नई दिल्ली ब्यूरो
ब्राज़ील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा की ऐतिहासिक जीत पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को अपने संदेश में लूला की पुनर्निर्वाचन जीत को उल्लेखनीय बताया और कहा कि वह भारत-ब्राज़ील रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री के इस संदेश के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ब्राज़ील दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा देश है और भारत के साथ उसके संबंध दशकों पुराने हैं। ऐसे में ब्राज़ील के राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा केवल ब्राज़ील की अंदरूनी राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर वैश्विक मंच पर भी देखा जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बधाई संदेश में कहा कि लूला को उनकी उल्लेखनीय पुनर्निर्वाचन जीत पर हार्दिक बधाई। उन्होंने कहा कि वह उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हैं, ताकि भारत और ब्राज़ील के बीच बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा तथा विस्तृत किया जा सके। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दोनों देश मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मज़बूत करते रहेंगे, विकासशील देशों की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएंगे और एक अधिक समावेशी, न्यायसंगत तथा टिकाऊ दुनिया के लिए काम करेंगे। प्रधानमंत्री के संदेश में भारत और ब्राज़ील के बीच भरोसे और साझा मूल्यों की झलक साफ दिखाई दी। यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब दुनिया के कई देश एक-दूसरे के साथ सहयोग के नए रास्ते तलाश रहे हैं और विकासशील देशों की आवाज़ को वैश्विक मंच पर और मज़बूती से उठाने की कोशिश हो रही है।
कैसा रहा ब्राज़ील का राष्ट्रपति चुनाव
ब्राज़ील में राष्ट्रपति चुनाव का दूसरा दौर रविवार को हुआ था। इसमें लूला ने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया। मतगणना के लगभग पूरे आंकड़ों के अनुसार लूला को करीब 51.8 प्रतिशत वैध मत मिले, जबकि बोल्सोनारो को करीब 48.2 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। दोनों के बीच मतों का अंतर करीब 44 लाख के आसपास रहा। यह चुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि पहले दौर में बोल्सोनारो आगे चल रहे थे, लेकिन दूसरे दौर में लूला ने वापसी करते हुए बढ़त बना ली और जीत दर्ज की। ब्राज़ील की चुनाव व्यवस्था के अनुसार दूसरे दौर में वही उम्मीदवार जीतता है, जिसे आधे से अधिक वैध मत मिलते हैं। लूला की यह जीत ब्राज़ील के लोकतंत्र की मज़बूती का भी संकेत मानी जा रही है, क्योंकि देश में मतदाताओं की बड़ी संख्या ने इस चुनाव में भाग लिया और नतीजा शांतिपूर्ण ढंग से सामने आया। दुनिया भर के कई नेताओं ने भी लूला की जीत पर उन्हें बधाई दी है।
कौन हैं लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा
लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ब्राज़ील की राजनीति का एक बड़ा नाम हैं। वह 80 वर्ष के हैं और वर्कर्स पार्टी के नेता हैं। लूला इससे पहले 2003 से 2010 तक ब्राज़ील के राष्ट्रपति रह चुके हैं। उस दौरान उनकी सरकार ने गरीबी कम करने और सामाजिक कल्याण की योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया था। इसके बाद वह 2023 में फिर से राष्ट्रपति बने थे। अब चौथी बार राष्ट्रपति चुने जाने के साथ वह ब्राज़ील के पहले ऐसे राष्ट्रपति बन गए हैं, जिन्होंने चार बार राष्ट्रपति पद का चुनाव जीता है। उनका राजनीतिक सफर लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वह मज़दूर आंदोलन से राजनीति में आए और धीरे-धीरे देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने लगे। उनके समर्थक उन्हें गरीबों और कामगार वर्ग की आवाज़ मानते हैं, जबकि उनके आलोचक उनकी नीतियों पर सवाल भी उठाते रहे हैं। लेकिन चुनावी नतीजे ने यह साफ कर दिया है कि ब्राज़ील के मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग आज भी उन पर भरोसा करता है।
भारत और ब्राज़ील की साझेदारी क्यों अहम है
