2 अक्टूबर — दो महापुरुषों की जयंती
2 अक्टूबर का दिन भारतीय इतिहास में दो महापुरुषों की जयंती का दिन है। आज महात्मा गांधी की 157वीं जयंती है और साथ ही देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती भी है। सत्य, अहिंसा और सादगी के ये दो पुजारी आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा हैं।
सत्य और अहिंसा के पुजारी: महात्मा गांधी
वर्ष 1869 में गुजरात के पोरबंदर में जन्मे गांधी ने बिना हथियार उठाए एक साम्राज्य को झुका दिया। उनका सबसे बड़ा हथियार था सत्याग्रह — सत्य के लिए अडिग आग्रह। असहयोग आंदोलन (1920), दांडी मार्च और सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) तथा भारत छोड़ो आंदोलन (1942) के जरिए उन्होंने पूरे देश को एक सूत्र में पिरोया।
गांधी का संघर्ष सिर्फ भारत की आज़ादी तक सीमित नहीं रहा। दुनिया भर में अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रतिरोध के आंदोलनों ने उनसे प्रेरणा ली। इसीलिए 2 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र भी अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाता है — यह सम्मान किसी एक देश का नहीं, पूरी मानवता की ओर से है।
30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में उनकी हत्या कर दी गई, लेकिन सत्य और अहिंसा के उनके विचार आज भी उतने ही जीवित हैं।
जय जवान जय किसान: लाल बहादुर शास्त्री

2 अक्टूबर को ही वर्ष 1904 में उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में लाल बहादुर शास्त्री का जन्म हुआ था। काशी विद्यापीठ से शिक्षा प्राप्त करने पर उन्हें “शास्त्री” की उपाधि मिली, जो आगे चलकर उनके नाम का हिस्सा बन गई।
वर्ष 1964 से 1966 तक वे देश के दूसरे प्रधानमंत्री रहे। वर्ष 1965 के युद्ध के समय उन्होंने जिस दृढ़ता से देश का नेतृत्व किया, उसने हर भारतीय का हौसला बढ़ा दिया। उन्होंने “जय जवान, जय किसान” का नारा दिया — सेना के शौर्य और किसान के परिश्रम को एक ही मंच पर सम्मान देने वाला नारा। उनके कार्यकाल में हरित क्रांति और श्वेत क्रांति को भी बढ़ावा मिला।
11 जनवरी 1966 को ताशकंद में उनका निधन हो गया। छोटे कद के इस महान नेता की सादगी और ईमानदारी आज भी राजनीति के लिए आदर्श है।
