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इंदौर में आज झांकियों का महाकारवां: 9 किलोमीटर का रास्ता, खजराना गणेश की अगुवाई में राजवाड़ा तक बप्पा की विदाई

इंदौर में आज झांकियों का महाकारवां: 9 किलोमीटर का रास्ता, खजराना गणेश की अगुवाई में राजवाड़ा तक बप्पा की विदाई फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स

इंदौर ब्यूरो। दस दिवसीय पूजन-अर्चन के समापन पर आज विघ्नहर्ता की विदाई का अवसर है, और इसके स्वागत की शहर ने मुकम्मल तैयारियां कर ली हैं। करीब सौ साल पुरानी झांकी परंपरा के अनुसार आज संध्या समय इंदौर की सड़कों पर झांकियों का विशाल काफिला निकलेगा — जगमगाती झांकियां, अखाड़ों के प्रदर्शन और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इस समारोह की शोभा बढ़ाएगी। मान्यता है कि विदाई के समय बप्पा अपने भक्तों की सारी बाधाएं साथ लेकर जाते हैं; इसी विश्वास के साथ इंदौरवासी आज अपने विघ्नहर्ता को विदा करेंगे।

कहां से कहां तक: 9 किलोमीटर का रास्ता

शोभायात्रा का आगाज आज शाम छह बजे डीआरपी लाइन से होगा, जिसमें अग्रिम पंक्ति में खजराना गणेश मंदिर की झांकी सुशोभित होगी। तत्पश्चात शास्त्री कॉर्नर नवयुवक मंडल, इंदौर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, होप टेक्सटाइल, कल्याण मिल, मालवा मिल, हुकुमचंद मिल, स्वदेशी मिल, राजकुमार मिल और स्पूतनिक ट्यूटोरियल एकेडमी की झांकियां बारी-बारी से रवाना होंगी। मिल क्षेत्र से आगे बढ़ता यह कारवां मजदूर मैदान, भंडारी मिल श्रम शिविर, देवी अहिल्या मार्ग, एमजी रोड, कृष्णपुरा, नंदलालपुरा और जवाहर मार्ग पार करते हुए नरसिंह बाजार पहुंचेगा। वहां से शीतला माता बाजार, गोराकुंड और खजूरी बाजार होते हुए यह काफिला राजवाड़ा जा पहुंचेगा। नौ किलोमीटर से अधिक लंबे इस मार्ग से शहर के प्रमुख इलाके जुड़ते हैं, और प्रतिवर्ष लाखों दर्शक सड़कों के किनारे इस दृश्य को देखने उमड़ पड़ते हैं। आधी रात तक झांकियां और अखाड़े क्रमशः निकलते रहेंगे।

कौन-कौन सी झांकियां रहेंगी आकर्षण का केंद्र

इस वर्ष की झांकियों में धार्मिक कथानकों के साथ-साथ सामाजिक संदेश भी देखने को मिलेंगे। स्वदेशी मिल की झांकियों में दुर्गा माता द्वारा महिषासुर वध की कथा और भगवान शंकर-माता सती से जुड़ा प्रसंग प्रदर्शित किया जाएगा। वहीं एक झांकी नशामुक्ति का आह्वान करेगी। कल्याण मिल की एक झांकी में भगवान जगन्नाथ की प्रथम रथयात्रा का दृश्य होगा, तो दूसरी में नारी शक्ति को विशेष स्थान मिलेगा। होप टेक्सटाइल मिल की झांकियों में गणेशजी की वंदना और भगवान शिव की बारात जैसे प्रसंग साकार किए जाएंगे।

अखाड़ों के उस्ताद दिखाएंगे शौर्य के करतब

झांकियों के साथ-साथ शहर के परंपरागत अखाड़े भी इस चल समारोह की रौनक बढ़ाएंगे। अखाड़ों के उस्ताद और खलीफा पारंपरिक खेलों तथा युद्धकलाओं के प्रदर्शन करेंगे। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही वीरता की यह परंपरा इंदौर के चल समारोह की विशेष पहचान बन चुकी है, और हर वर्ष दर्शक इन करतबों को देखने के लिए उत्सुक रहते हैं।

शासन की तैयारियां पूरी, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। शोभायात्रा के मार्ग पर ड्रोन, सीसीटीवी और फेस-रिकग्निशन कैमरों के जरिए निगरानी होगी; अहम स्थानों पर वाच टावर खड़े किए गए हैं तथा डॉक्टरों के साथ एंबुलेंस भी मुस्तैद रहेंगी। पूरे मार्ग पर सफाई, रोशनी और पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। झांकियों में तेज हथियार और नशा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे, जबकि अखाड़ों में जानलेवा हथियारों का प्रयोग सर्वथा वर्जित होगा। न्यायालय के आदेश के मुताबिक डीजे पर पूर्ण पाबंदी रहेगी — प्रत्येक झांकी पर ज्यादा से ज्यादा दो स्पीकर लगाने की छूट दी गई है। हाथी और ऊंट को समारोह में लाने पर भी रोक है। भीड़ प्रबंधन और शांतिपूर्ण आयोजन के लिए पुलिस-प्रशासन की टीमें समूचे मार्ग पर ड्यूटी पर रहेंगी।

ट्रैफिक प्लान: दोपहर 3 बजे से डायवर्जन

यातायात पुलिस द्वारा ट्रैफिक प्लान पहले ही जारी किया जा चुका है। आज दोपहर तीन बजे से कार्यक्रम के समापन तक झांकी मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में वाहनों का मार्ग परिवर्तित रहेगा। नंदलालपुरा, यशवंत रोड, नरसिंह बाजार, गोराकुंड, खजूरी बाजार, सुभाष चौक, राजवाड़ा और कृष्णपुरा पुल सहित समूचे मार्ग पर आवागमन प्रभावित होगा, और इन इलाकों में पार्किंग पर भी पाबंदी रहेगी। कई सड़कों पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। पुलिस ने नागरिकों से यात्रा की पूर्व योजना बनाने का अनुरोध किया है।

देर रात जब अंतिम झांकी राजवाड़ा से होकर गुजरेगी, तब इंदौर अपने बप्पा को अगले वर्ष पुनः पधारने के आश्वासन के साथ विदाई देगा।

फोटो: सौजन्य — विकिमीडिया कॉमन्स

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