मनीष सिंह को फिर सौंपी जनसंपर्क की कमान 

भोपाल/इंदौर।

प्रशासनिक दक्षता, संकट प्रबंधन और नवाचारों के लिए पहचाने जाने वाले मनीष सिंह को मध्यप्रदेश शासन ने जनसम्पर्क आयुक्त नियुक्त किया है। उनकी यह नियुक्ति शासन–जनता संवाद को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

कोविड काल में इंदौर को संभालने की मिसाल

कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में इंदौर कलेक्टर के रूप में मनीष सिंह ने जिस सूझबूझ और सख्ती से प्रशासनिक व्यवस्था संभाली, वह प्रदेश ही नहीं, देशभर में सराही गई। संक्रमण नियंत्रण, स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की मजबूती, अनुशासनात्मक निर्णय और जनता से सतत संवाद के चलते इंदौर संकट से अपेक्षाकृत तेजी से उबर सका। उस दौर में उनका नेतृत्व प्रशासनिक दृढ़ता का प्रतीक बनकर सामने आया।

इंदौर निगम आयुक्त से मंडी सचिव तक, शहर से रहा गहरा नाता

मनीष सिंह का इंदौर से जुड़ाव नया नहीं है। इससे पूर्व वे इंदौर नगर निगम आयुक्त और मंडी सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। इन भूमिकाओं में रहते हुए उन्होंने शहरी प्रबंधन, व्यापारिक व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए। यही कारण है कि इंदौर से उनका एक मजबूत प्रशासनिक नाता माना जाता है, जिसने शहर के विकास में निरंतर योगदान दिया।

जनसम्पर्क और पत्रकारिता को मिलेगी नई दिशा

अब जनसम्पर्क आयुक्त के रूप में उनसे अपेक्षा है कि वे शासन की नीतियों और योजनाओं को प्रभावी, पारदर्शी और आधुनिक माध्यमों से जनता तक पहुंचाएंगे। माना जा रहा है कि मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार में यह नियुक्ति पत्रकारिता और जनसम्पर्क के क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। प्रशासन और मीडिया के बीच समन्वय, सूचना की सटीकता और समयबद्ध संप्रेषण पर विशेष जोर दिया जाएगा।

कुल मिलाकर, मनीष सिंह की नियुक्ति न केवल उनके इंदौर में किए गए उल्लेखनीय कार्यों की स्वीकृति है, बल्कि मोहन सरकार के जनसम्पर्क तंत्र को अधिक सशक्त, विश्वसनीय और प्रभावी बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम भी मानी जा रही है।


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