दिल्ली ब्यूरो। दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित आर्थिक मंचों में से एक, ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम, आज से नई दिल्ली में शुरू हो रहा है। 13 से 15 अक्टूबर तक चलने वाले इस आठवें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधन करेंगे। यह पहला मौका है, जब यह फोरम भारत में आयोजित हो रहा है। तीन दिनों तक 500 से ज्यादा वैश्विक नेता, कारोबारी दिग्गज और नीति-निर्माता दुनिया की अर्थव्यवस्था की दिशा पर मंथन करेंगे।
पहली बार भारत में
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम बीते पांच वर्षों से सिंगापुर में होता आ रहा था। इस बार पहली बार यह नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है। फोरम का आधिकारिक विषय है — ‘ए वर्ल्ड इन प्ले: डिफाइनिंग द न्यू लीवर्स ऑफ पावर’, यानी बदलती दुनिया में सत्ता के नए आयाम। इस मौके पर ब्लूमबर्ग भारत में अपनी उपस्थिति के 30 वर्ष भी पूरे कर रहा है।
“आज भारत अपनी यात्रा के निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। भारत अब सिर्फ निवेश का गंतव्य नहीं, बल्कि वैश्विक भविष्य को आकार देने वाला विश्वसनीय साझेदार है। विकसित भारत के संकल्प के साथ हम दुनिया के सबसे भरोसेमंद विकास इंजनों में से एक बनने की दिशा में काम कर रहे हैं।” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
कौन-कौन से दिग्गज होंगे शामिल
फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भारतीय सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री भी शामिल होंगे — स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी, रेल और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह।
वैश्विक नेताओं में ब्लूमबर्ग एलपी और ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रॉपीज के संस्थापक माइकल आर. ब्लूमबर्ग, पूर्व इतालवी प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी, अमेरिका की पूर्व वाणिज्य सचिव जीना रेमोंडो, सिस्को के सीईओ चक रॉबिंस, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और ब्लैकस्टोन के अध्यक्ष जोनाथन ग्रे जैसे दिग्गज शामिल होंगे।

इन मुद्दों पर बनेगा रोडमैप
फोरम में व्यापार, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, तकनीक, पूंजी प्रवाह, भुगतान व्यवस्था और सप्लाई चेन जैसे विषयों पर चर्चा होगी। केंद्रीय बैंक के गवर्नर, फॉर्च्यून 100 कंपनियों के सीईओ, संप्रभु निवेशक और प्रौद्योगिकी संस्थापक भी इस मंच पर जुटेंगे।
माइकल ब्लूमबर्ग ने कहा है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जो इसे इस फोरम के आयोजन के लिए उपयुक्त मेजबान बनाता है।
भारत के लिए क्यों अहम
बदलते व्यापार समीकरणों और बहुध्रुवीय दुनिया के दौर में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में वैश्विक आर्थिक संवाद का यह मंच नई दिल्ली में होना भारत की बढ़ती आर्थिक हैसियत का प्रतीक माना जा रहा है। फोरम से निकलने वाले निष्कर्ष और रोडमैप का असर आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यापार नीतियों पर देखने को मिल सकता है।
फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स (PMO India, GODL-India)
