अनुष्ठ चौहान की रिपोर्ट

इंदौर। राम से बड़ा रामजी का नाम कहा गया है। रामजी की भक्ति के बिना दुनिया की बड़ी से बड़ी दौलत भी बेकार है। अधर्म और अनीति से अर्जित धन-संपत्ति फलीभूत नहीं होती। हम सब मोह की ऐसी चादर ओढ़े हुए हैं, जो हमें अपने लक्ष्य और सदकर्मों से विमुख बनाए हुए है। यह चादर जब तक नहीं हटेगी, विषय वासनाओं का कचरा भी नहीं हटेगा। रामकथा भारतीय संस्कृति का स्वर्णिम और अनुपम अध्याय है जो हजारों वर्षों से समाज को चैतन्य एवं ऊर्जावान बना रहा है।
बर्फानी धाम के पीछे स्थित गणेश नगर में माता केशरबाई रघुवंशी धर्मशाला परिसर के शिव-हनुमान मंदिर की साक्षी में चल रही रामकथा में शुक्रवार को प्रख्यात मानस मर्मज्ञ पं. मनोज भार्गव ने रावण वध एवं रामराज्याभिषेक प्रसंगों की व्याख्या के दौरान उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। प्रारंभ में आयोजन समिति की ओर से तुलसीराम-सविता रघुवंशी, संयोजक रेवतसिंह रघुवंशी एवं शताक्षी रघुवंशी के साथ उदयसिंह चौहान, वीरसिंह चौहान, गोपालकृष्ण भार्गव, ओमप्रकाश शर्मा, राहुल राठौर, प्रमोद पाटील, सहित अनेक विशिष्टजनों ने व्यास पीठ एवं रामचरितमानस का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी आरके शुक्ला, मोहन सिंह रघुवंशी, गजेन्द्र सिंह चंदेल, सुरेन्द्र पटेल, केपी सिंह, महेश अग्रवाल, नारायण सिंह रघुवंशी, राजेंद्र सिंह रघुवंशी सहित अनेक भक्तों ने की। यज्ञ-हवन के साथ पूर्णाहुति के पश्चात प्रसाद वितरण हुआ।
पं. भार्गव ने कहा कि राम कथा भारतीय सनातन समाज की अनमोल धरोहर है जो युगों-युगों से हमारा मार्गदर्शन करती आ रही है। यह वह पवित्र गंगा है जिसमें भले ही स्नान न भी करें, केवल आचमन भर ही कर लें तो मानव स्वयं को महामानव बनाने की दिशा में अग्रसर हो सकता है। राम जैसा दिव्य और भव्य चरित्र दुनिया में कहीं और नहीं मिल सकता। यह भारत भूमि का ही पुण्य प्रताप है कि यहाँ रघुकुल जैसे खानदान, राम जैसे राजा, भरत जैसे भाई और सीता जैसी मातृशक्ति ने अवतरण लिया है। राम कथा का प्रत्येक पात्र और प्रसंग हमें सदकर्मों की प्रेरणा देता है।
