उज्जैन ब्यूरो
सार: उज्जैन के जीवनखेड़ी स्थित चौथ माता मंदिर के कपाट साल में सिर्फ एक बार, करवा चौथ के दिन ही खुलते हैं। गुरुवार 29 अक्टूबर को करवा चौथ पर हजारों महिलाओं ने माता के दर्शन किए, मंदिर में विशेष श्रृंगार हुआ और दुबई से लाई गई करीब 400 फीट लंबी चुनरी माता को अर्पित की गई।
उज्जैन में करवा चौथ का पर्व इस बार एक अनोखी परंपरा के साथ मनाया गया। शहर के जीवनखेड़ी इलाके में स्थित चौथ माता मंदिर के पट गुरुवार को खोले गए। यह मंदिर पूरे साल बंद रहता है और साल में केवल एक दिन, करवा चौथ के अवसर पर ही श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुलता है। इसी वजह से इस दिन यहां महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ती है। सुबह से ही मंदिर परिसर में दर्शन के लिए कतारें लग गईं। महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना लेकर माता के दरबार पहुंचीं। मंदिर में माता का विशेष श्रृंगार किया गया, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहा।
साल में सिर्फ एक दिन खुलते हैं कपाट
चौथ माता मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इसके कपाट साल में सिर्फ करवा चौथ पर खुलते हैं। बाकी पूरे साल मंदिर बंद रहता है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है और हर साल करवा चौथ पर ही यहां विशेष आयोजन होता है। इस दिन दर्शन के लिए दूर-दूर से महिलाएं पहुंचती हैं। सुबह से ही महिलाओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था और दोपहर तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। मंदिर के आसपास भी करवा चौथ की रौनक साफ दिखाई दी। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में माता के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की।
सुबह से लगी दर्शन की कतारें

करवा चौथ के दिन सुबह से ही मंदिर में दर्शन के लिए महिलाओं की कतारें लग गईं। हजारों महिलाओं ने माता चौथ के दर्शन किए। मंदिर में चौथ माता के साथ माता पार्वती, रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ और संतोषी माता की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। दर्शन के दौरान महिलाओं ने माता के सामने अपनी मनोकामनाएं रखीं। कई महिलाओं ने बताया कि वे हर साल करवा चौथ पर इस मंदिर में दर्शन के लिए आती हैं और इस परंपरा से उनकी गहरी आस्था जुड़ी हुई है। मंदिर परिसर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी इंतजाम किए गए थे, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन में कोई परेशानी न हो। भीड़ के बावजूद दर्शन की व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रही।
400 फीट लंबी चुनरी और दिनभर के कार्यक्रम
करवा चौथ पर मंदिर में दिनभर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। मंदिर के संस्थापक डॉ. कैलाश नागवंशी के अनुसार दोपहर 12 बजे भगवान मनु-शतरूपा की प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके बाद शाम 4 बजे दुबई से लाई गई करीब 400 फीट लंबी चुनरी माता को अर्पित की गई। यह चुनरी इस आयोजन का विशेष आकर्षण रही। इसके अलावा शाम को क्षिप्रा तट पर विशेष आरती का भी आयोजन किया गया। मंदिर में माता का विशेष श्रृंगार किया गया था, जिसमें फूलों और आभूषणों से माता का अलंकरण किया गया। श्रद्धालुओं ने इस श्रृंगार के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा।
प्रसाद में सिंदूर, सिक्के और रुद्राक्ष की मान्यता
चौथ माता मंदिर से जुड़ी एक खास परंपरा प्रसाद की भी है। यहां आने वाली महिलाओं को प्रसाद के रूप में सिंदूर, सिक्के और नेपाल के रुद्राक्ष दिए जाते हैं। मंदिर प्रबंधन के अनुसार श्रद्धालु इन चीजों को सुख-समृद्धि और मंगलकामना का प्रतीक मानकर अपने घर ले जाती हैं। मान्यता है कि इस प्रसाद को घर ले जाने से दांपत्य जीवन में सुख और समृद्धि आती है। यही वजह है कि दर्शन के बाद प्रसाद लेने के लिए भी महिलाओं में खास उत्साह देखने को मिलता है। यह परंपरा इस मंदिर को उज्जैन के अन्य मंदिरों से अलग पहचान देती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां आकर उन्हें आस्था और विश्वास की खास अनुभूति होती है।
करीब 26 साल पुरानी परंपरा और मंदिर का इतिहास
मंदिर प्रबंधन के अनुसार यह मंदिर करीब 26 साल पहले स्थापित हुआ था। मंदिर का निर्माण वर्ष 2000 के आसपास लक्ष्मीदेवी की स्मृति में कराया गया था। मंदिर क्षिप्रा नदी के तट के पास, उन्हेल बायपास के निकट जीवनखेड़ी गांव में स्थित है। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि यह प्रदेश का एकमात्र ऐसा मंदिर है जो वर्ष में सिर्फ करवा चौथ के दिन ही खोला जाता है। इसी अनोखी परंपरा के कारण यह मंदिर हर साल करवा चौथ पर चर्चा में रहता है। उज्जैन को धार्मिक आस्था और परंपराओं की नगरी कहा जाता है। यहां नागचंद्रेश्वर मंदिर की तरह ही, जो साल में सिर्फ नाग पंचमी पर खुलता है, चौथ माता मंदिर भी अपनी एक दिन की परंपरा के लिए जाना जाता है।
करवा चौथ का महत्त्व और उज्जैन की धार्मिक परंपरा
करवा चौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्त्व रखता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। शाम को चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद व्रत खोला जाता है। उज्जैन में करवा चौथ के दिन महाकालेश्वर मंदिर में भी विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। गुरुवार तड़के महाकाल की भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। उज्जैन की धार्मिक परंपराओं में करवा चौथ का दिन महिलाओं की आस्था और परिवार की मंगलकामना से जुड़ा हुआ है। चौथ माता मंदिर का एक दिन खुलना इसी आस्था की एक अनोखी मिसाल है, जहां सालभर की प्रतीक्षा के बाद एक ही दिन में हजारों श्रद्धालु दर्शन कर पाते हैं।
आगे क्या: अगले करवा चौथ पर फिर खुलेंगे कपाट
परंपरा के अनुसार चौथ माता मंदिर के कपाट अब अगले करवा चौथ पर ही दर्शन के लिए खुलेंगे। इस बार दर्शन कर चुकी महिलाएं अगले साल फिर इसी दिन का इंतजार करेंगी। मंदिर प्रबंधन के अनुसार हर साल की तरह अगले करवा चौथ पर भी विशेष श्रृंगार, चुनरी अर्पण और आरती के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर करवा चौथ के दिन एक विशेष पड़ाव बन चुका है। धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी इस परंपरा का अपना महत्त्व है, क्योंकि यह उज्जैन की उन अनोखी परंपराओं में शामिल है जो साल में सिर्फ एक दिन देखने को मिलती हैं।
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