डॉ. वाकणकर ने पुरातत्व को बनाया जन आंदोलन : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने पुरातत्व को जन आंदोलन का रूप दिया। उनके प्रयासों से उज्जैन सहित पूरे मध्यप्रदेश में लोगों ने अपने परिवेश को पुरातात्विक दृष्टि से देखना शुरू किया। डॉ. वाकणकर का योगदान भारतीय पुरातत्व के इतिहास में अविस्मरणीय है।


मुख्यमंत्री शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित 19वें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान समारोह एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि डॉ. वाकणकर के परिश्रम से कालगणना केंद्र डोंगला की खोज हुई। पृथ्वी की घूर्णन धुरी में परिवर्तन के कारण उज्जैन का शून्य देशांतर और कर्क रेखा का मिलन डोंगला में स्थानांतरित हुआ, जिसे उन्होंने वैज्ञानिक अध्ययन से प्रमाणित किया। डॉ. वाकणकर ने शिलाओं और गुफाओं में छिपे साक्ष्यों के माध्यम से लिखित इतिहास से भी प्राचीन भारतीय सभ्यता को विश्व के सामने रखा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पद्मश्री से सम्मानित डॉ. प्रो. यशोधर मठपाल को शॉल-श्रीफल, भू-वराह की प्रतिकृति एवं 2 लाख रुपये का चेक भेंट कर वर्ष 2022-23 का डॉ. वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया। डॉ. मठपाल ने देश के विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों में 400 से अधिक प्राचीन गुफाओं और शैलचित्र स्थलों की खोज कर महत्वपूर्ण योगदान दिया है।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने “20वीं सदी में मध्यप्रदेश में स्वाधीनता आंदोलन 1920-1947” पुस्तक का विमोचन किया तथा पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालयों पर केंद्रित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। उन्होंने कुम्हार के चाक पर स्वयं शिवलिंग की प्रतिकृति बनाकर भारतीय कला और शिल्प परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि भीमबेटका के शैलचित्र, जिनका अध्ययन डॉ. वाकणकर ने 1957 में किया, आज विश्व धरोहर के रूप में भारत की पहचान बन चुके हैं। उन्होंने भारत ही नहीं, बल्कि यूरोप और अमेरिका में भी हजारों शैलचित्रों की खोज और अध्ययन किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार उज्जैन में 14 जनवरी से महाकाल महोत्सव का आयोजन करेगी और डॉ. वाकणकर की स्मृतियों से जुड़े संग्रहालय को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित किया जा रहा है। उनके सम्मान में रातापानी अभयारण्य का नाम डॉ. विष्णु वाकणकर के नाम पर रखा गया है।
कार्यक्रम में पर्यटन सचिव टी. इलैयाराजा, आयुक्त पुरातत्व उर्मिला शुक्ला सहित देशभर के विद्वान और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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