छतरपुर ब्यूरो।
“सफलता मिलने के बाद सबसे पहले यह सोचना चाहिए कि अब हमें क्या नहीं करना चाहिए। सफलता को बनाए रखने के लिए अनुशासन भी उतना ही ज़रूरी है।”
— पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
बागेश्वर सरकार का यह संदेश सफलता के बाद की सबसे बड़ी चुनौती पर है — उसे संभाले रखना। शास्त्री जी कहते हैं कि लक्ष्य पाने के बाद अक्सर मन नई योजनाओं की ओर भागने लगता है, लेकिन उससे पहले यह ठहरकर सोचना ज़रूरी है कि कौन से कदम नहीं उठाने हैं। जल्दबाजी के फैसले, गलत संगति और पुराने अनुभवों को भुला देना — यही तीन बातें सफलता को कमज़ोर करती हैं।
सफलता मिलते ही अहंकार से बचना भी उतना ही जरूरी है। जो आदतें — मेहनत, समय का सम्मान, सकारात्मक सोच और सही लोगों की संगति — व्यक्ति को सफलता तक पहुंचाती हैं, उन्हें कभी छोड़ना नहीं चाहिए। संस्कार और नैतिकता बनाए रखने से समाज में प्रतिष्ठा बनी रहती है, और यही प्रतिष्ठा सफलता को स्थायी बनाती है।
फोटो: फाइल फोटो
सुविचार स्रोत: jeevanjali.com, 6 मार्च 2026
