नई दिल्ली ब्यूरो
सार: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार को मौसम ने अचानक करवट ली। सुबह से छाए घने बादलों के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शहर के कई इलाकों के लिए गरज-चमक, बिजली, ओलावृष्टि और तेज आंधी की चेतावनी जारी की। कुछ इलाकों में रेड और कुछ में ऑरेंज अलर्ट रहा, हवाओं की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान रहा, और शुक्रवार को भी गरज के साथ बारिश की संभावना जताई गई है।
दिनभर बादल और बारिश का दौर
गुरुवार की सुबह से ही दिल्ली के आसमान पर घने बादल छाए रहे। सुबह के समय कई इलाकों में बादलों की घनी चादर देखने को मिली और दिन चढ़ने के साथ मौसम और अधिक अस्थिर होता गया। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार सुबह साढ़े आठ बजे तक के 24 घंटों में दिल्ली में नाममात्र की बारिश दर्ज की गई, जबकि उसी समय सापेक्ष आर्द्रता 91 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। अधिक नमी और बादलों की मौजूदगी ने दिनभर उमस और ठंडक का मिला-जुला एहसास बनाए रखा। दोपहर बाद कई इलाकों से बारिश की खबरें आईं। लोगों ने बताया कि अचानक तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी शुरू हुई और आसमान कुछ ही देर में पूरी तरह बादलों से ढक गया। दिनभर के इस बदलाव ने यह साफ कर दिया कि यह सामान्य बादल छाना नहीं, बल्कि एक सक्रिय मौसमी प्रणाली का असर था। मौसम विभाग ने दिन के लिए सामान्य रूप से बादल छाए रहने और बारिश होने का पूर्वानुमान पहले ही जारी कर रखा था, और दिन की घटनाओं ने उस पूर्वानुमान की पुष्टि की।
किस इलाके में कैसी चेतावनी
मौसम विभाग ने शाम के लिए जिलेवार पूर्वानुमान जारी किया, जिसमें अलग-अलग इलाकों के लिए अलग-अलग स्तर की चेतावनी दी गई। मध्य दिल्ली, नई दिल्ली, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली के कुछ हिस्सों में बिजली चमकने, ओलावृष्टि और गरज के साथ बूंदाबांदी की संभावना जताई गई। इन इलाकों में हवाओं की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने का अनुमान रहा। यह चेतावनी शाम छह बजे तक के समय के लिए जारी की गई थी। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, शाहदरा, उत्तर-पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के कुछ हिस्सों में मध्यम बारिश, बिजली चमकने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान रहा। इसके अलावा दक्षिण-पूर्वी, पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के कुछ अन्य इलाकों में बिजली चमकने के साथ हल्की बारिश की संभावना जताई गई। इस तरह की जिलेवार चेतावनी का मकसद लोगों को उनके अपने इलाके के हिसाब से सतर्क करना होता है, क्योंकि एक ही शहर में बारिश और आंधी की तीव्रता जगह-जगह अलग हो सकती है।

अलर्ट के रंगों का क्या मतलब है
मौसम विभाग की रंग-आधारित चेतावनी व्यवस्था में हर रंग का अपना अर्थ होता है। येलो अलर्ट का मतलब है कि मौसम पर नजर रखने की जरूरत है और हल्की से मध्यम गतिविधि संभव है। ऑरेंज अलर्ट गंभीर मौसम की संभावना की ओर इशारा करता है, जिससे यातायात और बिजली आपूर्ति में बाधा आ सकती है। रेड अलर्ट सबसे गंभीर स्तर माना जाता है, जिसमें तेज आंधी, भारी बारिश और ओलावृष्टि जैसी स्थितियों से जान-माल को नुकसान का खतरा रहता है। दिल्ली के लिए जारी चेतावनी में रेड और ऑरेंज दोनों स्तर देखने को मिले, यानी कुछ इलाकों में स्थिति अधिक गंभीर मानी गई, जबकि कुछ इलाकों में मध्यम से गंभीर असर का अनुमान रहा। यही वजह है कि प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी।
यातायात और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर
तेज हवाओं, बिजली और बारिश के इस दौर का सीधा असर दैनिक जीवन पर पड़ा। सड़कों पर यातायात की रफ्तार धीमी हुई और कई जगहों पर वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी। बारिश के दौरान दृश्यता कम हो जाती है और सड़कें फिसलन भरी हो जाती हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। खुले में काम करने वाले लोगों, दफ्तर से लौटने वाले यात्रियों और स्कूली बच्चों के लिए यह मौसम विशेष रूप से चुनौती भरा रहा। तेज हवाओं के समय पेड़ों की टहनियां टूटने, होर्डिंग गिरने और बिजली के खंभों के पास खतरा बढ़ने की आशंका रहती है। इसलिए मौसम विभाग की सलाह यही रही कि गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और कमजोर ढांचों से दूर रहें और सुरक्षित स्थान पर ठहरें। जिन लोगों को जरूरी काम से बाहर निकलना पड़ा, उन्हें मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई।