भारत और ब्राज़ील के बीच संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा प्राप्त है। दोनों देश लोकतंत्र, विकास और बहुपक्षीय सहयोग के मूल्यों में विश्वास रखते हैं। दोनों देश ब्रिक्स समूह के सदस्य हैं, जिसमें दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। इसके अलावा दोनों देश संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे के साथ सहयोग करते रहे हैं। व्यापार, कृषि, रक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ब्राज़ील कृषि और खनिज संसाधनों के मामले में समृद्ध देश है, जबकि भारत सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मा और डिजिटल सेवाओं में मज़बूत स्थिति रखता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग से दोनों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिल सकता है। प्रधानमंत्री मोदी के बधाई संदेश में भी यही संकेत है कि भारत ब्राज़ील के साथ अपने संबंधों को केवल औपचारिक स्तर पर नहीं, बल्कि व्यावहारिक सहयोग के स्तर पर और आगे ले जाना चाहता है।
ब्रिक्स और वैश्विक मंच का संदर्भ
लूला की जीत ऐसे समय में हुई है, जब भारत की राजधानी नई दिल्ली में ही ब्रिक्स संसदीय मंच का आयोजन हो रहा है। ब्रिक्स समूह में भारत और ब्राज़ील दोनों शामिल हैं। इस समूह का उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाना और वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका को मज़बूत करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं का भी उल्लेख किया है। ग्लोबल साउथ से आशय दुनिया के उन विकासशील देशों से है, जो आर्थिक विकास, गरीबी दूर करने, जलवायु परिवर्तन से निपटने और तकनीक तक पहुंच जैसे मुद्दों पर साझा चिंताएं रखते हैं। भारत और ब्राज़ील दोनों ही ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मज़बूती से उठाते रहे हैं। ऐसे में लूला की जीत के बाद दोनों देशों के बीच इस दिशा में सहयोग और बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।
आगे क्या होगा
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार लूला 5 जनवरी 2027 को चार वर्ष के कार्यकाल के लिए शपथ लेंगे। इसके बाद उनकी नई सरकार के सामने कई चुनौतियां होंगी। ब्राज़ील की अर्थव्यवस्था को गति देना, महंगाई और बेरोज़गारी से निपटना, पर्यावरण की रक्षा करना और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भरोसा बनाए रखना, ये सभी काम नई सरकार के सामने होंगे। विदेश नीति के मोर्चे पर भी लूला सरकार के सामने भारत सहित दुनिया के प्रमुख देशों के साथ संबंधों को संतुलित रखने की चुनौती होगी। भारत के लिहाज़ से देखें तो लूला की जीत के बाद दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संवाद और सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं। व्यापार और निवेश के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच नई पहल की उम्मीद की जा रही है। हालांकि, इन सबका स्वरूप आने वाले महीनों में धीरे-धीरे साफ होगा।
दुनिया की नज़र ब्राज़ील पर क्यों
ब्राज़ील दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और अमेज़न वर्षावन का एक बड़ा हिस्सा भी इसी देश में है। इसलिए ब्राज़ील की राजनीति का असर जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण की वैश्विक बहस पर भी पड़ता है। इसके अलावा ब्राज़ील कृषि उत्पादों का बड़ा निर्यातक है, इसलिए वहां की नीतियों का असर वैश्विक खाद्य बाज़ार पर भी देखा जाता है। यही कारण है कि ब्राज़ील के राष्ट्रपति चुनाव पर दुनिया भर की नज़र रहती है। लूला की जीत के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह देखना चाहेगा कि उनकी सरकार आर्थिक सुधार, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण के मोर्चे पर क्या कदम उठाती है। भारत के लिए भी ब्राज़ील एक महत्वपूर्ण साझेदार है, क्योंकि दोनों देश विकासशील दुनिया की आवाज़ को वैश्विक मंच पर उठाने में एक-दूसरे के सहयोगी रहे हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, ब्राज़ील के राष्ट्रपति चुनाव में लूला की चौथी जीत एक ऐतिहासिक घटना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बधाई ने भारत और ब्राज़ील के बीच संबंधों की गर्मजोशी को फिर से सामने ला दिया है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की बात से यह संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में भारत और ब्राज़ील के बीच सहयोग के नए अध्याय खुल सकते हैं। अब सबकी नज़र इस बात पर होगी कि लूला सरकार अपने नए कार्यकाल में किन नीतियों को प्राथमिकता देती है और भारत के साथ सहयोग को किस तरह आगे बढ़ाती है।
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