भोपाल ब्यूरो। आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा लेने वाले मरीजों के लिए बड़ी खबर है। एक अक्टूबर से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के निजी अस्पतालों के लिए एनएबीएच (नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स) का प्रमाणन अनिवार्य कर दिया गया है। तय समय सीमा तक प्रमाणपत्र जमा नहीं करने पर 126 निजी अस्पतालों की योजना से मान्यता समाप्त कर दी गई है, जिनमें भोपाल के 51, इंदौर के 30, ग्वालियर के 33 और जबलपुर के 12 अस्पताल शामिल हैं।
मेडिसिन पैकेज के लिए पूर्ण प्रमाणन जरूरी
स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार जनरल मेडिसिन और गंभीर बीमारियों के इलाज यानी मेडिसिन पैकेज के लिए अस्पतालों के पास पूर्ण एनएबीएच प्रमाणपत्र होना अनिवार्य होगा। सर्जरी और अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए कम से कम एंट्री लेवल एनएबीएच सर्टिफिकेट जरूरी किया गया है। चारों महानगरों में फिलहाल 739 अस्पताल योजना से जुड़े हैं, जिनमें से केवल 310 के पास ही निर्धारित प्रमाणपत्र है।
छह महीने की मोहलत के बाद सख्ती

विभाग ने पहले यह शर्त एक अप्रैल से लागू करने का निर्णय लिया था, लेकिन निजी अस्पताल संचालकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर तैयारी के लिए समय मांगा था। इसके बाद अस्पतालों को 30 सितंबर तक की मोहलत दी गई थी। विभाग ने अब स्पष्ट कर दिया है कि समय सीमा आगे नहीं बढ़ाई जाएगी और बिना प्रमाणपत्र वाले अस्पतालों को पैनल से हटा दिया जाएगा।
छोटे शहरों के अस्पतालों को राहत
छोटे शहरों और कस्बों के निजी अस्पतालों को राहत देते हुए एनएबीएच एंट्री लेवल मान्यता का विकल्प दिया गया है। ऐसे अस्पतालों को अगले दो वर्षों के भीतर पूर्ण एनएबीएच मान्यता प्राप्त करनी होगी ताकि वे योजना से जुड़े रह सकें।
मरीजों की परेशानी बढ़ी, संचालकों के सवाल
मान्यता समाप्त होने के बाद प्रभावित अस्पतालों में पहुंचे आयुष्मान कार्डधारकों को कैशलेस इलाज का लाभ नहीं मिल रहा है और उन्हें दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। वहीं कुछ निजी अस्पताल संचालकों का आरोप है कि बकाया भुगतान में देरी और प्रमाणन की लागत के कारण छोटे अस्पतालों के लिए शर्त पूरी करना मुश्किल हो रहा है।
