इंदौर ब्यूरो
सार: इंदौर के सुदामा नगर सेक्टर-डी में गुरुवार सुबह महापौर पुष्यमित्र भार्गव के औचक निरीक्षण के दौरान विकास कार्यों की अटकी फाइलों को लेकर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उनका गुस्सा फूट पड़ा। महापौर ने बाउंड्रीवॉल के टेंडर और वर्कऑर्डर से जुड़े मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और बिना उचित कारण लंबित सभी प्रकरणों की सूची बनाकर नगर निगम आयुक्त के समक्ष रखने तथा एमआईसी में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
सुबह के दौरे में फूटा महापौर का गुस्सा
शहर में विकास कार्यों की फाइलें दफ्तरों में अटकी हैं और जनता परेशान हो रही है। अफसर कागजों में उलझे हैं, जिसका खामियाजा सरकार की छवि को भुगतना पड़ रहा है। गुरुवार सुबह सुदामा नगर सेक्टर-डी के औचक निरीक्षण पर पहुंचे महापौर पुष्यमित्र भार्गव का अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने दो टूक कहा, “आप लोग कागज-कागज खेलते रहते हो और यहां जनता परेशान होती रहती है। आपके कारण सरकार की छवि खराब होती है।”
महापौर अपने नियमित सुबह के दौरे के दौरान स्थानीय पार्षद जीतू राठौर के साथ क्षेत्र में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान क्षेत्र में हो रहे कार्यों की स्थिति, फाइलों की गति और जनता की शिकायतों पर महापौर ने अधिकारियों से सीधे जवाब मांगे। महापौर का यह दौरा उनके नियमित सुबह के निरीक्षणों की शृंखला का हिस्सा था, जिसमें वे वार्डों में चल रहे विकास कार्यों को मौके पर जाकर देखते हैं।
ड्रेनेज लाइन में ठेकेदार की लापरवाही की शिकायतें
निरीक्षण के दौरान क्षेत्र में हो रहे ड्रेनेज लाइन के काम में ठेकेदार की लापरवाही की शिकायतें सामने आईं। ड्रेनेज जैसे बुनियादी काम में लापरवाही का सीधा असर रहवासियों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। सड़क पर पानी भरना, नाली का जाम होना और काम का अधूरा रह जाना — ये शिकायतें अक्सर वार्डों से आती हैं और इन्हीं शिकायतों को लेकर जनप्रतिनिधियों के पास लोग पहुंचते हैं। महापौर ने इस मामले में भी अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा, ताकि काम की गुणवत्ता और गति दोनों पर जवाबदेही तय हो सके।
बाउंड्रीवॉल: टेंडर हो गया, वर्कऑर्डर अटका
वहीं, ए सेक्टर के बगीचे की बाउंड्रीवॉल का टेंडर होने के बावजूद वर्कऑर्डर की फाइल लंबे समय से अटकी होने का मामला भी सामने आया। बाउंड्रीवॉल के मामले में नाराजगी जाहिर करते हुए महापौर ने मौके पर ही संबंधित फाइल और अपर आयुक्त शृंगार श्रीवास्तव सहित अधिकारियों को बुलवाकर जवाब तलब किया। महापौर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब काम होना ही नहीं था, तो उसका प्रस्ताव कैसे बन गया? टेंडर किस आधार पर हुआ और वर्कऑर्डर तक प्रक्रिया कैसे पहुंची? उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की जांच होनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि देरी के लिए जिम्मेदार कौन है।
आमतौर पर किसी भी निर्माण कार्य में प्रस्ताव, टेंडर और वर्कऑर्डर की प्रक्रिया एक क्रम में चलती है। प्रस्ताव बनने के बाद टेंडर होता है और टेंडर के बाद ठेकेदार को वर्कऑर्डर जारी किया जाता है, तभी काम जमीन पर शुरू हो पाता है। इसी क्रम में किसी भी स्तर पर फाइल अटकने से काम रुक जाता है और जनता को उसका नुकसान उठाना पड़ता है। महापौर के सवाल इसी क्रम पर केंद्रित थे कि जब प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी, तो वर्कऑर्डर के स्तर पर फाइल क्यों अटकी रही।
जांच और कार्रवाई के निर्देश
महापौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे सभी प्रकरणों की सूची तैयार की जाए, जिनकी फाइलें बिना उचित कारण लंबित हैं। इन मामलों की जांच कराकर नगर निगम आयुक्त के समक्ष रखा जाए और फिर एमआईसी में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
इस निर्देश का अर्थ यह है कि मामला केवल एक बाउंड्रीवॉल तक सीमित नहीं रहेगा। बिना उचित कारण लंबित हर प्रकरण की सूची बनेगी, हर मामले की जांच होगी और जांच के बाद जिम्मेदारी तय करके कार्रवाई की जाएगी। आयुक्त के समक्ष मामला रखने और एमआईसी में रिपोर्ट प्रस्तुत करने की प्रक्रिया से यह भी सुनिश्चित होगा कि कार्रवाई किसी एक अधिकारी के स्तर पर दबकर न रह जाए, बल्कि वह महापौर परिषद के सामने भी आए।
लेटलतीफी पर महापौर का स्पष्ट संदेश
महापौर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारियों की लेटलतीफी से आम लोगों को बार-बार परेशान होना पड़ता है। जनप्रतिनिधियों को भी रोज जनता की शिकायतें सुननी पड़ती हैं। ऐसे में छोटी-छोटी समस्याओं के लिए महापौर को मौके पर पहुंचकर फाइलें निकलवानी पड़ें, यह अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल है।
उन्होंने कमिश्नर और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों से लंबित मामलों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने को कहा। महापौर ने साफ किया कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह संदेश अधिकारियों के साथ-साथ ठेकेदारों के लिए भी है कि काम की गुणवत्ता और समयसीमा दोनों पर जवाबदेही तय होगी।
आगे क्या होगा
अब इस मामले में अगले कदम महापौर के निर्देशों के अनुसार बढ़ेंगे। पहले बिना उचित कारण लंबित प्रकरणों की सूची तैयार होगी। इसके बाद उन मामलों की जांच कराई जाएगी और जांच की रिपोर्ट नगर निगम आयुक्त के समक्ष रखी जाएगी। फिर एमआईसी में रिपोर्ट प्रस्तुत होगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सुदामा नगर के रहवासियों के लिए इसका सीधा अर्थ यह है कि बाउंड्रीवॉल के वर्कऑर्डर और ड्रेनेज लाइन के काम जैसे अटके मामलों में अब गति आने की उम्मीद है। जांच से यह भी स्पष्ट होगा कि देरी किस स्तर पर और किस कारण से हुई, ताकि भविष्य में इसी तरह की फाइलें लंबे समय तक न अटकें।
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