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‘एक कचौड़ी, दो समोसा… इन मर्दों का क्या भरोसा’ — शिवराज ने पूछा, बेटियों को ये नारा लगाने की नौबत क्यों आई?

शिवराज सिंह चौहान

भोपाल ब्यूरो। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को भोपाल और सांची के कार्यक्रमों में शामिल हुए। भोपाल में सेज यूनिवर्सिटी में श्रीराम फाइनेंस के ‘नवगति’ कार्यक्रम में उन्होंने छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति की राशि वितरित की और उनसे खुलकर संवाद किया। इसके बाद वह अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा के सांची पहुंचे, जहां मधुमेह पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों के साथ बीमारी की बढ़ती चुनौती पर चर्चा हुई।

बेटियों की सुरक्षा पर आत्ममंथन की अपील

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाया और सोशल मीडिया पर चर्चित नारे ‘एक कचौड़ी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह सोचना होगा कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आई कि बेटियों को पुरुषों पर भरोसे को लेकर सवाल उठाने वाला नारा लिखना और बोलना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि यह नारा कभी सार्थक और सफल नहीं होना चाहिए और यह केवल बेटियों का नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता और आत्ममंथन का विषय है। बहन-बेटियों का मान-सम्मान और उनकी सुरक्षा केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।

सेज यूनिवर्सिटी में छात्रवृत्ति वितरण

भोपाल स्थित सेज यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘नवगति’ कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति की राशि सौंपी। इस दौरान उन्होंने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कार और समाज के प्रति जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी और शिक्षक मौजूद रहे।

सांची में मधुमेह पर राष्ट्रीय सम्मेलन

इसके बाद शिवराज सिंह चौहान सांची पहुंचे, जहां रिसर्च सोसायटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया के 11वें वार्षिक सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मेलन में मधुमेह की तेजी से बढ़ती चुनौती, इसके उपचार में हो रही प्रगति, नई चिकित्सा तकनीकों और शोध के क्षेत्र में सामने आ रही संभावनाओं पर विशेषज्ञों के साथ विस्तार से चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि मधुमेह आज किसी व्यक्ति विशेष की बीमारी नहीं, बल्कि एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। इसके प्रभावी उपचार के साथ-साथ रोकथाम, जागरूकता और निरंतर शोध पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के बेहतर समन्वय से इस बीमारी के खिलाफ प्रभावी रणनीति तैयार की जा सकती है।

फोटो: कृषि मंत्रालय, भारत सरकार (विकिमीडिया कॉमन्स)

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