भोपाल ब्यूरो। मध्यप्रदेश में चल रहे सेवा संकल्प अभियान के तहत अब तक 15.83 लाख आवेदकों को विभिन्न योजनाओं और सेवाओं का लाभ मिल चुका है। सरकार के अनुसार, यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से शुरू हुआ और करीब एक माह तक प्रदेश के सभी जिलों और गांवों में सेवा गतिविधियों के रूप में चला। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि सेवा का यह संकल्प ही सरकार की कार्यशैली की पहचान है और इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए।
क्या है सेवा संकल्प अभियान
सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अभियान के शुभारंभ के समय कहा था कि प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण को समर्पित रहे हैं। इसी भावना को जमीन पर उतारने के लिए प्रदेश में एक माह तक सेवा से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन किया गया।
अभियान के दौरान प्रदेश के सभी जिलों में अलग-अलग विभागों ने सेवा शिविर, स्वच्छता अभियान, स्वास्थ्य जांच, रक्तदान, पौधारोपण, शिक्षा और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए। सरकार का कहना है कि इन कार्यक्रमों में जनभागीदारी को विशेष महत्व दिया गया, ताकि सेवा का संदेश सिर्फ सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रहकर समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।
15.83 लाख आवेदकों को मिला लाभ
सरकार के अनुसार, अभियान के दौरान विभिन्न योजनाओं और सेवाओं के लिए आए आवेदनों में से 15.83 लाख आवेदकों को लाभ पहुंचाया गया। इनमें पेंशन, छात्रवृत्ति, प्रमाण-पत्र, स्वास्थ्य सेवाएं, आवास और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े आवेदन शामिल हैं। सरकार का कहना है कि अभियान का मकसद सिर्फ कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि लोगों की अटकी हुई समस्याओं का मौके पर ही समाधान करना था।
कैबिनेट बैठक में भी अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि अभियान के तहत हुए कार्यों का प्रस्तुतीकरण किया गया और आगे भी इसी तरह सेवा गतिविधियों को गति देने पर जोर दिया गया। सरकार का मानना है कि इस तरह के अभियानों से शासन और जनता के बीच सीधा संवाद बनता है और लोगों का प्रशासन पर भरोसा बढ़ता है।
भूमि पट्टों की निःशुल्क रजिस्ट्री
अभियान की शुरुआत के समय सरकार ने एक बड़ी घोषणा भी की थी। इसके तहत 50 लाख से अधिक ग्रामीणजनों को भूमि पट्टों की शासकीय स्तर पर निःशुल्क रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। सरकार के अनुसार, इसके लिए प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि पट्टा किसी परिवार के लिए सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि उसकी पहचान और आर्थिक सुरक्षा का आधार होता है। निःशुल्क रजिस्ट्री से गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई गई।
युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी
अभियान के दौरान युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी भी देखने को मिली। भोपाल के तात्या टोपे स्टेडियम में सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘सेवा के रंग, राष्ट्र के संग’ और ‘सेवा-ज्योति’ कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें मुख्यमंत्री ने भी हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने ‘विकसित भारत’ की थीम पर रंगोली बनाई, जिसमें चंद्रयान मिशन और अयोध्या के श्रीराम मंदिर को दर्शाया गया। विद्यार्थियों ने भारत के मानचित्र की आकृति में मानव श्रृंखला भी बनाई। मुख्यमंत्री ने गुब्बारे छोड़कर सेवा और सद्भाव का संदेश दिया।
सरकार का कहना है कि ऐसे कार्यक्रमों से युवा पीढ़ी में सेवा, सहयोग और राष्ट्रसेवा की भावना मजबूत होती है। विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रस्तुतियों ने अभियान को सिर्फ सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनआंदोलन का रूप देने में मदद की।
सेवा के साथ सुशासन का संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अभियान के दौरान बार-बार इस बात पर जोर दिया कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और सरकार का काम जनता की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने सेवा को शासन का मूल मंत्र बनाया है। मध्यप्रदेश में भी इसी भावना के साथ काम किया जा रहा है।
अभियान के दौरान विभिन्न विभागों ने अपने-अपने क्षेत्र में सेवा कार्यों को प्राथमिकता दी। स्वास्थ्य विभाग ने जांच शिविर लगाए, शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के लिए कार्यक्रम किए और ग्रामीण विकास विभाग ने योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंचने पर जोर दिया। सरकार का कहना है कि विभागों के बीच समन्वय से अभियान के परिणाम बेहतर हुए।
आगे की राह
सरकार के अनुसार, सेवा संकल्प अभियान का समापन भले ही हो गया हो, लेकिन सेवा की भावना को आगे भी जारी रखा जाएगा। जिन आवेदनों का निपटारा अभियान के दौरान नहीं हो पाया, उन्हें भी तय समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि सेवा कार्यों की समीक्षा नियमित रूप से की जाएगी, ताकि योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे।
आलोचकों का कहना है कि ऐसे अभियानों का असली मूल्यांकन जमीन पर हुए बदलाव से होना चाहिए, न कि सिर्फ आंकड़ों से। सरकार का जवाब है कि 15.83 लाख आवेदकों को लाभ मिलना ही इस बात का प्रमाण है कि अभियान सिर्फ औपचारिकता नहीं था। आने वाले समय में इन लाभार्थियों की स्थिति और योजनाओं के असर की समीक्षा ही अभियान की सफलता का असली पैमाना होगी।
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