सीहोर ब्यूरो। सीहोर जिले के ग्राम कोसमी में वन विभाग की कार्रवाई के खिलाफ केंद्रीय मंत्री और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान धरने पर बैठ गए हैं। रविवार शाम कोसमी पहुंचे शिवराज ने प्रभावित परिवारों के बीच बैठकर प्रशासन और वन विभाग की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देकर जिताया, आज उन्हीं लोगों के घरों पर बुलडोजर चल रहा है।
शिवराज ने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि उनकी पीड़ा मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने मौके से ही मुख्य सचिव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से फोन पर बात की। परिवारों ने चेतावनी दी है कि बुधवार (आज) तक न्याय न मिला तो गुरुवार से भोपाल में धरना दिया जाएगा।
9 झोपड़ियां ढही, फसल रौंदी, कुआं पाटा
सूत्रों के अनुसार, वन विभाग ने रविवार को कोसमी के जंगल क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। इस दौरान करीब 9 झोपड़ियों को ढहा दिया गया, खड़ी फसल रौंद दी गई और एक कुएं को पाट दिया गया। कार्रवाई में करीब 12 हेक्टेयर क्षेत्र को खाली कराया गया बताया जा रहा है। लंबे समय से इस जमीन पर काबिज परिवारों का कहना है कि उन्हें बिना समुचित पुनर्वास के बेदखल किया जा रहा है।
घटना की जानकारी मिलते ही रविवार शाम शिवराज सिंह चौहान कोसमी पहुंचे और वन विभाग के डिपो परिसर में धरने पर बैठ गए। सोमवार को उनके बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान भी प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे।
‘अन्याय की सारी हदें पार’
धरने पर बैठे शिवराज ने कहा, “जिन लोगों ने भाजपा को वोट देकर जिताया, आज उन्हीं पर कार्रवाई हो रही है — यह अन्याय की सारी हदें पार करना है।” उन्होंने सवाल उठाया कि दशकों से जमीन पर काबिज गरीब परिवारों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई क्यों की जा रही है।
शिवराज ने कहा कि वे इस मामले को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाएंगे और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाकर ही रहेंगे। उन्होंने प्रशासन से कार्रवाई तुरंत रोकने की मांग की।
वन विभाग का पक्ष: ‘कार्रवाई नियमानुसार’
वहीं, वन विभाग ने कार्रवाई को नियमानुसार बताया है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह क्षेत्र 2021 के 187 हेक्टेयर वृक्षारोपण का हिस्सा है, जिसमें 2022 में 12 परिवारों ने करीब 32 हेक्टेयर पर अतिक्रमण कर लिया था। अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमणकारियों को 2025 में दो बार नोटिस भी जारी किए गए थे।
वन मंडलाधिकारी ने कार्रवाई को नियमित और विधिसम्मत बताते हुए कहा कि वृक्षारोपण क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त कराना विभाग की जिम्मेदारी है।
आज आखिरी दिन, कल से भोपाल धरने की चेतावनी
प्रभावित परिवारों ने ऐलान किया है कि अगर बुधवार तक उन्हें न्याय नहीं मिला और कार्रवाई पर रोक नहीं लगी, तो गुरुवार से भोपाल में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। परिवारों का कहना है कि जब तक उनके पुनर्वास की ठोस व्यवस्था नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगे।
इस मामले ने प्रदेश की सियासत में भी हलचल मचा दी है। केंद्रीय मंत्री का खुद धरने पर बैठना प्रशासन के लिए असहज स्थिति बन गया है, वहीं वन विभाग अपने रुख पर कायम है। अब सबकी नजरें आज के घटनाक्रम पर टिकी हैं — देखना होगा कि सरकार इस गतिरोध को कैसे सुलझाती है।
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