे। विहिप ने सिंघल के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प भी दोहराया, जिनमें अवैध धार्मिक मतांतरण पर रोक, घर वापसी को प्रोत्साहन, वैदिक ज्ञान-विज्ञान का प्रचार, मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्ति और सामाजिक समरसता जैसे विषय शामिल हैं।

अनुपम खेर ने दी श्रद्धांजलि

अभिनेता अनुपम खेर ने सोमवार को सोशल मीडिया पर अशोक सिंघल को उनकी जन्म शताब्दी पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बताया कि आगामी फिल्म ‘श्री रामभूमि’ में वह अशोक सिंघल की भूमिका निभा रहे हैं और यह उनके लिए सम्मान की बात है। खेर ने अगस्त में इस फिल्म की शूटिंग पूरी की थी, जिसकी शुरुआत जुलाई में अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर से हुई थी।

उल्लेखनीय है कि अशोक सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को आगरा में हुआ था। वह 1942 से संघ से जुड़े, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से धातुकर्म अभियांत्रिकी की पढ़ाई के बाद पूर्णकालिक प्रचारक बने और 1980 में विहिप में भेजे गए। 1984 में वह विहिप के महामंत्री और बाद में अध्यक्ष बने। राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी अग्रणी भूमिका रही। 17 नवंबर 2015 को गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया था।

स्रोत: द प्रिंट (पीटीआई), द ट्रिब्यून, ऑर्गनाइज़र, एएनआई

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