
बुधवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब प्रशासन ने एक प्राचीन बावड़ी को तोड़ने का काम शुरू किया। इसकी जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी और जागरूक नागरिक मौके पर पहुंच गए और विरोध जताया।
प्रदर्शनकारियों ने मेट्रो अधिकारियों से बावड़ी तोड़ने की आधिकारिक अनुमति दिखाने की मांग की और काम तुरंत रोकने की चेतावनी दी। विरोध बढ़ने पर फिलहाल बावड़ी तोड़ने का कार्य रोक दिया गया है।
मौके पर पहुंचे दिग्गज विरोध प्रदर्शन में शहर के जाने-माने पर्यावरणविद डॉ. डीके वाघेला, चंद्रशेखर गवली, डॉ. सुभाष बारोट और जनहित पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय जैन शामिल हुए। इनके साथ ही समाजसेवी शकील खान और अन्य कई जागरूक नागरिक भी मौके पर मौजूद रहे। जब क्रेन के माध्यम से बावड़ी को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई, तब इन सभी लोगों ने बावड़ी के भीतर उतरकर नारेबाजी की और काम को बीच में ही रुकवा दिया।
पर्यावरणविदों का कहना है कि किसी भी ऐतिहासिक धरोहर या जल स्रोत को नष्ट करने से पहले विशेष अनुमति और पारदर्शी प्रक्रिया आवश्यक है। विरोध प्रदर्शन में शहर के वरिष्ठ पर्यावरणविद, समाजसेवी और जनप्रतिनिधि भी शामिल रहे।
