गयासुर के बलिदान से ‘गया जी’ बन गया मोक्षतीर्थ
‘गयागमन मात्रेण पितृणामऋणं भवेत्।’ — अर्थात् गयातीर्थ जाने मात्र से ही व्यक्ति पितृऋण से मुक्त हो जाता है। पितृपक्ष विशेष: जानिए गया जी की पौराणिक कथा, श्राद्ध-पिण्डदान की महिमा और पिण्डदान के समय की प्रार्थना।
