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इंदौर में शंकरा आई फाउंडेशन की स्वर्ण जयंती: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा — परमार्थ ही सच्ची मानव सेवा, 50 साल में लाखों को लौटी रोशनी

सांकेतिक चित्र: नेत्र जांच (प्रतीकात्मक तस्वीर) सांकेतिक चित्र: नेत्र जांच (प्रतीकात्मक तस्वीर)

इंदौर ब्यूरो

सार: इंदौर में शंकरा आई फाउंडेशन की स्वर्ण जयंती पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े और फाउंडेशन की 50 साल की सेवा यात्रा की सराहना की; फाउंडेशन के 14 सुपर स्पेशियलिटी नेत्र अस्पतालों में प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीजों को उपचार मिलता है और लगभग 80 प्रतिशत मरीजों का इलाज नि:शुल्क होता है।

इंदौर में शंकरा आई फाउंडेशन इंडिया की स्वर्ण जयंती का भव्य समारोह आयोजित हुआ। इंदौर स्थित शंकरा आई सेंटर में हुए इस समारोह में फाउंडेशन की पांच दशकों की सेवा यात्रा को याद किया गया और आगे भी जरूरतमंदों तक गुणवत्तापूर्ण नेत्र चिकित्सा पहुंचाने का संकल्प दोहराया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समारोह से जुड़े और फाउंडेशन को बधाई दी। उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी वर्चुअली समारोह को संबोधित किया। इंदौर में आयोजित समारोह में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सांसद शंकर लालवानी और फाउंडेशन के संस्थापक पद्मश्री डॉ. आर.वी. रमानी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

परमार्थ ही सच्ची मानव सेवा: मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि हमारी संस्कृति में जीवात्मा की सेवा को ही सर्वोच्च धर्म माना गया है और सच्चे अर्थों में परमार्थ ही मानव मात्र की सेवा है। उन्होंने कहा कि शंकरा आई फाउंडेशन ने पांच दशकों से निष्ठा और समर्पण के साथ जरूरतमंदों की नेत्र चिकित्सा कराकर नर सेवा ही नारायण सेवा के संकल्प को साकार किया है। किसी व्यक्ति की आंखों की रोशनी लौटने से उसके जीवन में ही नहीं, पूरे परिवार में खुशियां लौट आती हैं।

मुख्यमंत्री ने फाउंडेशन के संस्थापक एवं मैनेजिंग ट्रस्टी पद्मश्री डॉ. आर.वी. रमानी, सह-संस्थापक डॉ. राधा रमानी सहित फाउंडेशन के सभी चिकित्सकों और कर्मचारियों को 50 वर्षों की सफल सेवा यात्रा पूर्ण करने पर मध्यप्रदेश सरकार की ओर से बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार निरंतर विकास और जनकल्याणकारी कार्यों को आगे बढ़ा रही है और गरीब व जरूरतमंद लोगों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिले, इस दिशा में योजनाओं के क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

1977 में कोयंबटूर के छोटे स्वास्थ्य केंद्र से शुरू हुआ सफर

शंकरा आई फाउंडेशन की कहानी एक छोटे से स्वास्थ्य केंद्र से शुरू हुई थी। मई 1977 में डॉ. आर.वी. रमानी और डॉ. राधा रमानी ने कांची के शंकराचार्यों से प्रेरणा लेकर तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की शुरुआत की थी। जरूरतमंदों की सेवा के उद्देश्य से शुरू हुई यह पहल आज देश के 10 राज्यों तक पहुंच चुकी है। फाउंडेशन के 14 सुपर स्पेशियलिटी नेत्र अस्पतालों में प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीजों को उपचार की सुविधा मिल रही है।

सांकेतिक चित्र: नेत्र जांच (प्रतीकात्मक तस्वीर)
सांकेतिक चित्र: नेत्र जांच (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक छोटी सी शुरुआत का इतने व्यापक सेवा नेटवर्क में बदलना और पांच दशकों तक सेवा के संकल्प को निरंतर निभाना अपने आप में उल्लेखनीय उपलब्धि है। किसी संस्था का आधा शतक पूरा करना केवल समय बीतने का प्रतीक नहीं होता, बल्कि यह इस बात का प्रमाण होता है कि उसके काम में निरंतरता, भरोसा और समाज की जरूरतों से जुड़ाव बना रहा है। शंकरा आई फाउंडेशन की यात्रा में यही निरंतरता सबसे बड़ी पूंजी रही है।

80 प्रतिशत मरीजों का मुफ्त इलाज: सेवा आधारित चिकित्सा मॉडल

शंकरा आई फाउंडेशन की सबसे बड़ी विशेषता उसका सेवा आधारित चिकित्सा मॉडल है। फाउंडेशन में लगभग 80 प्रतिशत लोगों का नेत्र उपचार नि:शुल्क किया जाता है, जबकि शेष 20 प्रतिशत लोग भुगतान करके उपचार प्राप्त करते हैं। मुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि आर्थिक तंगी किसी जरूरतमंद के इलाज में रुकावट नहीं बननी चाहिए।

यह मॉडल इस सिद्धांत पर काम करता है कि जो लोग भुगतान कर सकते हैं, उनके योगदान से उन लोगों का इलाज संभव होता है जो भुगतान नहीं कर सकते। इसी वजह से फाउंडेशन पांच दशकों से बिना रुके सेवा जारी रख पाया है। नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में यह मॉडल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आंखों की बीमारियों का इलाज समय पर न होने पर व्यक्ति की रोजी-रोटी, पढ़ाई और आत्मनिर्भरता — तीनों पर असर पड़ता है। समय पर मोतियाबिंद का ऑपरेशन या चश्मे का सही नंबर मिल जाना किसी बुजुर्ग के लिए फिर से स्वतंत्र जीवन की शुरुआत जैसा होता है।

