
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज कार्य को नई गति देने का अवसर है।
रायपुर।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अभनपुर स्थित सोनपैरी में असंग देव कबीर आश्रम परिसर में विशाल हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय संत पूज्य गुरुदेव श्री असंग देव जी ने की, जबकि गायत्री परिवार की समाजसेवी उर्मिला नेताम विशिष्ट अतिथि रहीं।
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज कार्य को नई गति देने का अवसर है। उन्होंने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर स्वयंसेवक समाज में “पंच परिवर्तन” के संदेश के साथ कार्य कर रहे हैं। उन्होंने आपसी भेदभाव समाप्त करने, पारिवारिक संवाद बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और स्वभाषा के प्रयोग तथा धर्मसम्मत आचरण को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।


डॉ. भागवत ने कहा कि हम केवल समस्याओं की चर्चा नहीं करते, बल्कि उनके समाधान पर भी विचार करते हैं। यदि समाज संगठित और जागरूक रहेगा तो कोई भी संकट हमें कमजोर नहीं कर सकता।
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय संत पूज्य गुरुदेव श्री असंग देव जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व्यक्ति को स्वयंसेवा और संगठन का महत्व सिखाता है। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म सभी पंथों की जड़ है और आज के समय में बँटने का नहीं, बल्कि संगठित होने का समय है। उन्होंने कहा कि भारत पुण्य भूमि है और यहां जन्म लेना सौभाग्य की बात है। संकट के समय बिना प्रचार के सेवा करने वाला संघ स्वयंसेवक समाज की बड़ी शक्ति है।
विशिष्ट अतिथि गायत्री परिवार की समाजसेवी उर्मिला नेताम ने कहा कि आज समाज को संगठन और संस्कारों की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने परिवार और भारतीय संस्कृति को बचाने में मातृशक्ति की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ी लोक कलाकार और गायिका आरु साहू एवं उनकी टीम ने भजन और लोकगीत प्रस्तुत कर वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।
हिन्दू सम्मेलन के समापन पश्चात सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सोनपैरी गांव में कोविदार का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
