भागवत कथा का सुदामा चरित्र से हुआ समापन

संतो की कृपा और मार्गदर्शन में ही नारायण को प्राप्त किया जा सकता है

आयोजक रजत शर्मा एवं संयोजक विशाल पटेल ने बताया कि वैष्णव धाम परिसर स्कीम 140 में आयोजित भव्य धार्मिक आयोजन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। आयोजक ने बताया कि संतों के चरण चिन्ह से ही हर कार्य सफल होता है इसी तर्क में आज की कथा में चार संप्रदाय के अध्यक्ष हनुमान दास महामंडलेश्वर रामगोपलदास महराज ,जगदीश दास महाराज, की उपस्थिति में भक्तों ने भागवत प्रसाद ग्रहण किया
यह आयोजन मधु वर्मा के संरक्षण एवं पुष्यमित्र के मार्गदर्शन में किया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। आयोजन के सातवें एवं अंतिम दिन सुदामा चरित्र का भावपूर्ण गुणगान किया गया, जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे।
कथा वाचक कु जानवी उपाध्याय द्वारा सुदामा जी के जीवन प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया। उन्होंने बताया कि सुदामा का जीवन सच्ची मित्रता, विनम्रता, त्याग और संतोष का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता को आदर्श बताते हुए कहा गया कि सच्चे मित्रता में कोई स्वार्थ नहीं होता। सुदामा की दरिद्रता के बावजूद उनके मन में कभी अहंकार नहीं आया और उनकी भक्ति ही उनका सबसे बड़ा धन थी। कथा के दौरान जैसे ही सुदामा और श्रीकृष्ण के मिलन का प्रसंग आया, पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया।
सातवें दिन की कथा में विशेष रूप से विधायक मधु वर्मा भी पहुंचे। उन्होंने व्यासपीठ पर पहुंचकर कथा व्यास का आशीर्वाद लिया और आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। विधायक मधु वर्मा ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देते हैं और नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का कार्य करते हैं। आयोजक मंडल चंद्रशेखर मालवीय मुकेश पवार चेतन शिवहरे पंकज लड्डा मंगेश यादव नितेश यादव प्रतीक सिंह विवेक रजक राजू सिलावट प्रीति हेमा शर्मा अपूर्व शर्मा के प्रयासों से इस भागवत कथा का सफल आयोजन हुआ

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