इंदौर ब्यूरो।
आधुनिकता की अंधी दौड़ में तेजी से बढ़ती नशे की प्रवृत्ति युवा पीढ़ी के भविष्य को अंधकार की ओर धकेल रही है। नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य और परिवार को ही नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों को भी कमजोर करता है। इससे मुक्ति का रास्ता जागरूकता, आत्मसंयम और सामाजिक एकजुटता से होकर गुजरता है। इसी उद्देश्य के साथ श्री महावर विचार मंच के तत्वावधान में आयोजित दशहरा मिलन समारोह में नशे का त्याग करने, सामाजिक एकता मजबूत बनाने और युवाओं को समाजहित के कार्यों से जोड़ने का संकल्प लिया गया।
समारोह की अध्यक्षता मंच के संयोजक नंदराम मेहर ने की। मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय वीरांगना झलकारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय कोली समाज के प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष प्रकाश महावर कोली उपस्थित थे। समारोह में सामाजिक एकता, युवा भागीदारी और समाज की लंबित मांगों को लेकर विचार-मंथन हुआ। साथ ही सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
नशा छोड़ें, युवाओं को बचाएं: अतिथियों का आह्वान
अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति समाज के लिए गंभीर चुनौती है। युवा किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होते हैं, लेकिन नशे की गिरफ्त में आकर उनकी प्रतिभा, ऊर्जा और भविष्य प्रभावित होते हैं। समाज को केवल नशे के दुष्परिणामों पर चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि युवाओं को जागरूक करने, उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने और नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करने के ठोस प्रयास करने चाहिए। परिवारों, सामाजिक संगठनों और वरिष्ठजनों को इस दिशा में मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।
वक्ताओं ने कहा कि नशामुक्ति का अभियान तभी सफल होगा जब घर-घर तक यह संदेश पहुंचे। युवाओं को खेल, शिक्षा और सामाजिक सेवा जैसे रचनात्मक कार्यों से जोड़कर ही उन्हें नशे के जाल से बचाया जा सकता है। समारोह में उपस्थित समाजजनों ने नशा न करने और नशा करने वालों को समझाने का संकल्प लिया।
झलकारी बाई की प्रतिमा स्थापना का प्रस्ताव
समारोह में शिव मंदिर प्रांगण, महावर नगर में वीरांगना झलकारी बाई की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इस संबंध में महापौर एवं विधायक से पुनः मिलकर प्रतिमा स्थापना की मांग को प्रभावी ढंग से उठाने का निर्णय लिया गया।
वीरांगना झलकारी बाई 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की अमर वीरांगना थीं, जिन्होंने रानी लक्ष्मीबाई की सेना में अदम्य साहस का परिचय दिया था। कोली समाज उन्हें अपनी गौरवशाली विरासत का प्रतीक मानता है और लंबे समय से इंदौर में उनकी प्रतिमा स्थापना की मांग उठाता आ रहा है। समाज का मानना है कि महापुरुषों के सम्मान से जुड़े कार्यों में किसी भी तरह की बाधा स्वीकार्य नहीं है।
प्रतिमा के मार्ग में बाधा पर आक्रोश, सामाजिक बहिष्कार का प्रस्ताव
इस मुद्दे पर महावर विचार मंच के संयोजक नंदराम मेहर ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि वीरांगना झलकारी बाई देश के स्वतंत्रता संग्राम की वीरता, त्याग और बलिदान की प्रतीक हैं। उनकी प्रतिमा की स्थापना के लिए भाई प्रकाश महावर कोली 30 वर्षों से प्रयासरत हैं। इनकी जागरुकता और प्रयासों से ही दशहरा मैदान दरगाह चौराहे का नामकरण वीरांगना झलकारी बाई के नाम पर करने की घोषणा महापौर जी ने की, इसमें विधायक एवं पार्षद का अहम योगदान रहा। लेकिन दुर्भाग्य इस बात का है कि कुछ समाज विरोधी तत्व सामाजिक सम्मान से जुड़े कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं, जिसे किसी भी हालात में स्वीकार्य नहीं किया जा सकता है।
वक्ताओं ने दुल्हाजु के ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के हितों और महापुरुषों के सम्मान के विरुद्ध काम करने वालों के प्रति समाज को सजग रहना चाहिए। प्रतिमा स्थापना के प्रयासों में बाधा डालने के लिए जिम्मेदार माने जा रहे लोगों के सामाजिक बहिष्कार का निर्णय भी समारोह में लिया गया।

22 नवंबर को झलकारी महोत्सव की तैयारी
मुख्य अतिथि प्रकाश महावर कोली ने सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति आपसी भाईचारे, संगठन और सामूहिक निर्णयों में निहित है। समाजहित के मुद्दों पर व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होना समय की आवश्यकता है। युवाओं की भागीदारी बढ़ाकर ही सामाजिक कुरीतियों से मुकाबला किया जा सकता है और नई पीढ़ी को बेहतर दिशा दी जा सकती है।
उन्होंने बताया कि 22 नवम्बर 2026 को आयोजित होने वाले झलकारी महोत्सव को सफल बनाने का संकल्प लिया गया। इसके अंतर्गत भव्य शौर्य यात्रा और वीरांगना झलकारी अलंकरण समारोह में समाज की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने पर सहमति बनी।
सामूहिक विवाह सम्मेलन का निर्णय
समारोह में सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि सामूहिक विवाह से समाज के गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों का आर्थिक बोझ कम होता है और सामाजिक समरसता बढ़ती है। इस आयोजन को सफल बनाने के लिए समाज के सभी वर्गों से सहयोग का आह्वान किया गया।
एकता, संगठन और समाजहित के कार्यों पर जोर
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि समाज की प्रगति के लिए नशामुक्ति, शिक्षा, युवाओं की सक्रिय भागीदारी, सामूहिक विवाह और महापुरुषों के सम्मान जैसे विषयों को प्राथमिकता देनी होगी। दशहरा मिलन समारोह को केवल आपसी मेल-मिलाप तक सीमित न रखकर सामाजिक सुधार और संगठन को मजबूत करने का माध्यम बनाने पर जोर दिया गया।
ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर मंच के अध्यक्ष रुपचंद चौधरी, पन्नालाल तोनगर, रामचंद्र बिंदौरिया, गिरधारीलाल सिंदेल, पप्पू बेरवाड़, कमलेश टाटवाल, पूनम महावर, देवदास पेड़ा, रवि कर्नल मेहर, आदित्य मेहर सहित अनेक समाजजन उपस्थित थे।
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