
सामाजिक समरसता, धार्मिक एवं बड़ा गणपति चौराहे पर संपन्न हुआ हिंदू नववर्ष का भव्य आयोजन
शंख ध्वनि एवं स्वस्ति-वाचन के साथ सूर्यदेव को दिया गया पवित्र नदियों के जल से अर्घ्य
संतों के सानिध्य और आशीर्वचन में हुआ नववर्ष का स्वागत
कन्या पाद पूजन, लोक गीत संगीत, शस्त्र कला का प्रदर्शन और गुड़ी पूजन भी हुआ
परंपराओं के प्रति प्रतिबद्धता मां अहिल्या की नगरी की पुरातन परिभाषा है। इस परिभाषा को नया अर्थ दे रही है संस्था सार्थक। पारंपरिक लोक नृत्य, वैदिक मंत्रोच्चार एवं शंख ध्वनि के साथ गुड़ी पड़वा के स्वागत की यह अनूठी पहल साकार हुई गुरुवार, 19 मार्च को। भगवान सूर्यदेव को पवित्र 09 पवित्र नदियों के जल से अर्घ्य देकर नवधा भक्ति को भी सार्थक किया गया। प्रातः 6:15 बजे संस्था सार्थक एवं हिंदू नववर्ष आयोजन समिति के तत्वाधान में बड़ा गणपति चौराहे पर, नववर्ष गुड़ीपड़वा के इस नव्य-भव्य आयोजन ने सनातन संस्कृति की नई झलक दिखलाई।
आयोजक, भाजपा प्रदेश के सह मीडिया प्रभारी और पूर्व पार्षद दीपक जैन “टीनू” ने बताया कि इंदौर संस्कार और सरोकार की धरती है। यहां धार्मिक परंपराओं के साथ सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का सम्मान भी सर्वोपरि रहा है। इसी क्रम में हिंदू नववर्ष अभिनंदन आयोजन का यह 9वां विनम्र प्रयास था। सामूहिक सूर्य अर्घ्य, पारंपरिक लोकगीत एवं लोकनृत्य, मातृशक्ति द्वारा शस्त्र कला को भी इसलिए प्रमुखता से आयोजन में शामिल किया गया था, ताकि नई पीढ़ी को शास्त्रीय एवं पौराणिक परंपराओं से संस्कारित किया जा सके। जब बटुकों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार व शंख ध्वनि के साथ पवित्र नदियों के जल से सूर्यदेव को अर्घ्य दिया गया, संपूर्ण क्षेत्र धर्म और परंपरा के सार्थक संस्कारों का प्रतिबिंब बन गया।
कार्यक्रम के संयोजक अंकित रावल और गौरव नाहर ने बताया कि नवरात्रि के प्रथम दिवस पर कन्या पाद पूजन, भी किया गया। आयोजन का एक विशेष आकर्षण पद्मश्री डॉ पुरू दाधिच जी एवं डॉ सुचित्रा हरमलकर जी की शिष्या प्रसिद्ध नृत्यांगना दमयंती जी भाटिया मिरदवाल के निर्देशन में गुड़ी पड़वा पर आरंभ कथक स्टूडियो की 30 से अधिक नृत्यांगनाओं की विशेष प्रस्तुति हुई।
तत्पश्चात भगवान शिव का ताण्डव स्तोत्र, जिसमें शिव की ऊर्जा और सृजनात्मक शक्ति को कथक के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया। इसके पश्चात नृत्यांगनाएँ माँ दुर्गा के महिषासुर मर्दिनी स्वरूप को मंच पर साकार किया, जो शक्ति और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।कार्यक्रम के अंतिम चरण में “जय श्रीराम” की प्रस्तुति के माध्यम से भगवान श्रीराम के नाम की महिमा का वर्णन किया गया। इसी क्रम में भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी के स्मरण के साथ हनुमान चालीसा की भावपूर्ण प्रस्तुति भी दी गई।
इस अवसर पर शस्त्र प्रशिक्षक श्री अंकित यादव द्वारा प्रशिक्षित मातृशक्तियों बहनों द्वारा आत्मरक्षा के लिए शस्त्र कला का प्रदर्शन भी किया गया।

संस्था के अध्यक्ष नितेश मुछाल, केशव पोरवाल ने बताया कि यह आयोजन वसुधैव कुटुंबकम के पवित्र उद्देश्य, पूजनीय संतों और जनमानस के सानिध्य में संपन्न हुआ। समारोह में सनातन संस्कृति का अनुसरण करते हुए बड़ी संख्या में युवाओं द्वारा भगवा साफा बांधकर अपने सनातनी संस्कारों का परिचय दिया। आस्था के इस अप्रतिम उत्सव में संपूर्ण बड़ा गणपति चौराहे को भगवा पताकाओं से भी सुसज्जित किया गया। साथ ही गुड़, धनिया और नीम मिश्री और श्रीखंड प्रसाद का वितरण भी किया गया।
समस्त अतिथियों ने कहा कि सनातन संस्कृति और संस्कारों का अविस्मरणीय प्रतिबिंब बनने वाले ऐसे आयोजन प्रशंसनीय हैं। वर्ष प्रतिपदा को लेकर ऐसा सार्वजनिक उत्साह एवं उल्लास इस बात का प्रमाण है कि हम सामाजिक जागृति के ऐतिहासिक दौर में दाखिल हो चुके हैं।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर डॉक्टर चेतन स्वरूप जी महाराज, महामंडलेश्वर श्रीराम गोपाल दास जी महाराज,महामंडलेश्वर श्री दादू महाराज, महामंडलेश्वर श्री पवन दास जी महाराज, महामंडलेश्वर श्री विजय रामदास जी महाराज, श्री यजत्र दास जी महाराज सहित अन्य संत महात्मा व कैबिनेट मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय जी, श्री तुलसीराम जी सिलावट, सांसद श्री शंकर लालवानी जी, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव जी, श्री गोलू शुक्ला जी,श्रीमती उमाशशि शर्मा, पार्षद कमल वाघेला, अश्विनी शुक्ल,संध्या यादव, सीमा कृष्णवल्लभ डाबी, बरखा मालू , अशोक चौहान चाँदु,भूपेंद्र केसरी,गोविंद पंवार,सुरेश टाकलकर,मंजू ठाकुर जी,ओपी जयसवाल जी,चंदन बैंस जी,सावन वर्मा,सुनीता जयपाल,सहित अन्य नेतागण, गणमान्यजन, मातृशक्ति,रहवासी संगठन बड़ी संख्या में युवाओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन अंकित रावल ने किया और आभार नितेश मुछाल ने माना।
