डेस्क रिपोर्ट
नवरात्रि का आठवां दिन मां महागौरी को समर्पित है। मां महागौरी को शुद्धता, शांति और करुणा का स्वरूप माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार उनका वर्ण गौर (गोरा) है, वे वृषभ (बैल) पर सवार हैं और उनके हाथों में त्रिशूल और डमरू हैं।
तिथि को लेकर स्पष्टता — 18 अक्टूबर को क्या है
18 अक्टूबर (रविवार) को सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि है। अष्टमी तिथि सुबह करीब 8:27 बजे शुरू होगी और 19 अक्टूबर सुबह करीब 10:51 बजे तक रहेगी। इसलिए 18 अक्टूबर को अकेले “महा-अष्टमी” न मानें — यह नवरात्रि का आठवां दिन है, जिसमें सुबह सप्तमी और दिन का उत्तरार्ध अष्टमी तिथि में बीतेगा। महा-अष्टमी व्रत और महा-अष्टमी पूजा सोमवार 19 अक्टूबर को होगी, जब सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि रहेगी। कन्या पूजन की परंपरा परिवार के रिवाज के अनुसार 18, 19 या 20 अक्टूबर में से किसी दिन की जाती है।
मां महागौरी की कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार पार्वती जी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। लंबी तपस्या के कारण उनका वर्ण सांवला पड़ गया था। मान्यता है कि भगवान शिव की कृपा और गंगा-जल से स्नान के बाद वे पुनः गौर वर्ण वाली हो गईं, इसलिए वे महागौरी कहलाईं। यह कथा तप, धैर्य और शुद्धता का प्रतीक मानी जाती है।
महत्त्व
मान्यता है कि मां महागौरी की उपासना से मन की शुद्धता, शांति और करुणा बढ़ती है। भक्त उनसे परिवार में सुख-शांति, पापों के प्रायश्चित और जीवन में सकारात्मकता की प्रार्थना करते हैं। नवरात्रि के आठवें दिन कई भक्त उपवास रखते हैं और कन्या पूजन करते हैं।
7 उपाय (मान्यता और परंपरा के अनुसार)
- सफेद भोग: परंपरा के अनुसार नारियल, खीर या सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
- सफेद पुष्प: मां को सफेद फूल अर्पित करें।
- सायंकाल दीपक और जाप: शाम को दीपक जलाकर “ॐ देवी महागौर्यै नमः” का जाप करें।
- दान: अन्न-वस्त्र का दान करें।
- कन्या पूजन: जहां परंपरा हो, वहां कन्या पूजन और दक्षिणा करें।
- संयम और शांति: दिन भर क्रोध और कठोर वाणी से बचें, शांत मन से रहें।
- रात्रि ध्यान: रात में कुछ समय शांत बैठकर ध्यान या जाप करें।
नोट: ये उपाय आस्था और परंपरा पर आधारित हैं। इनसे किसी फल की गारंटी नहीं दी जाती।
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