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सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा को छतरपुर ने पलकों पर बिठाया: बागेश्वर महाराज बोले — हम मठ से बाहर आए, लोग घरों से निकले और कारवां बन गया

छतरपुर में रथ यात्रा के दौरान संबोधित करते बागेश्वर महाराज

छतरपुर ब्यूरो।

सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा के छतरपुर पहुंचने पर शहर में भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला। यात्रा के स्वागत में लोग घरों से बाहर निकले और जगह-जगह श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ यात्रा का अभिनंदन किया। सनातन संस्कृति, सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण के संदेश को लेकर निकली इस यात्रा को छतरपुरवासियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।

शहर में स्वागत

बागेश्वर महाराज की यात्रा जैसे ही छतरपुर शहर में प्रवेश हुई, सनातनियों ने आत्मीय स्वागत किया। महाराज ने कहा कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए यात्राएं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि लोग आज सनातन के लिए एकजुट नहीं होंगे तो उनकी पीढ़ियां उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी। यात्रा से जुड़े लोगों के अनुसार, पेप्टेक टाउन से रेलवे स्टेशन तक की करीब 10 किलोमीटर की दूरी रथ यात्रा ने करीब 5 घंटे में पूरी की। इस दौरान शहर में उमड़े उत्साह और यात्रा के प्रति लोगों की सहभागिता देखने को मिली।

छतरपुर में रथ यात्रा के स्वागत में उमड़ी भीड़

सात संकल्प का संदेश

सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके माध्यम से समाज को एकजुट करने, सांस्कृतिक चेतना जगाने और सकारात्मक बदलाव का संदेश भी दिया गया। यात्रा के माध्यम से लोगों को सात संकल्प दिलाए गए, जो उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक बताए गए। इस अवसर पर गोपेश बाबा जी (वृंदावन), मौनी महाराज (हरिद्वार), श्रृंगारी महाराज (छतरपुर), मनसुख महाराज (वृंदावन) सहित बड़ी संख्या में सनातन प्रेमी उपस्थित रहे।

व्यक्ति से समाज, समाज से राष्ट्र

यात्रा का मूल संदेश व्यक्तिगत सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाकर समाज और राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना रहा। इस विचार को रेखांकित करते हुए महाराज ने संदेश दिया कि व्यक्ति की सोच बदलने से समाज में परिवर्तन आएगा और समाज का परिवर्तन ही राष्ट्र में परिवर्तन लाएगा। यह संदेश समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभाने और राष्ट्रहित में योगदान देने की प्रेरणा देता है।

आतिशबाजी और उत्साह

बागेश्वर महाराज के आने की खबर मिलते ही उत्साही सनातनियों ने आतिशबाजी की। मंच पर भी आतिशबाजी सजाई गई थी। बताया गया कि आतिशबाजी इतनी देर तक हुई कि बागेश्वर महाराज को स्वयं कहना पड़ा कि अब बंद कर दीजिए।

देश-विदेश से पहुंचे लोग

यात्रा में शामिल होने के लिए न केवल देश के विभिन्न हिस्सों से लोग आए, बल्कि नेपाल सहित अन्य देशों के शिष्य मंडल भी शामिल रहे, ऐसा यात्रा से जुड़े लोगों ने बताया। लोगों को महाराज में आशा की किरण दिख रही है। हजारों की संख्या में लोगों की उपस्थिति ने यात्रा को लेकर उत्साह को और बढ़ा दिया।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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