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साइबर ठगी पीड़ितों को बड़ी राहत: ठगी की रकम वापसी पर स्टांप शुल्क ₹1000 से घटकर ₹100, CM के निर्देश पर फैसला

सांकेतिक चित्र — साइबर सुरक्षा

भोपाल ब्यूरो। साइबर ठगी के पीड़ितों के लिए राहत की खबर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर राज्य शासन साइबर अपराधों के पीड़ितों को आर्थिक राहत प्रदान करने और उनकी ठगी गई धनराशि वापस दिलाने की प्रक्रिया को अधिक किफायती बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके तहत मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से धनराशि की वापसी की प्रक्रिया पर देय स्टांप शुल्क 1,000 रुपये से घटाकर 100 रुपये किया जा रहा है। इस निर्णय से पीड़ितों पर पड़ने वाला आर्थिक भार कम होगा और उन्हें अपनी धनराशि वापस प्राप्त करने की प्रक्रिया में राहत मिलेगी।

क्या है मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल

जब किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी होती है और उसकी रकम किसी ठग के खाते में चली जाती है, तो पुलिस की कार्रवाई के बाद उस रकम को पीड़ित को वापस दिलाने की प्रक्रिया को मनी रिस्टोरेशन कहा जाता है। इसमें कई बार न्यायालयीन प्रक्रिया और दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है, जिन पर स्टांप शुल्क देना होता था। अब तक इस प्रक्रिया पर 1,000 रुपये स्टांप शुल्क देय था।

सरकार के अनुसार, यह शुल्क पीड़ितों के लिए अतिरिक्त बोझ था, क्योंकि वे पहले ही ठगी का शिकार होकर अपनी रकम गंवा चुके होते हैं। स्टांप शुल्क घटाकर 100 रुपये करने से वापसी की प्रक्रिया सस्ती होगी और अधिक पीड़ित अपनी रकम वापस पाने के लिए आगे आ सकेंगे। सरकार का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों में धनराशि वापस दिलाने की प्रक्रिया को कम खर्चीला बनाना पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

ठगी के बाद क्या करें — सबसे पहले ये कदम

साइबर ठगी का शिकार होने पर सबसे अहम बात समय पर कार्रवाई है। सरकार और पुलिस की अपील है कि ठगी होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें और आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं, जिससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके। जितनी जल्दी शिकायत होगी, ठगी की रकम को रोकने और वापस दिलाने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

शिकायत दर्ज करते समय ठगी से जुड़े सभी विवरण संभालकर रखें — जैसे ठग का फोन नंबर, खाता संख्या, ट्रांजैक्शन आईडी, मैसेज या कॉल का स्क्रीनशॉट और ठगी का समय। ये जानकारियां जांच में मदद करती हैं। किसी भी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, पासवर्ड या बैंक विवरण कभी न बताएं। बैंक या पुलिस कभी फोन पर ओटीपी नहीं मांगते।

साइबर ठगी के आम तरीके

साइबर ठग कई तरीकों से लोगों को निशाना बनाते हैं। इनमें फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक, नकली कस्टमर केयर नंबर, नौकरी या इनाम के झांसे, यूपीआई फ्रॉड और निवेश के नाम पर ठगी प्रमुख हैं। कई बार ठग खुद को बैंक अधिकारी, पुलिस या सरकारी कर्मचारी बताकर लोगों को डराते हैं और रकम ट्रांसफर करा लेते हैं।

सरकार के अनुसार, साइबर अपराधों की रोकथाम, नागरिकों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्रभावित व्यक्तियों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जागरूकता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे मजबूत हथियार है।

पीड़ितों के लिए क्यों अहम है यह राहत

साइबर ठगी का शिकार व्यक्ति अक्सर दोहरी मार झेलता है — एक तो उसकी मेहनत की कमाई चली जाती है, और दूसरा उसे रकम वापस पाने के लिए कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस प्रक्रिया में लगने वाला शुल्क और समय कई पीड़ितों को हतोत्साहित कर देता है। स्टांप शुल्क में कटौती से इस प्रक्रिया का एक बड़ा आर्थिक अवरोध दूर होगा।

राज्य शासन का कहना है कि इस पहल से साइबर अपराध पीड़ितों के हितों की रक्षा और उन्हें आर्थिक राहत प्रदान करने के प्रयासों को बल मिलेगा। सरकार का मकसद यह है कि कोई भी पीड़ित सिर्फ खर्च के डर से अपनी रकम वापस पाने की प्रक्रिया से पीछे न हटे।

प्रक्रिया अभी चल रही है — ध्यान रखें

एक बात ध्यान रखने योग्य है कि इस निर्णय से संबंधित प्रक्रिया चल रही है। यानी स्टांप शुल्क में कटौती का फैसला लिया जा रहा है और इसके औपचारिक आदेश व क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। पीड़ितों को सलाह है कि वे अपने जिले के संबंधित कार्यालय या साइबर सेल से ताजा स्थिति की पुष्टि कर लें। जैसे ही औपचारिक आदेश जारी होगा, नई दर लागू हो जाएगी।

साथ ही, किसी भी व्यक्ति को साइबर ठगी से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ आधिकारिक स्रोतों — हेल्पलाइन 1930 और पोर्टल www.cybercrime.gov.in — पर ही भरोसा करना चाहिए। सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट जानकारी या किसी अनजान व्यक्ति के दावों पर भरोसा न करें।

साइबर सुरक्षा के लिए सामान्य सावधानियां

साइबर ठगी से बचने के लिए कुछ सामान्य सावधानियां अपनाई जा सकती हैं। अनजान लिंक पर क्लिक न करें, संदिग्ध ऐप डाउनलोड न करें, अपने बैंक खातों में अलर्ट चालू रखें और समय-समय पर पासवर्ड बदलते रहें। सार्वजनिक वाई-फाई पर बैंकिंग से बचें। अगर कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर दबाव बनाए, तो घबराएं नहीं — पहले आधिकारिक नंबर पर संपर्क करके पुष्टि करें।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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