कृषि वर्ष-2026 में “समृद्ध किसान–समृद्ध प्रदेश” का लक्ष्य साकार करें : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

तीन साल का लक्ष्य तय कर संचालित हों गतिविधियां

कृषि में अनुसंधान, नवाचार और डिजिटल व्यवस्था से वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर

इंदौर | 03 जनवरी 2026
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है और इस अवसर का उपयोग करते हुए किसानों की आय में वृद्धि, रोजगार सृजन और कृषि क्षेत्र को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विविध जलवायु, पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं और बेहतर सड़क नेटवर्क का लाभ उठाकर “समृद्ध किसान–समृद्ध प्रदेश” के लक्ष्य को साकार किया जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में कृषि वर्ष-2026 के अंतर्गत कृषि एवं इससे जुड़े सहायक विभागों द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई।

तीन वर्षों का लक्ष्य तय कर हों गतिविधियां

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि वर्ष-2026 के अंतर्गत आरंभ की जाने वाली सभी गतिविधियां तीन साल का लक्ष्य निर्धारित कर संचालित की जाएं। किसानों की आय में वृद्धि और रोजगार सृजन को केंद्र में रखते हुए कृषि यंत्रीकरण, क्षमता विकास, प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, उद्यानिकी विस्तार और एफपीओ निर्माण को प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों को सस्ती ब्याज दरों पर ऋण, माइक्रो इरीगेशन, बेहतर बाजार नेटवर्क, उत्पादों का वाजिब मूल्य, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाए। साथ ही जलवायु अनुकूल कृषि प्रबंधन, सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, श्रीअन्न उत्पादन, जैव विविधता संरक्षण, परंपरागत कृषि ज्ञान, प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और डिजिटल व्यवस्था को मजबूत कर प्रदेश के कृषि उत्पादों की राष्ट्रीय और वैश्विक उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।

उन्नत राज्यों और देशों का भ्रमण कराएं किसान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को अन्य राज्यों में हो रहे सफल कृषि नवाचारों से रू-ब-रू कराया जाए। इसके साथ ही किसानों को इजराइल और ब्राजील जैसे कृषि नवाचार के अग्रणी देशों की यात्रा भी कराई जाए।
उन्होंने कहा कि किसान कल्याण, सहकारिता, पशुपालन एवं डेयरी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, मत्स्य और सिंचाई विभाग परस्पर समन्वय से कार्य करें।

फूलों की खेती को मिले बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भोपाल में आयोजित होने वाले गुलाब महोत्सव को अब पुष्प महोत्सव के रूप में आयोजित किया जाए, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों में उत्पादित फूलों को शामिल किया जाए। साथ ही प्रदेश के सभी जिलों में फूलों की खेती को प्रोत्साहित किया जाए।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2028 में भोपाल में इंटरनेशनल रोज़ कॉम्पिटीशन प्रस्तावित है और सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन जिले में 100 एकड़ क्षेत्र में फूलों की खेती को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने पराली निष्पादन, एफपीओ को दुग्ध उत्पादन से जोड़ने और सहकारिता के माध्यम से कृषि स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए।

कृषि वर्ष-2026 : माहवार प्रमुख कार्यक्रम

बैठक में जनवरी से नवम्बर 2026 तक आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन, कृषि मेले, महोत्सव, वर्कशॉप, बायर-सेलर मीट, फूड फेस्टिवल और अंतरराष्ट्रीय भ्रमण कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई।
इनमें सोया, धान, आम, गन्ना, सब्जी, दुग्ध, मत्स्य, फूल, प्राकृतिक खेती, खाद्य प्रसंस्करण, एफपीओ, सहकारिता और डिजिटल कृषि से जुड़े दर्जनों आयोजन प्रस्तावित हैं।

मंडी आधुनिकीकरण से बढ़ेगी किसानों की आय

बैठक में बताया गया कि मंडी आधुनिकीकरण के तहत वर्ष 2025-26 में 20, वर्ष 2026-27 में 19 और वर्ष 2027-28 में 42 मंडियों को e-NAM से जोड़ा जाएगा। इससे साफ, ग्रेडेड और पैक्ड उपज के माध्यम से प्रदेश के कृषि उत्पादों की राष्ट्रीय बाजारों में भागीदारी बढ़ेगी, किसानों को बेहतर और प्रतिस्पर्धी मूल्य मिलेंगे तथा आय में वृद्धि होगी।

बैठक में ये रहे उपस्थित

समीक्षा बैठक में सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, मुख्य सचिव अनुराग जैन, सहित अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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