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भोपाल में भाजपा कोर ग्रुप की बैठक: मंत्रियों को मिला नया टास्क, केंद्र के हर मंत्रालय से जुड़ेगा मध्य प्रदेश का एक सांसद

सांकेतिक चित्र: भारतीय जनता पार्टी और शिव सेना के ध्वज सांकेतिक चित्र: भारतीय जनता पार्टी और शिव सेना के ध्वज

भोपाल ब्यूरो

मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कोर ग्रुप की बैठक सोमवार को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर हुई। इस बैठक में केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए एक नई समन्वय व्यवस्था बनाने पर सहमति बनी। इसके तहत राज्य सरकार के मंत्रियों के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा, और केंद्र सरकार के प्रत्येक मंत्रालय के साथ मध्य प्रदेश के एक-एक सांसद को जोड़ा जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश प्रभारी बिप्लव देव और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए।

कोर ग्रुप की बैठक में क्या-क्या हुआ

बैठक में संगठन और सरकार के कामकाज से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। राज्यसभा की रिक्त सीट के लिए उम्मीदवारों के नामों का पैनल तैयार करने, केंद्र सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने की रणनीति, सरकार के तीन साल के कामकाज को जनता तक पहुंचाने और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर मंथन हुआ। बैठक में यह रेखांकित किया गया कि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल से योजनाओं के क्रियान्वयन की गति बढ़ेगी और प्रदेश को केंद्रीय योजनाओं का अधिकतम लाभ मिल सकेगा।

मंत्रियों के नेतृत्व में बनेगी विशेष टीम

बैठक का एक प्रमुख निर्णय राज्य सरकार के मंत्रियों के नेतृत्व में विशेष टीम के गठन का रहा। यह टीम केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के काम को गति देगी। टीम का लक्ष्य यह होगा कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित न रहे और योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचे। मंत्रियों की यह टीम अपने-अपने विभागों से जुड़ी केंद्रीय योजनाओं की निगरानी भी करेगी, ताकि जहां अड़चन हो, वहां समय रहते समाधान किया जा सके।

हर केंद्रीय मंत्रालय से जुड़ेगा मध्य प्रदेश का एक सांसद

बैठक में तय हुआ कि केंद्र सरकार के प्रत्येक मंत्रालय के साथ मध्य प्रदेश के एक-एक सांसद को जोड़ा जाएगा। सांसद अपने से जुड़े मंत्रालय की योजनाओं, बजट और प्रगति पर नजर रखेंगे और राज्य सरकार के मंत्रियों के साथ समन्वय करेंगे। इस व्यवस्था को इस रूप में एक नया प्रयोग बताया जा रहा है, जिसमें जनप्रतिनिधियों की भूमिका केवल अपने संसदीय क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे केंद्र की योजनाओं को प्रदेश में उतारने की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। बैठक में कहा गया कि इस व्यवस्था से केंद्र से मिलने वाली राशि और योजनाओं का प्रदेश को अधिक लाभ मिलेगा।

मंत्री, सांसद और अधिकारी का त्रिस्तरीय समन्वय

इस नई व्यवस्था की खास बात मंत्री, सांसद और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच त्रिस्तरीय समन्वय होगा। राज्य के मंत्री, सांसद और संबंधित विभागों के अधिकारी एक नेटवर्क की तरह काम करेंगे, ताकि किसी योजना के क्रियान्वयन में देरी न हो। यदि किसी जिले में योजना के क्रियान्वयन में दिक्कत आती है, तो यह समन्वय व्यवस्था उसे जल्दी सुलझाने में मदद करेगी। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना ही अंतिम लक्ष्य है, और इसके लिए संगठन और सरकार को एक साथ प्रभावी ढंग से काम करना होगा।

तीन साल के काम का सार्वजनिक पोर्टल

बैठक में सरकार के तीन साल के कार्यकाल की उपलब्धियों को जनता के बीच ले जाने की कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। इसके तहत एक सार्वजनिक पोर्टल पर सरकार के कामकाज के साथ-साथ मंत्रियों, विधायकों और सांसदों के कार्यों का ब्योरा भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस पोर्टल के जरिए जनता सीधे देख सकेगी कि जनप्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों में क्या काम किए हैं। पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में इसे एक अहम कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे सरकार के काम और जनप्रतिनिधियों के प्रयास जनता के सामने सीधे पहुंचेंगे।

राज्यसभा सीट के लिए चार से पांच नामों का पैनल

बैठक में राज्यसभा की एक रिक्त सीट के लिए भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे से यह सीट रिक्त हुई है, जिस पर 12 नवंबर को उपचुनाव होना है। बैठक में सहमति बनी कि चार से पांच नामों का पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जाएगा, और उम्मीदवार के अंतिम चयन का फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा। पैनल में मध्य प्रदेश के नेताओं के साथ-साथ प्रदेश के बाहर के नेताओं के नाम भी शामिल होने की चर्चा है। हालांकि, पार्टी की ओर से किसी नाम की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, इसलिए संभावित नामों को लेकर अटकलों से बचना जरूरी है।

आगामी कार्यक्रमों और अभियानों पर भी चर्चा

बैठक में आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी विचार हुआ। प्रदेश में चलाए जा रहे लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ अभियान के तहत भोपाल, इंदौर और जबलपुर में बड़ी रैलियों के आयोजन पर चर्चा हुई। इसके अलावा समान नागरिक संहिता से जुड़े विषयों पर भी मंथन हुआ। बैठक में 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर राज्यभर में होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी चर्चा की गई। इन कार्यक्रमों के जरिए संगठन की पहुंच को और मजबूत करने की रणनीति बनाई गई।

आगे क्या होगा

बैठक के फैसलों के बाद अब इस समन्वय व्यवस्था को अमल में उतारने की प्रक्रिया शुरू होगी। मंत्रियों की विशेष टीम का गठन और सांसदों को मंत्रालयों से जोड़ने का काम आगे बढ़ेगा, जबकि सार्वजनिक पोर्टल की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी। इस व्यवस्था से यह उम्मीद की जा रही है कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ प्रदेश की जनता तक अधिक से अधिक पहुंच सकेगा। इस समन्वय व्यवस्था और बैठक के फैसलों पर विपक्ष की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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