चक्रवात अर्नब से क्या है संबंध
दिल्ली और उत्तर भारत के इस बदले मौसम के पीछे बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात अर्नब की भूमिका भी रही है। चक्रवात अर्नब आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र और यनम के आसपास पहुंचने के बाद कमजोर होकर चक्रवाती तूफान की श्रेणी में आ गया था। मौसम विभाग के अनुसार 28 अक्टूबर की रात साढ़े ग्यारह बजे तक यह और कमजोर होकर डीप डिप्रेशन में बदल चुका था। उस समय इसका केंद्र उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश, दक्षिणी ओडिशा, दक्षिण छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर तेलंगाना के आसपास था और यह ओडिशा के मलकानगिरी से लगभग 60 किलोमीटर दक्षिण में स्थित था। अनुमान के अनुसार 29 अक्टूबर की शाम तक इसके और कमजोर होकर कम दबाव वाले क्षेत्र में बदलने की संभावना थी। तूफान की ताकत घटने के बावजूद इससे जुड़ी नमी और दूसरे मौसमी सिस्टम के मेल से कई राज्यों में बारिश का दौर बना रहा। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई गई, जबकि दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में तेज हवाओं, गरज-चमक और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई।
करवा चौथ पर बादलों की छाया
गुरुवार को करवा चौथ का पर्व भी मनाया जा रहा था, इसलिए दिल्ली के मौसम पर सबकी नजर कुछ ज्यादा ही टिकी रही। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ दिनभर का व्रत रखती हैं और शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं। दिनभर बादल और बारिश रहने से चंद्र दर्शन को लेकर चिंता बढ़ गई, क्योंकि बादलों की मोटी परत के बीच चांद का दिखना मुश्किल हो सकता है। शाम और रात के समय आसमान साफ होगा या बादल बने रहेंगे, यह पूरी तरह स्थानीय मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए चांद के दिखने को लेकर कोई निश्चित दावा करना संभव नहीं रहा। जिन इलाकों में बादल छंटे, वहां दर्शन की संभावना बनी रही, जबकि घने बादलों वाले इलाकों में प्रतीक्षा लंबी हो सकती है। मौसम की इस अनिश्चितता के बीच व्रत रखने वाली महिलाओं और उनके परिवारों के लिए आसमान पर नजर रखना ही सबसे भरोसेमंद तरीका रहा।
शुक्रवार को कैसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार, 30 अक्टूबर को भी दिल्ली में गरज के साथ बारिश की संभावना बनी रहेगी। दिन में अधिकतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 16 से 18 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। बादल छाए रहने और बारिश के चलते दिन में गर्मी से राहत मिल सकती है, लेकिन नमी अधिक रहने से उमस का एहसास बना रह सकता है। दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में 29 और 30 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना भी जताई गई है। इसके बाद 31 अक्टूबर को आसमान आंशिक रूप से बादलों से घिरा रह सकता है और बारिश की संभावना कम होने का अनुमान है। कुल मिलाकर अगले दो दिन मौसम अस्थिर रहने वाला है, इसलिए लोगों को अपनी दिनचर्या मौसम की ताजा जानकारी के हिसाब से तय करने की सलाह दी गई है। हवा की गुणवत्ता की बात करें तो दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में बनी रही है, और बारिश के बावजूद इसमें तुरंत बड़ा सुधार देखने को नहीं मिला है।
खराब मौसम में बरतें ये सावधानियां
खराब मौसम के दौरान कुछ आसान सावधानियां बड़े नुकसान से बचा सकती हैं। गरज-चमक के समय खुले मैदान, पेड़ों, बिजली के खंभों और धातु की ऊंची संरचनाओं से दूर रहें। तेज हवाओं के दौरान कमजोर होर्डिंग, टीन की छतों और निर्माणाधीन ढांचों के पास खड़े होने से बचें। घर के बाहर रखी हल्की और उड़ने वाली चीजों को सुरक्षित स्थान पर रख लें। वाहन चलाते समय गति कम रखें, हेडलाइट जलाए रखें और जलभराव वाले अंडरपास से बचें। बिजली चमकने के दौरान मोबाइल फोन और बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल सावधानी से करें। किसानों और खुले में काम करने वालों को मौसम की चेतावनी पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि तेज हवाओं और ओलों से फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। बच्चों और बुजुर्गों को इस दौरान घर के अंदर ही रहने की सलाह दी जाती है।
मौसम विभाग की ताजा चेतावनी के अनुसार दिल्ली में अगले कुछ घंटों तक बादल और बारिश का दौर बना रह सकता है, इसलिए सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
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