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एथर का बड़ा दांव: 122 करोड़ के निवेश से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता, एंट्री-लेवल कोनार्क की लॉन्च अब वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही में

सांकेतिक चित्र: इलेक्ट्रिक स्कूटर सांकेतिक चित्र: इलेक्ट्रिक स्कूटर

डेस्क रिपोर्ट

सार: मांग उत्पादन से आगे निकल गई है, इसलिए कंपनी पहले अपनी फैक्ट्रियों की क्षमता बढ़ाएगी; सस्ते इलेक्ट्रिक स्कूटर की लॉन्च को टाल दिया गया है, लेकिन मौजूदा मॉडलों की आपूर्ति सुधारने पर जोर रहेगा।

भारत के इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में एक बड़ी खबर आई है। इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाने वाली कंपनी एथर एनर्जी ने अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग 122 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है। साथ ही कंपनी ने अपने एंट्री-लेवल यानी शुरुआती कीमत वाले इलेक्ट्रिक स्कूटर कोनार्क की लॉन्च को आगे बढ़ा दिया है। पहले इस स्कूटर को वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में लाने की योजना थी, लेकिन अब इसकी लॉन्च वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही में होगी। कंपनी का कहना है कि बाजार में मांग उत्पादन से कहीं ज्यादा है, इसलिए पहले उत्पादन की क्षमता बढ़ाना जरूरी है।

बोर्ड ने क्या फैसला किया

कंपनी के बोर्ड ने 26 अक्टूबर को हुई बैठक में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस निवेश से कंपनी के दो प्लांट की सालाना क्षमता में कुल 2.25 लाख यूनिट की बढ़ोतरी होगी। कंपनी के अनुसार, दोनों प्लांट की कुल स्थापित क्षमता अभी करीब 9.2 लाख यूनिट सालाना है, जो बढ़कर करीब 11.45 लाख यूनिट सालाना हो जाएगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कंपनी के तिमाही नतीजों में मांग में तेज उछाल दिखा है और शेयर बाजार में भी कंपनी के शेयरों में मजबूती देखी गई है। कंपनी प्रबंधन का मानना है कि इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की ओर ग्राहकों का रुझान अब अस्थायी नहीं, बल्कि संरचनात्मक बदलाव है।

दोनों प्लांट में कितनी क्षमता बढ़ेगी

सांकेतिक चित्र: इलेक्ट्रिक स्कूटर
सांकेतिक चित्र: इलेक्ट्रिक स्कूटर

निवेश का बड़ा हिस्सा दो जगहों पर लगेगा। इसमें से 58 करोड़ रुपये तक की राशि तमिलनाडु के होसुर प्लांट में लगाई जाएगी, जिससे दिसंबर तक इस प्लांट की सालाना क्षमता 4.2 लाख यूनिट से बढ़कर 4.95 लाख यूनिट हो जाएगी। बाकी 64 करोड़ रुपये महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित औरिक प्लांट में लगाए जाएंगे। यह प्लांट अभी निर्माणाधीन है और दिसंबर से चरणबद्ध तरीके से वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करेगा। इस प्लांट की शुरुआती क्षमता सालाना 5 लाख यूनिट रखी गई है, जिसे आगे बढ़ाकर 6.5 लाख यूनिट तक ले जाने की योजना है। इसके अलावा कंपनी एक नई बैटरी लाइन पर भी काम कर रही है, जिसके वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही तक शुरू होने की उम्मीद है।

मांग इतनी क्यों बढ़ गई

वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही, यानी जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान, ग्राहकों के प्री-ऑर्डर सालाना आधार पर दोगुने से भी अधिक होकर करीब 1.80 लाख यूनिट तक पहुंच गए। वहीं इस दौरान औसत मासिक उत्पादन करीब 33,000 यूनिट रहा। होसुर प्लांट इस अवधि में अपनी क्षमता के 98 प्रतिशत तक के उपयोग पर चल रहा है। कंपनी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी तरुण मेहता ने विश्लेषकों के साथ बातचीत में कहा कि हर महीने करीब 18,000 से 20,000 यूनिट की ऐसी खुदरा मांग है, जिसे कंपनी अभी पूरा नहीं कर पा रही है। यही अंतर कंपनी के फैसले की सबसे बड़ी वजह बना है। जब मांग उत्पादन से लगातार आगे निकल जाती है, तो नए मॉडल की लॉन्च से पहले उत्पादन की बाधा दूर करना समझदारी मानी जाती है।

कोनार्क की लॉन्च क्यों टली

कोनार्क कंपनी का पहला स्कूटर है जो उसके नए ईएल प्लेटफॉर्म पर बना है। इसे अगस्त में कंपनी के सामुदायिक कार्यक्रम में पेश किया गया था। इस स्कूटर का मकसद परिवारों के रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए आरामदायक और सुविधाजनक विकल्प देना है। इसमें धातु की बॉडी, एडजस्टेबल बैकरेस्ट, बिना चाबी के इस्तेमाल की सुविधा और लंबी वारंटी वाली नई बैटरी जैसी खूबियां दी गई हैं। लेकिन कंपनी का आकलन है कि अगर मौजूदा उत्पादन दबाव के बीच इस स्कूटर को जल्द लाया गया, तो न तो आपूर्ति ठीक से हो पाएगी और न ही मुनाफे का स्तर संभल पाएगा। इसलिए कंपनी ने इसकी लॉन्च को तीन तिमाही आगे बढ़ाकर वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही में कर दिया है। कंपनी का यह भी कहना है कि नया प्लेटफॉर्म लागत के लिहाज से फायदेमंद है, क्योंकि कोनार्क के वेरिएंट शुरुआती उत्पादन के बावजूद मौजूदा मॉडलों की तुलना में कुछ हजार रुपये सस्ते बन रहे हैं। उत्पादन स्थिर होने पर यह लागत लाभ और बढ़ने की उम्मीद है।

