भोपाल ब्यूरो
सार: भोपाल के बोर्ड ऑफिस चौराहे पर गुरुवार को प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 के मेरिट होल्डर अभ्यर्थियों ने नियुक्ति पत्र जारी करने और जॉइनिंग देने की मांग को लेकर चक्काजाम कर दिया। सड़क पर बैठकर थालियां बजाईं गईं, नारेबाजी हुई और यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस के हटाने के प्रयास के दौरान अभ्यर्थियों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
बोर्ड ऑफिस चौराहे पर क्या हुआ
गुरुवार, 29 अक्टूबर को भोपाल के बोर्ड ऑफिस चौराहे पर बड़ी संख्या में प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 के अभ्यर्थी सड़क पर उतर आए। अभ्यर्थियों का कहना है कि मेरिट सूची में नाम आने के बावजूद उन्हें अब तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला है और जॉइनिंग भी नहीं दी गई है। इसी मांग को लेकर उन्होंने चौराहे पर बैठकर प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर दी।
प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने थालियां बजाकर और नारेबाजी करके शासन और प्रशासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचने का प्रयास किया। सैकड़ों की संख्या में सड़क पर उतरे अभ्यर्थियों के कारण चौराहे पर यातायात कुछ समय के लिए प्रभावित रहा और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। एमपी नगर क्षेत्र में भी जाम की स्थिति बनने की जानकारी सामने आई है।
अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें क्या हैं
अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग यही है कि उन्हें जल्द से जल्द नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं और विद्यालयों में पदस्थापना दी जाए। उनका कहना है कि मेरिट सूची में स्थान पाने के बाद भी नियुक्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है, जिससे उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है।
अभ्यर्थियों ने यह भी कहा है कि जब तक नियुक्ति और पदस्थापना को लेकर कोई ठोस निर्णय या लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। कुछ अभ्यर्थियों ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग भी उठाई है। उनका तर्क है कि विद्यालयों में शिक्षकों की आवश्यकता को देखते हुए पदों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।

क्लॉज-49 और डीएलएड का विवाद क्या है
इस आंदोलन के केंद्र में भर्ती नियमों का क्लॉज-49 और डीएलएड डिग्री से जुड़ी शर्त है। अभ्यर्थियों के अनुसार, दस्तावेज सत्यापन के दौरान डीएलएड डिग्री से संबंधित शर्त को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। अभ्यर्थियों का कहना है कि इसी शर्त के कारण उनकी नियुक्ति अटकी हुई है।
अभ्यर्थियों ने भर्ती नियमों के इस प्रावधान पर सवाल उठाए हैं और मांग की है कि मामले का समाधान करते हुए उन्हें नियुक्ति पत्र दिए जाएं। उनका कहना है कि नियमों की व्याख्या को लेकर स्पष्टता न होने से योग्य अभ्यर्थी भी नियुक्ति से वंचित रह गए हैं। इस विवाद का समाधान ही इस आंदोलन की मुख्य मांगों में से एक है।
पुलिस और यातायात की स्थिति
प्रदर्शन के दौरान जब पुलिस बल ने चौराहे से रास्ता खुलवाने का प्रयास किया, तो कई अभ्यर्थी सड़क पर ही लेट गए और एक-दूसरे का हाथ पकड़कर डटे रहे। इस दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच तीखी बहस, धक्का-मुक्की और खींचतान देखने को मिली।
स्थिति तनावपूर्ण होने पर जब पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू किया, तो वे सड़क पर ही बैठकर राष्ट्रगान गाने लगे। पुलिस अधिकारी लगातार मार्ग को सुचारू बनाने के प्रयास में जुटे रहे। यातायात बहाल करने के लिए अभ्यर्थियों को सड़क से हटाने की कोशिश की गई, लेकिन अभ्यर्थियों के सड़क पर लेट जाने और एक-दूसरे का हाथ पकड़कर बैठने के कारण उन्हें हटाने में परेशानी हुई।
