इंदौर ब्यूरो
सार: दिवाली पर दीये-बत्ती बेचने वाले रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को राहत देते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने स्पष्ट किया है कि हर साल की तरह इस बार भी परंपरागत स्थानों पर दुकानें लगाई जा सकेंगी। राजवाड़ा क्षेत्र में भी दुकानें लगेंगी, लेकिन दुकानदारों को निर्धारित सीमा में रहकर कारोबार करना होगा और सड़क पर अतिक्रमण कर यातायात बाधित करने की अनुमति नहीं होगी।
रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को राहत
दिवाली पर दीये-बत्ती बेचने वाले रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को राहत देते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने स्पष्ट किया है कि हर साल की तरह इस बार भी परंपरागत स्थानों पर दुकानें लगाई जा सकेंगी। दिवाली छोटे दुकानदारों के लिए साल का सबसे बड़ा त्योहारी सीजन होता है। दीये, बत्ती, झालर, पूजा सामग्री और सजावट के सामान की बिक्री से सैकड़ों परिवारों की आजीविका जुड़ी होती है। ऐसे में परंपरागत स्थानों पर दुकानें लगाने की स्पष्ट अनुमति से दुकानदारों को यह भरोसा मिलता है कि उन्हें त्योहार के मौके पर अपनी रोजी-रोटी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। महापौर की इस घोषणा से उन दुकानदारों को भी राहत मिली है जो हर साल इसी असमंजस में रहते हैं कि इस बार दुकानें कहां लगेंगी और क्या अनुमति मिलेगी।
राजवाड़ा में दुकानें, लेकिन सीमा के भीतर
राजवाड़ा क्षेत्र में भी दुकानें लगेंगी, लेकिन दुकानदारों को निर्धारित सीमा में रहकर कारोबार करना होगा। राजवाड़ा इंदौर का सबसे पुराना और सबसे व्यस्त बाजार क्षेत्र है। दिवाली के दिनों में यहां खरीदारी के लिए आने वाले लोगों की भीड़ सबसे अधिक होती है। ऐसे में दुकानों के लिए निर्धारित सीमा का पालन करना इसलिए जरूरी है ताकि बाजार की रौनक भी बनी रहे और आवाजाही भी बाधित न हो। निर्धारित सीमा में रहकर कारोबार करने का अर्थ यह है किदुकानदार अपनी तय जगह से बाहर सामान फैलाकर सड़क या फुटपाथ पर कब्जा नहीं करेंगे। इससे बाजार में चलने-फिरने की जगह बनी रहेगी और खरीदारी करने आने वाले लोगों को भी सुविधा होगी।

अतिक्रमण पर रोक, यातायात सुचारु रखने पर जोर
सड़क पर अतिक्रमण कर यातायात बाधित करने की अनुमति नहीं होगी। त्योहार के दिनों में बाजार क्षेत्रों में वाहनों और पैदल चलने वालों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में अगर दुकानें सड़क तक फैल जाएं तो यातायात जाम हो जाता है और खरीदारी करने आने वाले लोगों के साथ-साथ स्थानीय रहवासियों को भी परेशानी होती है। महापौर ने इस बात पर जोर दिया है कि कारोबार की अनुमति का अर्थ अतिक्रमण की अनुमति नहीं है। दुकानदारों को अपनी सीमा में रहना होगा और यातायात व्यवस्था का सम्मान करना होगा।
दुकानदारों और यातायात पुलिस से सहयोग की अपील
महापौर ने दुकानदारों और यातायात पुलिस से व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग के लिए कहा है, ताकि त्योहार पर खरीदारी करने आने वाले नागरिकों को परेशानी न हो और यातायात भी सुचारु बना रहे। यह अपील इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि त्योहार की व्यवस्था केवल निगम या पुलिस के भरोसे नहीं चल सकती। दुकानदारों का सहयोग, यातायात पुलिस की व्यवस्था और नागरिकों की समझदारी — तीनों मिलकर ही बाजार को सुचारु रख सकते हैं। दुकानदारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपनी दुकानों को निर्धारित सीमा में रखें और ग्राहकों की सुविधा का ध्यान रखें। यातायात पुलिस से यह अपेक्षा है कि वह बाजार क्षेत्रों में यातायात का सुचारु संचालन सुनिश्चित करे।
त्योहार पर खरीदारी और व्यवस्था
दिवाली पर खरीदारी का उत्साह शहर के हर बाजार में देखने को मिलता है। दीये-बत्ती की दुकानें इस उत्साह का एक अहम हिस्सा हैं, क्योंकि दीयों के बिना दिवाली की रौनक अधूरी मानी जाती है। परंपरागत स्थानों पर दुकानें लगने से खरीदारों को भी सुविधा होती है, क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें दीये-बत्ती और पूजा सामग्री कहां मिलेगी। साथ ही, व्यवस्था बनी रहने से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के साथ खरीदारी करने आने वाले परिवारों को भी परेशानी नहीं होती। महापौर की घोषणा का उद्देश्य यही है कि त्योहार की रौनक भी बनी रहे और व्यवस्था भी न बिगड़े।
परंपरागत स्थानों की व्यवस्था क्यों जरूरी है
परंपरागत स्थानों पर दुकानें लगाने की व्यवस्था इसलिए भी जरूरी है क्योंकि खरीदार और दुकानदार दोनों इन्हीं स्थानों के आदी होते हैं। हर साल दिवाली के दिनों में लोग जानते हैं कि दीये-बत्ती की दुकानें कहां लगती हैं और वहीं पहुंचते हैं। अगर दुकानों की जगह हर साल बदल जाए या अनुमति को लेकर असमंजस बना रहे, तो दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित होता है और खरीदारों को भी परेशानी होती है। स्पष्ट अनुमति मिलने से दुकानदार पहले से अपनी तैयारी कर सकते हैं, सामान जुटा सकते हैं और त्योहार के दिनों में पूरी क्षमता से कारोबार कर सकते हैं। इससे बाजार की रौनक भी बढ़ती है और शहर की त्योहारी अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है।
आगे क्या होगा
अब इस घोषणा के बाद परंपरागत स्थानों पर दीये-बत्ती की दुकानें सजेंगी और दुकानदार निर्धारित सीमा में रहकर अपना कारोबार करेंगे। यातायात पुलिस के साथ समन्वय से बाजार क्षेत्रों में यातायात सुचारु रखने की व्यवस्था की जाएगी। दुकानदारों से सहयोग की अपील की गई है, ताकि त्योहार के दिनों में खरीदारी करने आने वाले नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो। दिवाली की खरीदारी के साथ-साथ शहर की व्यवस्था भी पटरी पर बनी रहे, यही इस घोषणा का मूल संदेश है।
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