इंदौर ब्यूरो
सार: भारतीय जनता पार्टी के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत कल 30 अक्टूबर को इंदौर में निकलने वाले बड़े पैदल मार्च से पहले सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस पदयात्रा की तारीख आगे बढ़ाकर दीपावली के बाद करने की मांग की है, जबकि भाजपा की तैयारी पूरी है और कार्यक्रम तय समय पर प्रस्तावित है।
कल सुबह सुभाष नगर से पाटनीपुरा तक मार्च
इंदौर में भाजपा का पैदल मार्च कल 30 अक्टूबर को सुबह सुभाष नगर चौराहे से शुरू होकर एलआईजी चौराहा मार्ग से होते हुए पाटनीपुरा चौराहे तक जाएगा। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। पार्टी ने इस कार्यक्रम के लिए पंजीयन की व्यवस्था की है और कार्यकर्ताओं व समर्थकों से इसमें शामिल होने की अपील की गई है।
मार्च की तैयारियों के तहत सोमवार को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, विधायक रमेश मेंदोला, विधायक गोलू शुक्ला और महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी तय रास्ते का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान रास्ते में होने वाली व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए गए। पार्टी का कहना है कि यह मार्च सामाजिक एकजुटता और राष्ट्रीय अखंडता का संदेश देने के लिए निकाला जा रहा है।
कांग्रेस की आपत्ति: त्योहार के बीच बाजारों पर असर की आशंका
दूसरी ओर कांग्रेस ने दीपावली से ठीक पहले इस पदयात्रा के आयोजन पर ऐतराज जताया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस के पूर्व संभागीय प्रवक्ता विवेक खंडेलवाल और ब्लॉक अध्यक्ष गिरीश जोशी ने कहा है कि दीपावली व्यापारियों के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी अवसर होता है। इस समय कपड़े, रेडीमेड गारमेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, किराना, मिठाई, बर्तन, सजावटी सामान और पूजा सामग्री की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही अहम होती है।
कांग्रेस नेताओं का दावा है कि यदि सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक प्रमुख व्यापारिक मार्गों पर यातायात प्रभावित होता है, तो दुकानों तक ग्राहकों की पहुंच मुश्किल हो सकती है। इससे छोटे और मध्यम व्यापारियों की बिक्री पर असर पड़ने की आशंका है। नेताओं ने कारोबार पर करीब 5 करोड़ रुपये तक असर पड़ने की आशंका जताई है। यह कांग्रेस नेताओं का अनुमान है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस नेताओं ने भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा से पदयात्रा की तारीख बदलने की मांग की है। उनका कहना है कि त्योहार के लिए व्यापारी पहले से अतिरिक्त माल खरीदते हैं, कर्मचारियों की व्यवस्था करते हैं और अपनी पूंजी लगाते हैं। ऐसे समय में ग्राहकों की आवाजाही बाधित होने से उनकी आर्थिक मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
किन बाजारों पर असर पड़ने की बात
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक सुभाष नगर, परदेशीपुरा, कुलकर्णी का भट्टा, कल्याण मिल, राजकुमार मिल, मालवा मिल, बेकरी गली और पाटनीपुरा सहित प्रस्तावित यात्रा मार्ग से जुड़े बाजारों में बड़ी संख्या में व्यापारी रोजाना की बिक्री पर निर्भर हैं। यदि पदयात्रा का मार्ग एलआईजी चौराहे की ओर निर्धारित होता है, तो वहां के व्यापारिक प्रतिष्ठान भी प्रभावित हो सकते हैं।
नेताओं ने यह भी कहा है कि पदयात्रा के दौरान यातायात प्रभावित होने से खरीदारी के लिए निकलने वाले लोगों को जाम, पार्किंग और बाजारों तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसका असर सिर्फ दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कर्मचारियों, उनके परिवारों और आपूर्ति से जुड़े अन्य कारोबारों पर भी पड़ सकता है। बड़े राजनीतिक आयोजनों में कार्यकर्ताओं की भागीदारी के साथ-साथ आम नागरिकों की सुविधा और व्यापारिक गतिविधियों का ध्यान रखना भी जरूरी है, ऐसा कांग्रेस नेताओं का कहना है।
भाजपा का रुख: तैयारी पूरी, कार्यक्रम तय समय पर
भाजपा की ओर से पदयात्रा की तारीख बदलने की कोई घोषणा नहीं हुई है और कार्यक्रम 30 अक्टूबर को ही प्रस्तावित है। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने लोगों से मार्च में शामिल होने की अपील करते हुए कहा है कि देशभर में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ आंदोलन चल रहा है और इंदौर का मार्च उसी कड़ी का हिस्सा है।
विजयवर्गीय ने अपने संदेश में कहा है कि देश की प्रगति कुछ लोगों को देखी नहीं जा रही है और देश में अराजकता फैलाने की कोशिश हो रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया है कि कोई यह कैसे कह सकता है कि भारत के टुकड़े होंगे। विजयवर्गीय ने कहा है कि पूर्वजों ने देश की आजादी और अखंडता के लिए बलिदान दिया है और उसी विरासत की रक्षा के लिए समाज के सभी वर्गों, व्यापारियों और प्रबुद्ध जनों को एकजुट होना होगा।
SIR विवाद: क्यों हो रहा है यह मार्च
यह पूरा अभियान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, यानी SIR, को लेकर चल रहे विवाद की पृष्ठभूमि में हो रहा है। कांग्रेस SIR का विरोध कर रही है, जबकि भाजपा इन आयोजनों के जरिए मतदाता सूची की शुद्धता के मुद्दे पर अपना पक्ष रखना चाहती है। इंदौर के बाद जबलपुर और भोपाल में भी इसी अभियान के तहत पदयात्राएं प्रस्तावित हैं, हालांकि उन शहरों की तारीखों को लेकर अलग-अलग खबरों में भिन्नता है, इसलिए इस खबर में सिर्फ इंदौर के कार्यक्रम पर ध्यान रखा गया है।
आगे क्या: कल सुबह सबकी नजर मार्च पर
कल सुबह इंदौर में इस पदयात्रा पर सबकी नजर रहेगी। एक ओर भाजपा इसे लोकतंत्र की मजबूती और राष्ट्रहित के संकल्प के रूप में पेश कर रही है, दूसरी ओर कांग्रेस त्योहार के बीच व्यापारियों की परेशानी का मुद्दा उठा रही है। मार्च के बाद यह साफ होगा कि इसमें कितनी भागीदारी रही और मार्ग के बाजारों पर इसका क्या असर पड़ा। इस खबर से जुड़ा हर नया घटनाक्रम पाठकों तक पहुंचाया जाएगा।
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