कंपनी के तिमाही नतीजे क्या कहते हैं

जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा। कंपनी का परिचालन राजस्व सालाना आधार पर करीब 63 प्रतिशत बढ़ा और कंपनी ने इस तिमाही में 1.26 करोड़ रुपये का सकारात्मक शुद्ध लाभ दर्ज किया। यह इसलिए अहम है, क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कई कंपनियां अभी मुनाफे की राह पर संघर्ष कर रही हैं। कंपनी के अनुसार, कीमतों में बढ़ोतरी, प्रीमियम वेरिएंट की हिस्सेदारी बढ़ने और उत्पादों के बेहतर मिश्रण से मार्जिन में सुधार हुआ है। हालांकि कंपनी ने यह भी स्वीकार किया है कि मार्जिन सुधार का एक हिस्सा अस्थायी कारणों से भी आया है और कच्चे माल की महंगाई अब भी चुनौती बनी हुई है। एल्युमीनियम, तांबा, प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों की कीमतों का दबाव कंपनी के सामने है, फिर भी प्रबंधन ने दिसंबर तिमाही में कीमतें न बढ़ाने का भरोसा दिया है।

कीमतों पर क्या असर पड़ेगा

कंपनी प्रबंधन ने साफ कहा है कि दिसंबर तिमाही में वह कीमतों में और बढ़ोतरी नहीं करेगी। पिछले कुछ तिमाहियों में कंपनी के वाहनों की औसत एक्स-शोरूम कीमत बढ़ी है, जिसमें कीमत बढ़ोतरी और प्रीमियम वेरिएंट की ज्यादा बिक्री दोनों का योगदान रहा है। लेकिन अब कंपनी की रणनीति कीमतें स्थिर रखते हुए उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने की है। नया प्लेटफॉर्म इसी रणनीति का अहम हिस्सा है, क्योंकि इससे बिना कीमत बढ़ाए सस्ता मॉडल लाना आसान होगा। अगर यह रणनीति सफल रहती है, तो कोनार्क के जरिए कंपनी उन ग्राहकों तक पहुंच सकेगी जो अभी तक कीमत की वजह से उसके प्रीमियम मॉडलों से दूर थे।

खरीदारों के लिए इसका क्या मतलब है

जो ग्राहक कोनार्क का इंतजार कर रहे थे, उन्हें अब थोड़ा और इंतजार करना होगा। लॉन्च टलने का मतलब यह है कि सस्ता मॉडल बाजार में आने में कुछ महीने और लगेंगे। लेकिन दूसरी ओर, जो ग्राहक कंपनी के मौजूदा मॉडल खरीदना चाहते हैं, उनके लिए यह खबर राहत भरी हो सकती है, क्योंकि उत्पादन क्षमता बढ़ने से डिलीवरी का इंतजार कम होने की उम्मीद है। अभी हर महीने हजारों यूनिट की मांग पूरी नहीं हो पा रही है, जिससे कई शहरों में ग्राहकों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। क्षमता बढ़ने के बाद यह अंतर धीरे-धीरे कम हो सकता है। इसके अलावा कीमतें स्थिर रहने से खरीदारों को अचानक महंगाई का झटका नहीं लगेगा।

भारत के इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार की तस्वीर

भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। पेट्रोल की बढ़ती कीमत, शहरों में छोटी दूरी की यात्रा की जरूरत और सरकार की प्रोत्साहन नीतियों ने इस बदलाव को तेज किया है। पहले इलेक्ट्रिक स्कूटर को लेकर ग्राहकों के मन में रेंज और चार्जिंग को लेकर शंका रहती थी, लेकिन अब बैटरी तकनीक, चार्जिंग नेटवर्क और मॉडलों की विविधता ने भरोसा बढ़ाया है। इस बाजार में अब प्रीमियम, पारिवारिक और किफायती, तीनों तरह के ग्राहकों के लिए विकल्प आ रहे हैं। कंपनियों के बीच मुकाबला अब सिर्फ कीमत का नहीं, बल्कि बैटरी, सॉफ्टवेयर, कनेक्टेड फीचर और सर्विस नेटवर्क का भी है। एथर का फैसला इसी मुकाबले में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

आगे क्या होगा

आने वाले महीनों में सबकी नजर दिसंबर से शुरू होने वाले क्षमता विस्तार पर रहेगी। होसुर प्लांट की क्षमता बढ़ने और औरिक प्लांट में चरणबद्ध उत्पादन शुरू होने से कंपनी की कुल आपूर्ति में बड़ा इजाफा होगा। इसके बाद वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही में कोनार्क की लॉन्च कंपनी के लिए अगला बड़ा पड़ाव होगी। अगर कोनार्क को ग्राहकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है, तो कंपनी का दायरा प्रीमियम ग्राहकों से आगे बढ़कर बड़े परिवारिक और किफायती वर्ग तक फैल सकता है। साथ ही नई बैटरी लाइन के शुरू होने से लागत और रेंज के मोर्चे पर भी कंपनी को फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि कच्चे माल की कीमतें, आपूर्ति श्रृंखला की रुकावटें और प्रतिस्पर्धा अब भी चुनौतियां बनी रहेंगी।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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