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केतू की महादशा में गुरु, शनि और बुध की अन्तर्दशा के परिणाम

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आज हमारी चर्चा केतू की महादशा में गुरु शनि और बुध की अन्तर्दशा के परिणामों पर होगी।

केतू की महादशा में गुरु की अन्तर्दशा 11 माह छह दिन की होती है। यदि केतू और गुरु कुंडली में strong position में हो तो इस अन्तर्दशा में जातक के अंदर धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ती है। जातक तीर्थ यात्रा और देशाटन करता है। जातक के विचार सात्विक और धार्मिक होते है। यदि कुंडली में गुरु पीड़ित अवस्था में तो इस अन्तर्दशा में जातक के गुर जनों से संबंध खराब होते है। गुरु धन के कारक है अतः धन हानि भी होती है। इस दशा में जातक कों पेट संबंधी रोग भी हो सकते है यदि पंचम भाव और पंचमेश कुंडली में पीड़ित हो।

केतू की महादशा में शनि की अन्तर्दशा एक वर्ष एक माह नौ दिन की होती है। जातक कों अपने सेवकों से लाभ भी मिलता है। यदि केतू और शनि कुंडली में पीड़ित हो तो इस अन्तर्दशा में जातक कों अपने कठिन परिश्रम करने के बाद भी सफलता नही मिलती। जातक कों जीविकोपार्जन के लिये संघर्ष करना पड़ता है। और यदि षष्ठ भाव पीड़ित हो तो जातक कों पैर से related बीमारी हो सकती है।

केतू की महादशा में बुध की अन्तर्दशा 11 माह 27 दिन की होती है। यदि बुध और केतू कुंडली में strong position में हो तो इस अन्तर्दशा में जातक के व्यापार में वृद्धि होती है। जातक पठन पाठन में रुचि लेता है। किन्तु यदि केतू और बुध कुंडली में पीड़ित अवस्था में हो तो इस दशा में जातक के कार्य व्यवसाय में हानि होती है जातक के ननिहाल पक्ष से relation खराब होते है।

अब शुक्र की महादशा में सारे ग्रहों की अन्तर्दशा के फलों की चर्चा अगली पोस्ट में करेंगे।

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ज्योतिषाचार्य निर्विकार शर्मा

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