22 दिन पहले भी हुआ था ऐसा ही प्रदर्शन
शिक्षक अभ्यर्थियों का यह कोई पहला प्रदर्शन नहीं है। इससे पहले भी करीब 22 दिन पूर्व एमपी नगर चौराहे पर अभ्यर्थियों ने करीब चार घंटे तक चक्काजाम कर अपना विरोध दर्ज कराया था। उस समय भी नियुक्ति की मांग को लेकर ही प्रदर्शन हुआ था।
उस प्रदर्शन के बाद उपजिलाधिकारी लाखन सिंह चौधरी और पुलिस अधिकारियों के साथ हुई वार्ता के उपरांत अभ्यर्थियों ने आंदोलन वापस लिया था। अभ्यर्थियों के अनुसार उस दौरान चेतावनी दी गई थी कि यदि शिक्षा मंत्री या मुख्यमंत्री स्तर से वार्ता कर समाधान नहीं निकाला गया, तो वे फिर से आंदोलन करेंगे। इसी क्रम में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर सड़क पर उतर आए हैं।
अब तक क्या आश्वासन मिला, क्या नहीं
अभ्यर्थियों के अनुसार, बार-बार आश्वासन मिलने के बाद भी कार्रवाई न होने से उनमें नाराजगी है। उनका कहना है कि आश्वासनों के बावजूद नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुए हैं, इसलिए अब वे ठोस निर्णय या लिखित आश्वासन चाहते हैं। अभ्यर्थियों की ओर से बोलते हुए विमल कुमार ने कहा है कि जब तक नियुक्ति और पदस्थापना को लेकर कोई ठोस निर्णय या लिखित आश्वासन नहीं मिलता, उनका आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।
इस प्रदर्शन पर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान इन रिपोर्टों में दर्ज नहीं हुआ है। यानी अभ्यर्थियों की मांगों पर विभाग का रुख क्या है, यह अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हुआ है। अभ्यर्थियों की मांगें उनकी ओर से रखी गई हैं और इन पर अंतिम निर्णय विभाग और शासन स्तर पर ही लिया जाना है।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि विभाग अभ्यर्थियों की मांगों पर क्या कदम उठाता है। अभ्यर्थियों ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया है, इसलिए आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर नई गतिविधियां सामने आ सकती हैं। यदि विभाग की ओर से ठोस निर्णय या लिखित आश्वासन मिलता है, तो आंदोलन थम सकता है।
दूसरी ओर, यदि समाधान नहीं निकलता है, तो अभ्यर्थियों का चरणबद्ध आंदोलन जारी रहने की संभावना है। इससे भोपाल के व्यस्त चौराहों पर यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। प्रशासन को भी इस बात का ध्यान रखना होगा कि प्रदर्शन के दौरान यातायात और कानून-व्यवस्था दोनों बनी रहें।
प्राथमिक शिक्षा और भर्ती से जुड़ा संदर्भ
प्राथमिक शिक्षा किसी भी राज्य की शिक्षा व्यवस्था की नींव मानी जाती है। प्राथमिक विद्यालयों में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति से बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है। यही कारण है कि शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता की मांग हमेशा उठती रही है।
भर्ती प्रक्रिया में मेरिट सूची, दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति पत्र जारी करना अहम चरण होते हैं। किसी भी चरण में देरी होने पर अभ्यर्थियों में असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है, क्योंकि उनकी रोजगार की योजना इसी प्रक्रिया से जुड़ी होती है। भोपाल में आज का प्रदर्शन इसी असंतोष का एक उदाहरण है।
शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इस मुद्दे पर आगे की जानकारी सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी। तब तक अभ्यर्थियों की मांगें, विभाग का रुख और आंदोलन की आगे की रूपरेखा ही इस खबर के मुख्य पहलू बने रहेंगे।
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