नेत्रदान को लेकर भ्रांतियां दूर करने की अपील

मुख्यमंत्री ने नेत्रदान के प्रति समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जागरूकता अभियान के जरिए इस पुण्य कार्य का संदेश जन-जन तक पहुंचाना होगा। स्कूलों, कॉलेजों, युवा संगठनों और सामाजिक संस्थाओं को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वर्ण जयंती समारोह इस संस्थान को भविष्य के लिए नए लक्ष्य तय करने का भी समय है।

नेत्रदान को लेकर समाज में कई तरह की गलतफहमियां अब भी मौजूद हैं। कई लोग यह मानते हैं कि नेत्रदान से चेहरे की बनावट बिगड़ जाती है या इससे किसी तरह की धार्मिक मनाही जुड़ी है, जबकि चिकित्सा विशेषज्ञ बार-बार स्पष्ट करते रहे हैं कि नेत्रदान की प्रक्रिया सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से होती है और इससे किसी दूसरे व्यक्ति की दुनिया में रोशनी लौट सकती है। इसी वजह से मुख्यमंत्री ने युवाओं और शिक्षण संस्थानों से इस संदेश को आगे बढ़ाने की अपील की।

बच्चों की आंखों के लिए रेनबो स्क्रीनिंग प्रोग्राम

समारोह में फाउंडेशन के संस्थापक पद्मश्री डॉ. आर.वी. रमानी ने नेत्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन रेनबो स्क्रीनिंग प्रोग्राम के माध्यम से पांच लाख बच्चों की नि:शुल्क नेत्र जांच करने का लक्ष्य लेकर काम कर रहा है, ताकि बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान कर उन्हें उचित उपचार एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सके।

बच्चों की आंखों की जांच इसलिए भी अहम है, क्योंकि बचपन में नजर की कमजोरी का पता न चलने पर पढ़ाई, खेल और आत्मविश्वास — सभी पर असर पड़ता है। कई बार बच्चा यह बता ही नहीं पाता कि उसे धुंधला दिख रहा है, और समस्या तब सामने आती है जब वह काफी बढ़ चुकी होती है। स्कूल स्तर पर नियमित जांच इस अंतर को पाटने का सबसे सरल और असरदार तरीका है। रेनबो स्क्रीनिंग प्रोग्राम इसी जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गरीब और जरूरतमंद लोगों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के लिए योजनाओं के क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दे रही है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों और आयुष्मान आरोग्य केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा रही है। उन्होंने बेहतर हवाई संपर्क और एयर एम्बुलेंस सेवाओं का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, संकट के समय एयर एम्बुलेंस जरूरतमंद मरीजों को इलाज उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और मेडिकल कॉलेजों, एंबुलेंस सेवाओं व ट्रॉमा सेंटरों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना किसी भी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है, और इसी चुनौती से निपटने के लिए संस्थाओं व सरकार के बीच साझेदारी जरूरी हो जाती है। शंकरा आई फाउंडेशन जैसी संस्थाएं इसी साझेदारी का जीवंत उदाहरण हैं।

दृष्टिहीनता की रोकथाम: समय पर जांच ही सबसे बड़ा इलाज

नेत्र चिकित्सकों का मानना है कि दृष्टिहीनता के ज्यादातर मामलों को समय पर जांच और इलाज से रोका जा सकता है। मोतियाबिंद, नजर का कमजोर होना, मधुमेह से जुड़ी आंखों की बीमारियां और बच्चों में नजर की समस्या — ये सभी ऐसी स्थितियां हैं जिनमें जल्दी पहचान से इलाज आसान और सस्ता हो जाता है। देर होने पर इलाज महंगा भी होता है और कई बार नुकसान स्थायी भी हो जाता है।

इसी वजह से फाउंडेशन के काम का दायरा केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रहा है। जांच शिविर, जागरूकता अभियान और स्कूलों में स्क्रीनिंग के जरिए फाउंडेशन उन लोगों तक पहुंचता है जो खुद अस्पताल तक नहीं पहुंच पाते। स्वर्ण जयंती समारोह में भी यही संदेश दोहराया गया कि आने वाले वर्षों में सेवा का दायरा और बढ़ाना है तथा अधिक से अधिक जरूरतमंदों तक गुणवत्तापूर्ण नेत्र उपचार पहुंचाना है।

आगे की राह: सेवा का दायरा और बढ़ाने का संकल्प

शंकरा आई फाउंडेशन की स्वर्ण जयंती का यह समारोह संस्था की उपलब्धियों का उत्सव होने के साथ-साथ भविष्य में नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ाने और अधिक से अधिक जरूरतमंदों तक उपचार पहुंचाने के संकल्प का अवसर भी बना। मुख्यमंत्री ने कामना करते हुए कहा कि शंकरा आई फाउंडेशन अपने पूर्ण सेवाभाव के साथ आगे बढ़ते हुए अधिकाधिक जरूरतमंदों तक गुणवत्तापूर्ण नेत्र उपचार की सुविधा पहुंचाए।

फाउंडेशन की पांच दशकों की यात्रा सेवा, समर्पण और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इंदौर में हुआ यह समारोह इसलिए भी खास रहा, क्योंकि इसमें सरकार, जनप्रतिनिधियों, चिकित्सकों और समाजसेवी संस्थाओं की साझा उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि स्वास्थ्य सेवा केवल सरकार या केवल संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के सभी हिस्सों की साझा जिम्मेदारी है। इस समारोह की विस्तृत खबर यहां पढ़ी जा सकती है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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