
अनुषठ चोहान -इंदौर रिपोर्ट
इंदौर।
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल आपूर्ति से उत्पन्न गंभीर स्थिति के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में प्रदेश के किसी भी हिस्से में ऐसी कष्टदायक और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति दोबारा निर्मित न हो, इसके लिए सरकार पूरी गंभीरता से व्यापक प्रबंध कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इलाज, दवाइयों, जांच और निगरानी में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि किसी भी विभाग में अधिकारियों या संसाधनों की कमी है, तो उसकी जानकारी तुरंत दें, सरकार तत्काल आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध कराएगी।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने चिकित्सा व्यवस्थाओं, अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति, दवाइयों की उपलब्धता, स्वास्थ्य अमले की तैनाती और निगरानी व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी मरीजों को समय पर और समुचित उपचार मिले तथा किसी भी प्रकार की अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न न हो।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह भी कहा कि जलप्रदाय और सीवरेज व्यवस्था की तकनीकी जांच गहराई से की जाए, ताकि दूषित पानी की आपूर्ति की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल स्रोतों, टंकियों, पाइप लाइनों और सीवरेज नेटवर्क की सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव श्री संजय दुबे स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की समीक्षा करेंगे। वे जलप्रदाय, सीवरेज सुधार कार्यों, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रगति का प्रत्यक्ष अवलोकन करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक चुनौती नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता का विषय है। सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और हर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि नागरिकों का विश्वास बना रहे और स्थिति पूरी तरह नियंत्रित हो।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, नगरीय प्रशासन, जिला प्रशासन और मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
